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न डॉक्टर, न दवा, भैया ये है सरकारी अस्पताल
अमर उजाला ब्यूराे काैश्ााम्बी
Updated Thu, 04 Feb 2016 11:35 PM IST
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यमुना तराई के 50 गांवों को इलाज मुहैया कराने को सरायअकिल कस्बे में खुला 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अफसरों की अनदेखी और डॉक्टरों की मनमानी की भेंट चढ़ गया है। आलम यह है कि इस अस्पताल में डॉक्टर, दवा कुछ भी बीमारों को नहीं मिलती। बृहस्पतिवार को भी 9 डाक्टरों में महज 3 चिकित्सक ही अस्पताल में उपस्थित थे। अस्पताल में सन्नाटा पसरा दिखा। जबकि कुछ दूर पर स्थित प्राइवेट क्लीनिक में मरीजों की भीड़ दिखी। जिम्मेदारों की लापरवाही से यह हास्पिटल सिर्फ प्रसूति घर बन चुका है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायअकिल में कभी यमुना तराई के करीब 50 गांव के लोग आते थे। मरीजों को भर्ती करने, प्रसव, आपरेशन के अलावा एक्स-रे आदि की व्यवस्था अस्पताल में है। इसके अलावा 24 घंटे इमरजेंसी उपचार की भी सुविधा इस अस्पताल है। इसके लिए सीएचसी सरायअकिल में अस्पताल अधीक्षक डॉ.एसके ठुकराल के अलावा डॉ.आबिद, डॉ.टीबी मौर्य, डॉ.केएन गुप्ता, डॉ.राजेश कुमार, डॉ.ज्ञानसिंह, डॉ.यास्मीन, डॉ.कामना वर्मा, डॉ.अलकमा की तैनाती है। बृहस्पतिवार को दिन में 11.30 बजे इनमें से सिर्फ डॉ.राजेश कुमार, डॉ.ज्ञान सिंह और डॉ.अलकमा ही मौजूद थी। अधीक्षक समेत सभी चिकित्सक गैरहाजिर थे।
वहीं, अस्पताल में सिर्फ दो मरीज मिले। जबकि ओपीडी रिकार्ड में सुबह 8 बजे से 11.30 बजे तक 40 मरीजों का नाम दर्ज था।
इनसेट
दवा के नाम पर सिर्फ पीली, नीली गोलियां
नेवादा (ब्यूरो)। सीएचसी सरायअकिल में डॉक्टरों के साथ ही दवा के लिए भी मरीज और उनके तीमारदारों को भटकना पड़ता है। इस समय मौसम में बदलाव के कारण सर्दी-खांसी, बुखार के साथ ही खुजली और त्वचा की अन्य बीमारियों के रोगी बढ़े हैं। पर, अस्पताल में इन बीमारियों की दवा मरीजों को उपलब्ध नहीं कराई जाती। अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती लोही गांव की आरती सिंह के साथ रहे उसके तीमारदारों ने बताया कि ज्यादातर दवा बाहर से खरीदकर लानी पड़ रही है।
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इनसेट
ग्लब्स भी नहीं, सुरक्षित प्रसव बेमानी
नेवादा (ब्यूरो)। मातृ-शिशु मृत्युदर में कमी लाने को इन दिनों जनपद में मातृत्व सप्ताह मनाया जा रहा है। सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसूताओं को चिह्नित करके हाईरिस्क केस खंगाले जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षित प्रसव की बात सोचनी भी बेमानी है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत का एक बड़ा कारण संक्रमण है। इसके बाद भी सीएचसी सरायअकिल में सुरक्षित प्रसव कराने के लिए ग्लब्स तक उपलब्ध नहीं है। इसे भी तीमारदारों को बाजार से खरीदकर लाना पड़ता है। वहीं, पूरा अस्पताल गंदगी से पटा है। भर्ती कक्ष से लेकर शौचालय तक गंदगी का अंबार लगा है।
इनसेट
क्या कहते हैं मुख्य चिकित्सा अधिकारी
सीएचसी सरायअकिल में यदि ड्यूटी से अक्सर चिकित्सक गैरहाजिर रहते हैं और मरीजों को दवा आदि उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ यूबी सिंह, सीएमओ कौशाम्बी
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायअकिल में कभी यमुना तराई के करीब 50 गांव के लोग आते थे। मरीजों को भर्ती करने, प्रसव, आपरेशन के अलावा एक्स-रे आदि की व्यवस्था अस्पताल में है। इसके अलावा 24 घंटे इमरजेंसी उपचार की भी सुविधा इस अस्पताल है। इसके लिए सीएचसी सरायअकिल में अस्पताल अधीक्षक डॉ.एसके ठुकराल के अलावा डॉ.आबिद, डॉ.टीबी मौर्य, डॉ.केएन गुप्ता, डॉ.राजेश कुमार, डॉ.ज्ञानसिंह, डॉ.यास्मीन, डॉ.कामना वर्मा, डॉ.अलकमा की तैनाती है। बृहस्पतिवार को दिन में 11.30 बजे इनमें से सिर्फ डॉ.राजेश कुमार, डॉ.ज्ञान सिंह और डॉ.अलकमा ही मौजूद थी। अधीक्षक समेत सभी चिकित्सक गैरहाजिर थे।
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वहीं, अस्पताल में सिर्फ दो मरीज मिले। जबकि ओपीडी रिकार्ड में सुबह 8 बजे से 11.30 बजे तक 40 मरीजों का नाम दर्ज था।
इनसेट
दवा के नाम पर सिर्फ पीली, नीली गोलियां
नेवादा (ब्यूरो)। सीएचसी सरायअकिल में डॉक्टरों के साथ ही दवा के लिए भी मरीज और उनके तीमारदारों को भटकना पड़ता है। इस समय मौसम में बदलाव के कारण सर्दी-खांसी, बुखार के साथ ही खुजली और त्वचा की अन्य बीमारियों के रोगी बढ़े हैं। पर, अस्पताल में इन बीमारियों की दवा मरीजों को उपलब्ध नहीं कराई जाती। अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती लोही गांव की आरती सिंह के साथ रहे उसके तीमारदारों ने बताया कि ज्यादातर दवा बाहर से खरीदकर लानी पड़ रही है।
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ग्लब्स भी नहीं, सुरक्षित प्रसव बेमानी
नेवादा (ब्यूरो)। मातृ-शिशु मृत्युदर में कमी लाने को इन दिनों जनपद में मातृत्व सप्ताह मनाया जा रहा है। सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसूताओं को चिह्नित करके हाईरिस्क केस खंगाले जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षित प्रसव की बात सोचनी भी बेमानी है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत का एक बड़ा कारण संक्रमण है। इसके बाद भी सीएचसी सरायअकिल में सुरक्षित प्रसव कराने के लिए ग्लब्स तक उपलब्ध नहीं है। इसे भी तीमारदारों को बाजार से खरीदकर लाना पड़ता है। वहीं, पूरा अस्पताल गंदगी से पटा है। भर्ती कक्ष से लेकर शौचालय तक गंदगी का अंबार लगा है।
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क्या कहते हैं मुख्य चिकित्सा अधिकारी
सीएचसी सरायअकिल में यदि ड्यूटी से अक्सर चिकित्सक गैरहाजिर रहते हैं और मरीजों को दवा आदि उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ यूबी सिंह, सीएमओ कौशाम्बी