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पीएचसी चरवा: सिर्फ नाम का अस्पताल

Wed, 10 Feb 2016 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे काैश्ााम्बी
अमर उजाला ब्यूराे काैश्ााम्बी Updated Wed, 10 Feb 2016 11:34 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अनदेखी से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चरवा सिर्फ नाम का अस्पताल बन कर रह गया है। लापरवाही का आलम यह है कि डॉक्टर, कर्मी समय से अस्पताल नहीं आते हैं। वहीं सर्दी-जुकाम की दवा के अलावा कैल्शियम, विटामिन्स की टैबलेट्स भी चिकित्सालय में नहीं है। ऐसे में चरवा और आसपास के दर्जनों गांव के बीमारों को इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है।


कौशाम्बी जनपद की सबसे बड़ी ग्रामसभा चरवा है। भरवारी-चायल मार्ग पर स्थित इस ग्रामसभा में सड़क किनारे बाजार भी है। करीब 60 हजार की आबादी वाली इस ग्रामसभा और आसपास के 40 गांव के लोगों को इलाज उपलब्ध कराने को करीब 30 साल पहले यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई थी। पर, आज अस्पताल अव्यवस्था का शिकार हो गया है। अस्पताल में डॉ.वीके मिश्रा, डॉ.पीपी शर्मा, डॉ.चित्रासिंह, डॉ.मधुरिमा यादव की तैनाती है। शिवबाबू, धर्मेश कुमार, रमेश कुमार फार्मासिस्ट हैं। पर, ज्यादातर डॉक्टर और कर्मचारियों का अस्पताल आने और यहां से जाने का समय निश्चित नहीं है।
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डॉक्टरों की ओर से ड्यूटी में बरती जा रही लापरवाही से भी ज्यादा समस्या अस्पताल में दवाओं की किल्लत से है। यहां इस समय सर्दी-जुकाम में मरीजों को दी जाने वाली दवा महीनों से नहीं है। कैल्शियम, विटामिन्स की टैबलेट्स भी नदारद है। डॉ.वीके मिश्रा बताते हैं कि प्रसूताओं और एनीमिक मरीजों को कैल्शियम और विटामिन्स की दवाएं देनी जरूरी हैं। पर, महीनों से अस्पताल में इन्हीं दवाओं का टोटा बना हुआ है। कई बार लिखापढ़ी भी की गई, लेकिन दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।  
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इनसेट
डॉक्टर, दवा नहीं मिलने से हो रहा है मोहभंग
चरवा (ब्यूरो)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चरवा में डॉक्टर और दवाएं नहीं मिलने से धीरे-धीरे लोगों का यहां से मोहभंग हो रहा है। लोग बताते हैं कि ज्यादा नहीं 5 साल पहले तक इस अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की भीड़ लग जाती थी। यहां चरवा के अलावा काजू, समसपुर, कलापत का पुरा, अयोध्या का पुरा, रैया देहमाफी, पिपरी, बबुरा, धनसेड़ा समेत आसपास के 5 किलोमीटर दायरे में स्थित गांव के लोग इलाज के लिए आते थे। अब दिनभर में मुश्किल से 15 से 20 मरीज ही आते हैं। उन्हें भी दवा नहीं मिलने से मायूस होकर ही लौटना पड़ता है। लोग डॉक्टर से दवा लिखाकर बाजार में दुकान से खरीदने को मजबूर हैं।
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जर्जर भवन भी बना हुआ है मुसीबत
चरवा (ब्यूरो)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कक्ष और आवासीय भवन जर्जर हो गया हैं। अस्पताल परिसर में बने डॉक्टर, कर्मियों के आवास इतने जर्जर हो चुके हैं कि यहां रहने में लोग डरते हैं। फार्मासिस्ट रामबाबू ने बताया कि पहले वह अस्पताल में बने क्वार्टर में ही रहता था, लेकिन यहां बिजली, पानी की समस्या के साथ भवन भी खस्ताहाल है। प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है।

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क्या कहते हैं मुख्य चिकित्साधिकारी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चरवा ही नहीं ग्रामीण अंचल में स्थापित सभी सीएचसी, पीएचसी में मांगपत्र के अनुसार दवाएं मुहैया कराई जाती हैं। चरवा अस्पताल में कैल्शियम, विटामिन्स और सर्दी, जुकाम बुखार आदि जिस भी मर्ज की दवा अनुपलब्ध होगी। चिकित्सा प्रभारी से बात करके उसे उपलब्ध कराया जाएगा।
डॉ यूबी सिंह सीएमओ कौशाम्बी
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