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इमदाद छोड़िए, सर्वे के लिए नहीं आया कोई
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Thu, 09 Apr 2015 12:32 AM IST
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मंझनपुर। मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलें खेतों में ही पड़ी हैं। उन्हें देखकर किसानों की आंखों से आंसू निकल रहे हैं। दिलासा है कि बर्बाद हुई फसल के एवज में सरकार मुआवजा देगी पर, आर्थिक मदद मिलनी तो दूर बेमौसम बारिश से गिरकर खराब हुई फसलों का सर्वे करने भी कोई नहीं पहुंचा। वहीं किसानों का आरोप है कि सर्वे का सारा काम राजस्वकर्मी कागजों में ही कर रहे हैं।
कृषि विभाग के आंकड़ों को देखें तो जिले में सिर्फ गेहूं की खेती का ही रकबा 66 हजार हेक्टेअर है। अनुमान था कि अबकी जिले में 188 लाख मीट्रिक टन गेहूं की पैदावार होगी। खुद कृषि विभाग के अफसर इस साल प्रति हेक्टेअर 28 क्विंटल की उपज होने की उम्मीद जता रहे थे। पर, मार्च और अप्रैल में बार-बार आसमान से बरसी आफत ने गेहूं की खेती को बर्बाद करके रख दिया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओले गिरने से गेहूं की फसल जमींदोज हो गई है। कच्ची फसल गिरने से गेहूं की बाल में दाने ही नहीं निकल रहे हैं।
या फिर दाने बेहद कमजोर हैं। इससे उपज आधी भी नहीं रह गई है। किसानों की मानें तो बेमौसम की बारिश से जिले में 50-70 फीसदी तक फसलों का नुकसान हुआ है। गंगा की तराई के गांव अंबाई बुजुर्ग के बचोल, हुजरा गांव के शकील अहमद, नेवादा ब्लाक के बसुहार गांव के फूलचंद्र मिश्र, बब्बू तिवारी, कौशाम्बी ब्लाक के परभापर गांव के मोतीलाल विश्वकर्मा आदि की मानें तो एक बीघे में 5-6 क्विंटल भी गेहूं निकलना मुश्किल हो रहा है। परभापर के मोतीलाल ने बताया कि 15 बीघे में बोई गई गेहूं की फसल गिरकर पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
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उनकी मानें तो खेत से बीज, खाद की कीमत निकलना भी मुश्किल है। हालांकि अफसरों का कहना है कि प्रारंभिक जांच के मुताबिक 25-30 फीसदी नुकसान हुआ है। गाटा वार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही मौसम की मार से हुए नुकसान की सच्चाई सामने आएगी। पर, जिले के ज्यादातर किसानों ने बताया कि बर्बाद हुई फसल खेतों में ही पड़ी है। उन्हें देखने और नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने अब तक कोई कर्मचारी खेतों तक आया ही नहीं है।
मार्च और अप्रैल में तेज हवाओं के साथ हुई बेमौसम की बारिश और ओलों की मार से गेहूं, सरसों, चना आदि की फसल गिरकर बर्बाद हुई है। मौसम का मिजाज अब भी डरा रहा है। आसमान में दूसरे-तीसरे दिन काले डरावने बादल डेरा डाल देते हैं। रुक-रुककर बूंदाबांदी भी हो रही है। इससे किसान खेतों में बचीखुची अपनी फसलें समेटने में तेजी दिखा रहे हैं। कटाई के साथ मड़ाई भी जारी है। जब खेतों में बर्बाद हो चुकी फसल किसान समेटकर उसकी मड़ाई कर डालेंगे, तो राजस्वकर्मी कैसे नुकसान का जायजा लेंगे?
जिले के सभी उपजिलाधिकारियों को गाटा वार सर्वे कराने का निर्देश दिया गया है। यदि सर्वे में लापरवाही बरती जा रही है, जो जांच कराकर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रयास है कि सर्वे कराकर बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की रिपोर्ट जल्द शासन को भेज दी जाए। ताकि प्रभावित किसानों को समय से राहत मुहैया हो सके।
राजमणि यादव, डीएम, कौशाम्बी
कौशाम्बी के कड़ा ब्लाक के औरेनी गांव के 70 वर्षीय किसान गुलाब यादव के पास सिर्फ 4 बीघा खेत है। पहले उन्होंने आलू की बुवाई की थी। जोरदार बारिश के बाद खेतों में पानी भरने से 35 हजार का बीज सड़ गया। खेत सूखने पर किसान क्रेडिट कार्ड से 70 हजार ऋण निकालकर गेहूं की बुवाई की। खेतों में लहलहाती फसल देखकर उन्हें लगा था कि आलू की बुवाई में हुए नुकसान की भरपाई होगी। पर, मार्च महीने में हुई बेमौसम की बारिश ने उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। हवाओं के साथ हुई बारिश से गिरी फसल में दाने ही नहीं निकल रहे हैं।
खेत में गिरी फसल देखकर वह हाथ मल रहे हैं। आंखों से न चाहते हुए भी आंसू टपकने लगते हैं। भरे गले से बताते हैं कि अब बैंक का लोन कहां से भरेंगे। जून महीने में बेटी की शादी का खर्च उन्हें अलग से परेशान किए है। औरैनी गांव के गुलाब की तरह की अकरम, अंबाई बुजुर्ग गांव के बचोल, हुजरा गांव के शकील अहमद, बिसारा गांव के केशवलाल, बसुहार के सुभाष मिश्र, फूलचंद्र, गोपाल, भैयालाल, हरिदत्त, बैरागीपुर के भोला सिंह आदि भी बर्बाद फसल देखकर बिलख रहे हैं। अंबाई बुजुर्ग गांव के किसान बचोल ने बताया कि उसने 5 बीघा खेत में गेहूं की खेती के लिए साधन सहकारी समिति से 35 हजार रुपये की खाद और बीज लिया था। पूरी फसल चौपट हो चुकी है। अब वह समिति का ऋण कहां से भरेगा।
सिराथू तहसील के बिसारा गांव निवासी केशवलाल छोटी जोत का किसान है। उसके पास अपना सिर्फ दो बीघा खेत है। पत्नी पुष्पा देवी के अलावा उसके पांच बच्चे ज्योति (18), रवि (17), प्रतिक्षा 13), प्रतिभा (10), राजू (8) हैं। पत्नी-बच्चों समेत 7 लोगों के परिवार के लिए दो जून की रोटी और कपड़े, पढ़ाई आदि का खर्च का इंतजाम सिर्फ खेती है। इसके लिए उसने गांव के ही एक व्यक्ति का 3 बीघा खेत बटाई पर ले रखा है।
बटाई पर लिए गए 2 बीघे में उसने गेहूं और एक बीघे में चना की खेती की थी। खेती के लिए उसने काश्तकार से 32 हजार रुपये भी ले रखे हैं। मौसम की मार से गेहूं, चना की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। बेमौसम बारिश ने जहां उसके बच्चों के निवाले का इंतजाम मुश्किल कर दिया है। वहीं अब उसे काश्तकार का कर्ज भी चुकाना पड़ेगा। सिसकते हुए केशव ने बताया कि अब वह मेहनत मजदूरी करके कर्ज चुकाने की कोशिश करेगा। पर, साथ ही वह और उसकी पत्नी परेशान हैं कि अब आगे की खेती, बच्चों की पढ़ाई और उनके कपड़े, भोजन का इंतजाम कहां से होगा?
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कृषि विभाग के आंकड़ों को देखें तो जिले में सिर्फ गेहूं की खेती का ही रकबा 66 हजार हेक्टेअर है। अनुमान था कि अबकी जिले में 188 लाख मीट्रिक टन गेहूं की पैदावार होगी। खुद कृषि विभाग के अफसर इस साल प्रति हेक्टेअर 28 क्विंटल की उपज होने की उम्मीद जता रहे थे। पर, मार्च और अप्रैल में बार-बार आसमान से बरसी आफत ने गेहूं की खेती को बर्बाद करके रख दिया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओले गिरने से गेहूं की फसल जमींदोज हो गई है। कच्ची फसल गिरने से गेहूं की बाल में दाने ही नहीं निकल रहे हैं।
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या फिर दाने बेहद कमजोर हैं। इससे उपज आधी भी नहीं रह गई है। किसानों की मानें तो बेमौसम की बारिश से जिले में 50-70 फीसदी तक फसलों का नुकसान हुआ है। गंगा की तराई के गांव अंबाई बुजुर्ग के बचोल, हुजरा गांव के शकील अहमद, नेवादा ब्लाक के बसुहार गांव के फूलचंद्र मिश्र, बब्बू तिवारी, कौशाम्बी ब्लाक के परभापर गांव के मोतीलाल विश्वकर्मा आदि की मानें तो एक बीघे में 5-6 क्विंटल भी गेहूं निकलना मुश्किल हो रहा है। परभापर के मोतीलाल ने बताया कि 15 बीघे में बोई गई गेहूं की फसल गिरकर पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
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उनकी मानें तो खेत से बीज, खाद की कीमत निकलना भी मुश्किल है। हालांकि अफसरों का कहना है कि प्रारंभिक जांच के मुताबिक 25-30 फीसदी नुकसान हुआ है। गाटा वार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही मौसम की मार से हुए नुकसान की सच्चाई सामने आएगी। पर, जिले के ज्यादातर किसानों ने बताया कि बर्बाद हुई फसल खेतों में ही पड़ी है। उन्हें देखने और नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने अब तक कोई कर्मचारी खेतों तक आया ही नहीं है।
मार्च और अप्रैल में तेज हवाओं के साथ हुई बेमौसम की बारिश और ओलों की मार से गेहूं, सरसों, चना आदि की फसल गिरकर बर्बाद हुई है। मौसम का मिजाज अब भी डरा रहा है। आसमान में दूसरे-तीसरे दिन काले डरावने बादल डेरा डाल देते हैं। रुक-रुककर बूंदाबांदी भी हो रही है। इससे किसान खेतों में बचीखुची अपनी फसलें समेटने में तेजी दिखा रहे हैं। कटाई के साथ मड़ाई भी जारी है। जब खेतों में बर्बाद हो चुकी फसल किसान समेटकर उसकी मड़ाई कर डालेंगे, तो राजस्वकर्मी कैसे नुकसान का जायजा लेंगे?
जिले के सभी उपजिलाधिकारियों को गाटा वार सर्वे कराने का निर्देश दिया गया है। यदि सर्वे में लापरवाही बरती जा रही है, जो जांच कराकर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रयास है कि सर्वे कराकर बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की रिपोर्ट जल्द शासन को भेज दी जाए। ताकि प्रभावित किसानों को समय से राहत मुहैया हो सके।
राजमणि यादव, डीएम, कौशाम्बी
कौशाम्बी के कड़ा ब्लाक के औरेनी गांव के 70 वर्षीय किसान गुलाब यादव के पास सिर्फ 4 बीघा खेत है। पहले उन्होंने आलू की बुवाई की थी। जोरदार बारिश के बाद खेतों में पानी भरने से 35 हजार का बीज सड़ गया। खेत सूखने पर किसान क्रेडिट कार्ड से 70 हजार ऋण निकालकर गेहूं की बुवाई की। खेतों में लहलहाती फसल देखकर उन्हें लगा था कि आलू की बुवाई में हुए नुकसान की भरपाई होगी। पर, मार्च महीने में हुई बेमौसम की बारिश ने उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। हवाओं के साथ हुई बारिश से गिरी फसल में दाने ही नहीं निकल रहे हैं।
खेत में गिरी फसल देखकर वह हाथ मल रहे हैं। आंखों से न चाहते हुए भी आंसू टपकने लगते हैं। भरे गले से बताते हैं कि अब बैंक का लोन कहां से भरेंगे। जून महीने में बेटी की शादी का खर्च उन्हें अलग से परेशान किए है। औरैनी गांव के गुलाब की तरह की अकरम, अंबाई बुजुर्ग गांव के बचोल, हुजरा गांव के शकील अहमद, बिसारा गांव के केशवलाल, बसुहार के सुभाष मिश्र, फूलचंद्र, गोपाल, भैयालाल, हरिदत्त, बैरागीपुर के भोला सिंह आदि भी बर्बाद फसल देखकर बिलख रहे हैं। अंबाई बुजुर्ग गांव के किसान बचोल ने बताया कि उसने 5 बीघा खेत में गेहूं की खेती के लिए साधन सहकारी समिति से 35 हजार रुपये की खाद और बीज लिया था। पूरी फसल चौपट हो चुकी है। अब वह समिति का ऋण कहां से भरेगा।
सिराथू तहसील के बिसारा गांव निवासी केशवलाल छोटी जोत का किसान है। उसके पास अपना सिर्फ दो बीघा खेत है। पत्नी पुष्पा देवी के अलावा उसके पांच बच्चे ज्योति (18), रवि (17), प्रतिक्षा 13), प्रतिभा (10), राजू (8) हैं। पत्नी-बच्चों समेत 7 लोगों के परिवार के लिए दो जून की रोटी और कपड़े, पढ़ाई आदि का खर्च का इंतजाम सिर्फ खेती है। इसके लिए उसने गांव के ही एक व्यक्ति का 3 बीघा खेत बटाई पर ले रखा है।
बटाई पर लिए गए 2 बीघे में उसने गेहूं और एक बीघे में चना की खेती की थी। खेती के लिए उसने काश्तकार से 32 हजार रुपये भी ले रखे हैं। मौसम की मार से गेहूं, चना की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। बेमौसम बारिश ने जहां उसके बच्चों के निवाले का इंतजाम मुश्किल कर दिया है। वहीं अब उसे काश्तकार का कर्ज भी चुकाना पड़ेगा। सिसकते हुए केशव ने बताया कि अब वह मेहनत मजदूरी करके कर्ज चुकाने की कोशिश करेगा। पर, साथ ही वह और उसकी पत्नी परेशान हैं कि अब आगे की खेती, बच्चों की पढ़ाई और उनके कपड़े, भोजन का इंतजाम कहां से होगा?