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जमीन बंजर, कागज हरे-भरे
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 02 Oct 2018 12:28 AM IST
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dancing plant
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मंझनपुर। दोआबा में वन विभाग के अफसर हवा में हरियाली ला रहे हैं। उन्होंने करीब 22 हजार पौधे कागज पर लगा दिए। पश्चिमशरीरा इलाके के महावां गांव में 15 अगस्त से पहले पौधों का रोपण होना चाहिए था। विभागीय उदासीनता के चलते अभी तक एक भी पौधे नहीं लगाए गए। इसकी जानकारी होने पर चीफ फारेस्टर (वन संरक्षक) ने प्रभागीय वनाधिकारी के खिलाफ जांच बैठा दी है।
बारिश के दौरान वन विभाग को जिले में करीब तीन लाख 40 हजार चार सौ पौधों का रोपण कराना था। जबकि अन्य विभागों के पास 5.10 लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य था। पश्चिमशरीरा इलाके के जाफरपुर महावां गांव में खाली पड़ी ग्राम सभा की करीब 20 हेक्टेयर भूमि पर तकरीबन 22 हजार पौधे लगाए जाने थे। यह जिम्मेदारी वन विभाग की थी। नियमानुसार 15 अगस्त से पहले पौधरोपण हो चाना चाहिए था, लेकिन अभी तक मौके पर एक भी पौधे नहीं लगाए गए। बताया जाता है कि विभागीय अधिकारियों ने पौधरोपण किए जाने की फर्जी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। हफ्ते भर पहले इसकी जानकारी होते ही चीफ फारेस्टर (वन संरक्षक) डॉ. राजीव मिश्र बिफर गए। इन्होंने फर्जीवाड़े की जांच शुरू करा दी है। जांच टीम में फतेहपुर, कौशाम्बी और प्रतापगढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी शामिल हैं। फिलहाल जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। माना जा रहा है कि इनकी रिपोर्ट पर कार्रवाई हो सकती है।
सरकारी आंकड़े देखें तो दोआबा में इस बार करीब आठ लाख 58 हजार चार सौ पौधे रोपित किए गए हैं। अधिकारियों, कर्मचारियों ने शासन का दबाव होने की वजह से पौधरोपण तो कर दिया। फिर पौधों की हालत क्या है,इस ओर किसी ने नहीं देखा। ट्री गार्ड आदि की व्यवस्था भी नहीं की गई। इसी अनदेखी का नतीजा है कि लाखों पौधे लगते ही सूख गए हैं। कुछ मवेशियों का चारा बन चुके हैं।वहीं डीएम मनीष कुमार का कहना है कि पौधरोपण में गड़बड़झाले की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो गलत है। इसकी जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बारिश के दौरान वन विभाग को जिले में करीब तीन लाख 40 हजार चार सौ पौधों का रोपण कराना था। जबकि अन्य विभागों के पास 5.10 लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य था। पश्चिमशरीरा इलाके के जाफरपुर महावां गांव में खाली पड़ी ग्राम सभा की करीब 20 हेक्टेयर भूमि पर तकरीबन 22 हजार पौधे लगाए जाने थे। यह जिम्मेदारी वन विभाग की थी। नियमानुसार 15 अगस्त से पहले पौधरोपण हो चाना चाहिए था, लेकिन अभी तक मौके पर एक भी पौधे नहीं लगाए गए। बताया जाता है कि विभागीय अधिकारियों ने पौधरोपण किए जाने की फर्जी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। हफ्ते भर पहले इसकी जानकारी होते ही चीफ फारेस्टर (वन संरक्षक) डॉ. राजीव मिश्र बिफर गए। इन्होंने फर्जीवाड़े की जांच शुरू करा दी है। जांच टीम में फतेहपुर, कौशाम्बी और प्रतापगढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी शामिल हैं। फिलहाल जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। माना जा रहा है कि इनकी रिपोर्ट पर कार्रवाई हो सकती है।
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सरकारी आंकड़े देखें तो दोआबा में इस बार करीब आठ लाख 58 हजार चार सौ पौधे रोपित किए गए हैं। अधिकारियों, कर्मचारियों ने शासन का दबाव होने की वजह से पौधरोपण तो कर दिया। फिर पौधों की हालत क्या है,इस ओर किसी ने नहीं देखा। ट्री गार्ड आदि की व्यवस्था भी नहीं की गई। इसी अनदेखी का नतीजा है कि लाखों पौधे लगते ही सूख गए हैं। कुछ मवेशियों का चारा बन चुके हैं।वहीं डीएम मनीष कुमार का कहना है कि पौधरोपण में गड़बड़झाले की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो गलत है। इसकी जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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