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डूबते सूर्य की उपासना कर महिलाओं ने की छठ पूजा
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ladies organised the chhatha pooja
- फोटो : KAUSHAMBI
डूबते सूर्य की उपासना कर महिलाओं ने की छठ पूजा
खरना के बाद से 36 घंटे का होता है उपवास
कड़ा। सूर्य देव की उपासना का चार दिवसीय छठपर्व नहाय खाय के साथ शुरू होकर रविवार को उगते सूर्य को अर्ध्य देकर समाप्त होगा। भगवान भास्कर को पहला अर्ध्य शनिवार की शाम डूबते सूर्य को दिया गया। इसे लेकर गंगा के विभिन्न घाटों पर भीड़ जुटी।
छठ पूजा सूर्य और उनकी पत्नी उषा को समर्पित है। इसमें किसी भी तरह की मूर्ति पूजा शामिल नहीं ै। छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व के बारे में कई उल्लेख मिलते हैं। कहा जाता है कि छठ की पहली पूजा सूर्यपुत्र कर्ण ने की थी। वहीं यह भी माना जाता है कि यह व्रत सीता तथा द्रौपदी ने भी रखा था।
शनिवार को बिहार के लोगो ने शक्तिपीठ कड़ाधाम के कुबरीघाट में गंगा स्नान के बाद छठ पूजा मनाई । बिहार के रहने वाले दिनेश व मनोज ने बताया कि वर्तमान में मंझनपुर में रहते हैं। घर नहीं जा पाने के कारण अबकी बार यही छठ पूजा की जा रही है इसी तरह असद पुर घाट पर बिहार के लोगो ने भी धूमधाम से छठ का पर्व मनाया।
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खरना के बाद से 36 घंटे का होता है उपवास
कड़ा। सूर्य देव की उपासना का चार दिवसीय छठपर्व नहाय खाय के साथ शुरू होकर रविवार को उगते सूर्य को अर्ध्य देकर समाप्त होगा। भगवान भास्कर को पहला अर्ध्य शनिवार की शाम डूबते सूर्य को दिया गया। इसे लेकर गंगा के विभिन्न घाटों पर भीड़ जुटी।
छठ पूजा सूर्य और उनकी पत्नी उषा को समर्पित है। इसमें किसी भी तरह की मूर्ति पूजा शामिल नहीं ै। छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व के बारे में कई उल्लेख मिलते हैं। कहा जाता है कि छठ की पहली पूजा सूर्यपुत्र कर्ण ने की थी। वहीं यह भी माना जाता है कि यह व्रत सीता तथा द्रौपदी ने भी रखा था।
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शनिवार को बिहार के लोगो ने शक्तिपीठ कड़ाधाम के कुबरीघाट में गंगा स्नान के बाद छठ पूजा मनाई । बिहार के रहने वाले दिनेश व मनोज ने बताया कि वर्तमान में मंझनपुर में रहते हैं। घर नहीं जा पाने के कारण अबकी बार यही छठ पूजा की जा रही है इसी तरह असद पुर घाट पर बिहार के लोगो ने भी धूमधाम से छठ का पर्व मनाया।
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