{"_id":"5ca11289bdec224b9d4f6c7c","slug":"last-day-of-march-month-opened-the-offices","type":"story","status":"publish","title_hn":"मार्च महीने के अंतिम दिन रविवार होने पर भी खुले रहे ऑफिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मार्च महीने के अंतिम दिन रविवार होने पर भी खुले रहे ऑफिस
Mon, 01 Apr 2019 12:48 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Mon, 01 Apr 2019 12:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंझनपुर (ब्यूरो)। जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष के बाहर एक बीमार साधु घंटो तड़पता रहा। लेकिन किसी डॉक्टर अथवा कर्मचारी ने उसकी सुधि नहीं ली। दोपहर बाद अस्पताल पहुंचे चिकित्सक डॉ. अरविंद कनौजिया के हस्तक्षेप के बाद साधु को भर्ती कर इलाज शुरु किया गया।
जिला अस्पताल में अवकाश के दिन रामराज रहता है। चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी मर्जी के मालिक हो जाते हैं। ऐसे में मरीज मरे या जीए, किसी को फर्क नहीं पड़ता। रविवार की दोपहर भी ऐसा ही हुआ। इमरजेंसी ड्यूटी में रहे चिकित्सक डॉ. अरविंद कनौजिया लंच पर गए थे। इसी बीच कोई एक बीमार साधु को लेकर जिला अस्पताल आया और इमरजेंसी कक्ष के बाहर उसे छोड़कर चला गया। इसके बाद अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ ने उसकी कोई सुधि नहीं ली। इमरजेंसी के पोर्च के नीचे पड़ा साधु कराह रहा था। करीब दो घंटे बाद लोगों की वहां पर भीड़ जुटने लगी तो किसी ने डॉ. अरविंद कनौजिया को खबर दी। मौके पर पहुंचे चिकित्सक ने स्टाफ को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद साधु को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में अवकाश के दिन रामराज रहता है। चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी मर्जी के मालिक हो जाते हैं। ऐसे में मरीज मरे या जीए, किसी को फर्क नहीं पड़ता। रविवार की दोपहर भी ऐसा ही हुआ। इमरजेंसी ड्यूटी में रहे चिकित्सक डॉ. अरविंद कनौजिया लंच पर गए थे। इसी बीच कोई एक बीमार साधु को लेकर जिला अस्पताल आया और इमरजेंसी कक्ष के बाहर उसे छोड़कर चला गया। इसके बाद अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ ने उसकी कोई सुधि नहीं ली। इमरजेंसी के पोर्च के नीचे पड़ा साधु कराह रहा था। करीब दो घंटे बाद लोगों की वहां पर भीड़ जुटने लगी तो किसी ने डॉ. अरविंद कनौजिया को खबर दी। मौके पर पहुंचे चिकित्सक ने स्टाफ को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद साधु को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
विज्ञापन