कौशाम्बी : अमृत सरोवर की खोदाई के दौरान मिली प्राचीन दीवार, पुरातत्व विभाग के पास पहुंचा मामला
जैतपुर पूरे हजारी गांव में रविवार को रोजगार सेवक कौशल कुमार नीलम श्रमिकों को लेकर अमृत सरोवर तालाब की खोदाई करवा रहे थे। खोदाई के दौरान ही जमीन की सतह से करीब 15 फिट नीचे श्रमिकों को ईंट की मोटी व चौड़ी दीवार दिखाई दी।
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चायल तहसील के जैतपुर पूरे हजारी गांव में रविवार को अमृत सरोवर तालाब की खोदाई के दौरान जमीन की सतह से करीब 15 फिट नीचे प्राचीन ईंट की दीवार मिली है। खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई।
जैतपुर पूरे हजारी गांव में रविवार को रोजगार सेवक कौशल कुमार नीलम श्रमिकों को लेकर अमृत सरोवर तालाब की खोदाई करवा रहे थे। खोदाई के दौरान ही जमीन की सतह से करीब 15 फिट नीचे श्रमिकों को ईंट की मोटी व चौड़ी दीवार दिखाई दी। तालाब में पुरानी दीवार मिलने की सूचना फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित होने लगी। फिलहाल करीब 14 फिट दीवार श्रमिकों की खोदाई से खुल गई है और आगे दीवार की कितनी लंबाई चौड़ाई है इसकी जानकारी खोदाई के बाद ही मिल सकेगी।
रोजगार सेवक ने तुरंत इसकी जानकारी बीडीओ नेवादा ब्रजेश नारायण त्रिपाठी व ग्राम प्रधान के पति रामबाबू को दी। सूचना के बाद चौकी इंचार्ज तिल्हापुर अवधराज यादव भी मौके पर पहुंच गए। मामले की जानकारी उन्होंने एसडीएम चायल मनीष कुमार यादव को दी। तहसीलदार चायल दीपिका सिंह ने बताया कि तालाब खोदाई के दौरान प्राचीन ईंट की दीवार मिलने की जानकारी मिली है। मामले से पुरातत्व विभाग को अवगत करा दिया गया है।
दीवार पर बगैर मार्का की चौड़ी चौड़ी लगी हैं ईंटे
रोजगार सेवक व श्रमिकों ने जब खुली दीवार की स्केल लेकर नापजोख की तो दीवार में 10 से लेकर 17 इंच तक लंबी और 9 इंच से लेकर 11 इंच तक चौड़ी ईंटों की जोड़ाई की गई है। ईंटों पर किसी प्रकार का कोई मार्का चिन्ह भी नहीं है। गांव के कुछ बुजुर्गों व सेवानिवृत्त शिक्षक सूरजदीन ने बताया कि 70 साल पहले इस जगह पर तालाब ही था। तालाब कच्चा या पक्का था यह याद नहीं है।