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ढिबरी से ही रौशन होती है लक्ष्मनापुर की रातें
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 27 Oct 2015 11:43 PM IST
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यमुना तराई में बसे लक्ष्मनापुर गांव में अब तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में अतिपिछड़े दलित बाहुल्य इस गांव में अब भी रात ढिबरी की रोशनी से ही रौशन होती है। गांववाले बिजली के लिए सांसद, विधायक से लेकर तमाम छुटभैया नेता और अफसरों तक को कई बार प्रार्थनापत्र दे चुके हैं। इसके बाद भी बस्ती में खंभा, तार नहीं लगा। इसका गुस्सा भी गांव के एक-एक व्यक्ति में है।
कौशाम्बी ब्लाक क्षेत्र के 50 से अधिक पुरवे अब भी बिजली से अछूते हैं। इन्हीं में शामिल है यमुना कछार में बसा लक्ष्मनापुर गांव। करीब 100 दलित परिवारों की इस बस्ती में अब तक विद्युतीकरण नहीं कराया जा सका है। ऐसे में मेहनतकश ग्रामीणों की यह बस्ती में रात ढिबरी और लालटेन की रोशनी से ही रौशन होती है। गांव के रहने वाले ज्ञानेंद्र प्रसाद, राम अवतार, रामहित, सुभद्रा देवी, रमेश कुमार, अजय कुमार, संजय कुमार आदि ने बताया कि करीब 10 साल से वे लोग लगातार विद्युतीकरण की मांग करते चले आ रहे हैं। इसके लिए सांसद, क्षेत्रीय विधायक के अलावा सभी दलो के छुटभैया नेताओं तक से गुहार लगाई गई।
डीएम, सीडीओ और बिजली विभाग के एक्सईएन, एसडीओ तक को प्रार्थनापत्र दिया गया। फिर भी उनके गांव में बिजली नहीं पहुंची। लोगों में सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात को लेकर है कि उनके आसपास के पुरवे हजियापुर, नरगी, मुस्तफाबाद आदि ने कई साल पहले खंभे, तार लगाकर जगमग कर दिया गया। पर, उनके गांव की ओर किसी भी अधिकारी, नेता ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही उनके गांव में विद्युतीकरण नहीं कराया गया, तो वे इस बार विधायकी के चुनाव में वोट डालने का बहिष्कार करेंगे। मामले में मंझनपुर विधायक इंद्रजीत सरोज का कहना है कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के क्षेत्र के गांवों में विद्युतीकरण के लिए विधायक निधि से लगातार धन उपलब्ध कराते रहे हैं। पर, मौजूद सरकार में विकास काम ठप है। अफसर मनमानी पर उतारू हैं। बिजली से अछूते पुरवों में खंभे-तार नहीं लगाने में लापरवाही बरती जा रही है। जिसका खामियाजा गांववालों को भुगतना पड़ रहा है।
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कौशाम्बी ब्लाक क्षेत्र के 50 से अधिक पुरवे अब भी बिजली से अछूते हैं। इन्हीं में शामिल है यमुना कछार में बसा लक्ष्मनापुर गांव। करीब 100 दलित परिवारों की इस बस्ती में अब तक विद्युतीकरण नहीं कराया जा सका है। ऐसे में मेहनतकश ग्रामीणों की यह बस्ती में रात ढिबरी और लालटेन की रोशनी से ही रौशन होती है। गांव के रहने वाले ज्ञानेंद्र प्रसाद, राम अवतार, रामहित, सुभद्रा देवी, रमेश कुमार, अजय कुमार, संजय कुमार आदि ने बताया कि करीब 10 साल से वे लोग लगातार विद्युतीकरण की मांग करते चले आ रहे हैं। इसके लिए सांसद, क्षेत्रीय विधायक के अलावा सभी दलो के छुटभैया नेताओं तक से गुहार लगाई गई।
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डीएम, सीडीओ और बिजली विभाग के एक्सईएन, एसडीओ तक को प्रार्थनापत्र दिया गया। फिर भी उनके गांव में बिजली नहीं पहुंची। लोगों में सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात को लेकर है कि उनके आसपास के पुरवे हजियापुर, नरगी, मुस्तफाबाद आदि ने कई साल पहले खंभे, तार लगाकर जगमग कर दिया गया। पर, उनके गांव की ओर किसी भी अधिकारी, नेता ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही उनके गांव में विद्युतीकरण नहीं कराया गया, तो वे इस बार विधायकी के चुनाव में वोट डालने का बहिष्कार करेंगे। मामले में मंझनपुर विधायक इंद्रजीत सरोज का कहना है कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के क्षेत्र के गांवों में विद्युतीकरण के लिए विधायक निधि से लगातार धन उपलब्ध कराते रहे हैं। पर, मौजूद सरकार में विकास काम ठप है। अफसर मनमानी पर उतारू हैं। बिजली से अछूते पुरवों में खंभे-तार नहीं लगाने में लापरवाही बरती जा रही है। जिसका खामियाजा गांववालों को भुगतना पड़ रहा है।
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