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शहजादपुर गंगा कछार में दावानल बनीं लपटें
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sat, 09 May 2015 10:53 PM IST
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गंगा के शहजादपुर कछार का जंगल शनिवार को दिनभर धधकता रहा। संदिग्ध परिस्थितियों में लगी आग देखते ही देखते दावालन बन गईं। लपटों की जद में आने से रघुनाथपुर, शहजादपुर, रामपुर बढ़नावा आदि गांवों के दर्जनभर से ज्यादा किसानों के सरपत, हरे पेड़ जलकर राख हो गए। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं जंगल में आग लगने से लपटों की जद में आने से वनरोजों के साथ ही कई अन्य वन्यजीव भी झुलस गए। दवानल बनी लपटों को बुझाने में 4 घंटे तक सैकड़ों ग्रामीण और दमकलकर्मी जूझते रहे।
सिराथू तहसील क्षेत्र में शहजादपुर से लेकर रामपुर बढ़नावा तक गंगा का कछार हरे-भरे जंगल से भरा है। शनिवार को दिन में करीब 11 बजे अचानक शहजादपुर के गंगा कछार के इसी जंगल में आग लग गई। सूखे हुए सरपत के कारण देखते ही देखते आग की लपटें दावानल बनकर आसमान चूमने लगी। तेज धूप और चल रही हवाओं के कारण आग लपटें बेकाबू होकर शहजादपुर से लेकर रघुनाथपुर, रामपुर बढ़नावा के कछार तक सब कुछ राख करने लगी। सरपत के साथ आम, महुआ, बबूल, चिलबिल, जामुन, गूलर समेत तमाम अन्य बड़े-बड़े पेड़ लपटों की जद में आकर राख होने लगे। कछार के जंगल से उठती आग की भीषण लपटें देख तीनों गांव में हड़कंप मच गया। चीखते-चिल्लाते लोग जंगल की ओर दौड़े। पर चिलचिलाती धूप और भीषण लपटों की तपिश के कारण लोग लपटों से करीब 500 मीटर दूर ही बने रहे। जंगल की आग बस्ती की ओर न पहुंचे।
इससे घबराए ग्रामीणों में फायर स्टेशन सैनी और मंझनपुर को सूचना दी। जंगल में आग लगने की खबर पर मंझनपुर फायर स्टेशन से पहुंचे दमकलकर्मी घंटों आग बुझाने में जूझते रहे। दिन में 11 बजे लगी शाम 4 बजे बुझाई जा सकी है। हालांकि इसके बाद भी पेड़, सरपत सुलगते ही दिख रहे थे। आग से रघुनाथपुर के झग्गा, शहजादपुर गांव के रूपचंद्र, श्रीचंद्र, ज्ञानचंद्र, लालचंद्र आदि को हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। किसानों के मुताबिक आग लगने से लाखों रुपये का सरपत और पेड़ जला है। वहीं लपटों की जद में आने से कई वन्यजीव भी झुलस गए। जंगल में आग कैसे लगी। इसकी जानकारी कोई नहीं दे पा रहा था। माना जा रहा है कि जलती बीड़ी का टुकड़ा आग फेंकने से यह आग भड़की होगी।
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सिराथू तहसील क्षेत्र में शहजादपुर से लेकर रामपुर बढ़नावा तक गंगा का कछार हरे-भरे जंगल से भरा है। शनिवार को दिन में करीब 11 बजे अचानक शहजादपुर के गंगा कछार के इसी जंगल में आग लग गई। सूखे हुए सरपत के कारण देखते ही देखते आग की लपटें दावानल बनकर आसमान चूमने लगी। तेज धूप और चल रही हवाओं के कारण आग लपटें बेकाबू होकर शहजादपुर से लेकर रघुनाथपुर, रामपुर बढ़नावा के कछार तक सब कुछ राख करने लगी। सरपत के साथ आम, महुआ, बबूल, चिलबिल, जामुन, गूलर समेत तमाम अन्य बड़े-बड़े पेड़ लपटों की जद में आकर राख होने लगे। कछार के जंगल से उठती आग की भीषण लपटें देख तीनों गांव में हड़कंप मच गया। चीखते-चिल्लाते लोग जंगल की ओर दौड़े। पर चिलचिलाती धूप और भीषण लपटों की तपिश के कारण लोग लपटों से करीब 500 मीटर दूर ही बने रहे। जंगल की आग बस्ती की ओर न पहुंचे।
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इससे घबराए ग्रामीणों में फायर स्टेशन सैनी और मंझनपुर को सूचना दी। जंगल में आग लगने की खबर पर मंझनपुर फायर स्टेशन से पहुंचे दमकलकर्मी घंटों आग बुझाने में जूझते रहे। दिन में 11 बजे लगी शाम 4 बजे बुझाई जा सकी है। हालांकि इसके बाद भी पेड़, सरपत सुलगते ही दिख रहे थे। आग से रघुनाथपुर के झग्गा, शहजादपुर गांव के रूपचंद्र, श्रीचंद्र, ज्ञानचंद्र, लालचंद्र आदि को हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। किसानों के मुताबिक आग लगने से लाखों रुपये का सरपत और पेड़ जला है। वहीं लपटों की जद में आने से कई वन्यजीव भी झुलस गए। जंगल में आग कैसे लगी। इसकी जानकारी कोई नहीं दे पा रहा था। माना जा रहा है कि जलती बीड़ी का टुकड़ा आग फेंकने से यह आग भड़की होगी।
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