{"_id":"66eccc8f2976d8524c01d1a7","slug":"life-imprisonment-fine-to-two-accused-of-laborers-murder-kaushambi-news-c-261-1-sald1002-116480-2024-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaushambi News: फतेहपुर के लिए खास- मजदूर की हत्या के दो दोषियों को उम्रकैद, जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaushambi News: फतेहपुर के लिए खास- मजदूर की हत्या के दो दोषियों को उम्रकैद, जुर्माना
Fri, 20 Sep 2024 06:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 20 Sep 2024 06:44 AM IST
विज्ञापन
विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी शिरीन जैदी की अदालत ने 14 साल पुराने हत्या के एक मामले की बृहस्पतिवार को सुनवाई की। मामले में कोर्ट ने दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही नौ-नौ हजार का अर्थदंड भी लगाया है।
महेवाघाट के शाहपुर गांव स्थित नहर में 19 जुलाई 2014 को एक अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ था। युवक की सिर कूंचकर हत्या की गई थी। टिकरा गांव के चौकीदार रामसजीवन की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा था।
बाद में मृतक की पहचान फतेहपुर जिले के धाता कोतवाली अंतर्गत रामपुरवा गांव निवासी रामकृपाल चमार के रूप में हुई थी। विवेचना के दौरान मृतक के पड़ोसी रामकृपाल सिंह, जितेंद्र सिंह, पूनी का पुरवा निवासी प्रमुख सिंह व महेवाघाट कोतवाली के हिनौता निवासी दरोगा उर्फ अंगद का नाम प्रकाश में आया था।
विज्ञापन
विवेचनात्मक कार्रवाई के बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। मुकदमा विशेष न्यायाधीश एससीएसटी शिरीन जैदी की अदालत में चला। शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार मौर्या व पंकज सोनकर ने वादी समेत नौ लोगों की कोर्ट में गवाही कराई। मुकदमे के दौरान ही मुख्य हत्यारोपी रामकृपाल सिंह की मौत हो गई।
दोनों पक्षों के बयान सुनने व पत्रावली में मौजूद साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद बृहस्पतिवार को कोर्ट ने जितेंद्र सिंह व प्रमुख सिंह को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी। वहीं, किशोर होने के कारण तीसरे हत्यारोपी दरोगा सिंह का मामला अभी किशोर न्यायालय में चल रहा है।
-- -
ये था मामला
-- -
पुलिस की विवेचना में पता चला कि मृतक गांव के ही रामकृपाल सिंह के घर में मजदूरी करता था। मृतक के नाम मिली पट्टे की भूमि को जालसाजी कर उसके मालिक ने अपने नाम दर्ज करा ली थी। इसकी जानकारी होने पर मृतक ने रामकृपाल सिंह के यहां नौकरी छोड़ दी।
इसी बीच 16 जुलाई 2010 को रामकृपाल चमार घर से चित्रकूट जाने की बात कहकर निकला था। अगले दिन शाहपुर गांव के समीप नहर में उसका रक्त रंजिश शव बरामद हुआ था। विवेचना के दौरान पता चला कि जमीन की लालच में रामकृपाल सिंह ने तीन अन्य साथियों के साथ मिल हत्या कर शव नहर में फेंक दिया था।
विज्ञापन
महेवाघाट के शाहपुर गांव स्थित नहर में 19 जुलाई 2014 को एक अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ था। युवक की सिर कूंचकर हत्या की गई थी। टिकरा गांव के चौकीदार रामसजीवन की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा था।
विज्ञापन
बाद में मृतक की पहचान फतेहपुर जिले के धाता कोतवाली अंतर्गत रामपुरवा गांव निवासी रामकृपाल चमार के रूप में हुई थी। विवेचना के दौरान मृतक के पड़ोसी रामकृपाल सिंह, जितेंद्र सिंह, पूनी का पुरवा निवासी प्रमुख सिंह व महेवाघाट कोतवाली के हिनौता निवासी दरोगा उर्फ अंगद का नाम प्रकाश में आया था।
विज्ञापन
विवेचनात्मक कार्रवाई के बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। मुकदमा विशेष न्यायाधीश एससीएसटी शिरीन जैदी की अदालत में चला। शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार मौर्या व पंकज सोनकर ने वादी समेत नौ लोगों की कोर्ट में गवाही कराई। मुकदमे के दौरान ही मुख्य हत्यारोपी रामकृपाल सिंह की मौत हो गई।
दोनों पक्षों के बयान सुनने व पत्रावली में मौजूद साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद बृहस्पतिवार को कोर्ट ने जितेंद्र सिंह व प्रमुख सिंह को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी। वहीं, किशोर होने के कारण तीसरे हत्यारोपी दरोगा सिंह का मामला अभी किशोर न्यायालय में चल रहा है।
ये था मामला
पुलिस की विवेचना में पता चला कि मृतक गांव के ही रामकृपाल सिंह के घर में मजदूरी करता था। मृतक के नाम मिली पट्टे की भूमि को जालसाजी कर उसके मालिक ने अपने नाम दर्ज करा ली थी। इसकी जानकारी होने पर मृतक ने रामकृपाल सिंह के यहां नौकरी छोड़ दी।
इसी बीच 16 जुलाई 2010 को रामकृपाल चमार घर से चित्रकूट जाने की बात कहकर निकला था। अगले दिन शाहपुर गांव के समीप नहर में उसका रक्त रंजिश शव बरामद हुआ था। विवेचना के दौरान पता चला कि जमीन की लालच में रामकृपाल सिंह ने तीन अन्य साथियों के साथ मिल हत्या कर शव नहर में फेंक दिया था।