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कौशाम्बी की आधी आबादी अब भी अनपढ़
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sun, 08 Feb 2015 10:56 PM IST
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मंझनपुर। इलाहाबाद से पश्चिमी छोर पर बसा कौशाम्बी आर्थिक, शैक्षिक समेत सभी स्तरों पर अति पिछड़ा था। इसका यही पिछड़ापन दूर करने के लिए चार अप्रैल 1997 को इसे जिला का दर्जा दिया गया। जिला बने 18 साल हो चुके हैं। फिर भी कौशाम्बी की बदहाली दूर नहीं हो पा रही है। अब भी देखें तो यहां की आधी आबादी अशिक्षित ही बनी है। जबकि जिले में एक हजार से अधिक प्राथमिक स्कूल, 400 से अधिक इंटर कालेज और 50 से अधिक डिग्री कालेज खुले हैं।
जनगणना 2011 के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं, तो कौशाम्बी की कुल आबादी 1596904 है। इसमें 838090 परुष और 758814 महिलाएं हैं। इनमें सात वर्ष से ऊपर के सिर्फ 8 लाख 49 हजार 280 लोग ही शिक्षित हैं। यानि जिला बनने के डेढ़ दशक बाद भी जिले के 7 लाख 49 हजार 629 लोग निरक्षर हैं। जबकि कौशाम्बी जिले में 929 प्राथमिक स्कूल, 471 पूर्व माध्यमिक स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में करीब 3500 शिक्षक-शिक्षिकाएं तैनात हैं। इसके अलावा 400 से अधिक इंटर कालेज और 50 से अधिक डिग्री कालेज भी जिले में खोले गए हैं।
अब भी देखें तो सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पंजीकरण की 50 फीसदी भी नहीं रहती है। इसी तरह से तमाम इंटर और डिग्री कालेज तो सिर्फ नाम और कमाई के लिए खोले गए हैं। जिले मेें ऐसे ही स्कूल हैं, जो सिर्फ बोर्ड परीक्षा के दौरान ही खुले दिखते हैं। वहीं जिले में शिक्षा के प्रति जागरूकता का भी अभाव है। सर्वशिक्षा अभियान के दौरान जागरूकता रैली की भी जिले में सिर्फ खानापूर्ति ही नजर आती है। यही कारण है कि अब भी कौशाम्बी के गांवों में तमाम बच्चे स्कूल जाने के बजाय घरेलू कामकाज में लगे रहते हैं। वहीं जिले में बालश्रमिकों की भी संख्या कम नहीं है। जो स्कूल जाने के बजाय ढाबे, होटल, ईंट भट्ठे, मोटर गैराज आदि में काम करते दिखते हैं।
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एक-एक बच्चा अनिवार्यरूप से स्कूल जाए। इसके लिए सरकार की ओर से सर्वशिक्षा अभियान चलाया गया है। साथ ही बच्चों को माध्याह्न भोजन, मुफ्त में पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस, छात्रवृत्ति की योजनाएं भी संचालित हैं। इतना कुछ करने के बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति संतोषजनक नहीं रहती है। प्रतिवर्ष पंजीकरण के बाद जहां हजारों छात्र-छात्राएं बीच में स्कूल छोड़ देते हैं। इस ओर बेसिक शिक्षा विभाग और जिले के उच्चाधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
कौशाम्बी में 14 साल से ऊपर के निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए भारत साक्षर योजना भी लागू की गई है। दो साल से लागू इस योजना के तहत जिले की सभी 440 ग्रामसभाओं में लोक शिक्षा केंद्र खोले जाने का निर्देश था। साथ ही इन केंद्रों पर निरक्षरों को पढ़ाने के लिए दो-दो युवक-युवतियों की तैनाती की गई है। साथ ही इनकी मानीटरिंग के लिए ब्लाक और जिला समन्वयक भी नियुक्ति किए गए हैं। पर, जिले में खोले गए ये लोक शिक्षा केंद्र सिर्फ दिखावे के साबित हो रहे हैं। केंद्रों में नियुक्त किए गए युवक-युवतियों का आरोप है कि उन्हें तैनाती के बाद से जहां अब तक मानदेय नहीं दिया गया है। वहीं उन्हें केंद्र संचालन के सामान भी उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं।
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जनगणना 2011 के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं, तो कौशाम्बी की कुल आबादी 1596904 है। इसमें 838090 परुष और 758814 महिलाएं हैं। इनमें सात वर्ष से ऊपर के सिर्फ 8 लाख 49 हजार 280 लोग ही शिक्षित हैं। यानि जिला बनने के डेढ़ दशक बाद भी जिले के 7 लाख 49 हजार 629 लोग निरक्षर हैं। जबकि कौशाम्बी जिले में 929 प्राथमिक स्कूल, 471 पूर्व माध्यमिक स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में करीब 3500 शिक्षक-शिक्षिकाएं तैनात हैं। इसके अलावा 400 से अधिक इंटर कालेज और 50 से अधिक डिग्री कालेज भी जिले में खोले गए हैं।
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अब भी देखें तो सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पंजीकरण की 50 फीसदी भी नहीं रहती है। इसी तरह से तमाम इंटर और डिग्री कालेज तो सिर्फ नाम और कमाई के लिए खोले गए हैं। जिले मेें ऐसे ही स्कूल हैं, जो सिर्फ बोर्ड परीक्षा के दौरान ही खुले दिखते हैं। वहीं जिले में शिक्षा के प्रति जागरूकता का भी अभाव है। सर्वशिक्षा अभियान के दौरान जागरूकता रैली की भी जिले में सिर्फ खानापूर्ति ही नजर आती है। यही कारण है कि अब भी कौशाम्बी के गांवों में तमाम बच्चे स्कूल जाने के बजाय घरेलू कामकाज में लगे रहते हैं। वहीं जिले में बालश्रमिकों की भी संख्या कम नहीं है। जो स्कूल जाने के बजाय ढाबे, होटल, ईंट भट्ठे, मोटर गैराज आदि में काम करते दिखते हैं।
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एक-एक बच्चा अनिवार्यरूप से स्कूल जाए। इसके लिए सरकार की ओर से सर्वशिक्षा अभियान चलाया गया है। साथ ही बच्चों को माध्याह्न भोजन, मुफ्त में पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस, छात्रवृत्ति की योजनाएं भी संचालित हैं। इतना कुछ करने के बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति संतोषजनक नहीं रहती है। प्रतिवर्ष पंजीकरण के बाद जहां हजारों छात्र-छात्राएं बीच में स्कूल छोड़ देते हैं। इस ओर बेसिक शिक्षा विभाग और जिले के उच्चाधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
कौशाम्बी में 14 साल से ऊपर के निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए भारत साक्षर योजना भी लागू की गई है। दो साल से लागू इस योजना के तहत जिले की सभी 440 ग्रामसभाओं में लोक शिक्षा केंद्र खोले जाने का निर्देश था। साथ ही इन केंद्रों पर निरक्षरों को पढ़ाने के लिए दो-दो युवक-युवतियों की तैनाती की गई है। साथ ही इनकी मानीटरिंग के लिए ब्लाक और जिला समन्वयक भी नियुक्ति किए गए हैं। पर, जिले में खोले गए ये लोक शिक्षा केंद्र सिर्फ दिखावे के साबित हो रहे हैं। केंद्रों में नियुक्त किए गए युवक-युवतियों का आरोप है कि उन्हें तैनाती के बाद से जहां अब तक मानदेय नहीं दिया गया है। वहीं उन्हें केंद्र संचालन के सामान भी उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं।