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समाजवादी पेंशन सूची से नाम कटने से गुस्सा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Dec 2014 12:32 AM IST
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करारी (ब्यूरो)। समाजवादी पेंशन की सूची से नाम काटे जाने से हकीमपुर गांव की महिलाओं में गुस्सा है। आरोप है कि स्थानीय अधिकारियों ने गांव के ही कुछ लोगों की मिलीभगत से उनका नाम सूची से काट दिया है। महिलाओं ने मंगलवार को इसकी शिकायत एसडीएम से की। एसडीएम ने बीडीओ को सत्यापन का निर्देश दिया है।
मंझनपुर तहसील क्षेत्र के हकीमपुर गांव की रहने वाली मंजू देवी, नीता देवी, राजकली, राजेश कुमार, शांति देवी, ननकी देवी, हुबलाल, वीरेंद्र कुमार आदि ने बताया कि उनके गांव में समाजवादी पेंशन योजना के लिए अनुसूचित जाति का लक्ष्य 112, पिछड़ी जाति का 135 और अन्य जातियों के लिए 35 लाभार्थी रखा गया है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अनुसूचित जाति के 143, पिछड़ी जाति के 75 और अन्य जातियों के कुल 5 लोगों ने आवेदनपत्र जमा किया था। लोगों ने बताया कि इस गांव में लाभार्थियों की जो सूची बनी है, उसमें अनुसूचित जाति के 28, पिछड़ी जाति के 31 और अन्य जाति के पांच व्यक्ति की ही शामिल हैं। लोगों का आरोप है कि जान बूझकर सूची से गरीबों का नाम हटा दिया गया है। जबकि अभी लक्ष्य भीपूरा नहीं हुआ है। लोगों ने आशंका जाहिर की है कि ऐसा गांव के कुछ दलालों ने अफसरों से मिलीभगत करके किया है। ताकि लक्ष्य पूरा कराने के दौरान वे सुविधाशुल्क वसूल कर सके। सूची से नाम गायब होने से गुस्साए ग्रामीणों ने मंगलवार को एसडीएम से शिकायत की। उप जिलाधिकारी ने बीडीओ को जांच करने का निर्देश दिया है।
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मंझनपुर तहसील क्षेत्र के हकीमपुर गांव की रहने वाली मंजू देवी, नीता देवी, राजकली, राजेश कुमार, शांति देवी, ननकी देवी, हुबलाल, वीरेंद्र कुमार आदि ने बताया कि उनके गांव में समाजवादी पेंशन योजना के लिए अनुसूचित जाति का लक्ष्य 112, पिछड़ी जाति का 135 और अन्य जातियों के लिए 35 लाभार्थी रखा गया है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अनुसूचित जाति के 143, पिछड़ी जाति के 75 और अन्य जातियों के कुल 5 लोगों ने आवेदनपत्र जमा किया था। लोगों ने बताया कि इस गांव में लाभार्थियों की जो सूची बनी है, उसमें अनुसूचित जाति के 28, पिछड़ी जाति के 31 और अन्य जाति के पांच व्यक्ति की ही शामिल हैं। लोगों का आरोप है कि जान बूझकर सूची से गरीबों का नाम हटा दिया गया है। जबकि अभी लक्ष्य भीपूरा नहीं हुआ है। लोगों ने आशंका जाहिर की है कि ऐसा गांव के कुछ दलालों ने अफसरों से मिलीभगत करके किया है। ताकि लक्ष्य पूरा कराने के दौरान वे सुविधाशुल्क वसूल कर सके। सूची से नाम गायब होने से गुस्साए ग्रामीणों ने मंगलवार को एसडीएम से शिकायत की। उप जिलाधिकारी ने बीडीओ को जांच करने का निर्देश दिया है।
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