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ग्राम सभा की भूमि पर कालेजों का कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 24 Apr 2017 01:43 AM IST
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कौशाम्बी
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ग्राम सभा की भूमि पर सबसे ज्यादा कब्जा स्कूलों व कालेजों का है। इनके कब्जे में लगभग 1100 बीघे जमीन है। अधिकांश भूमि फर्जी इंद्राज के जरिए कब्जा की गई है। कुलभाष्कर आश्रम डिग्री कालेज का 450 बीघा भूमि पर कब्जा था जबकि छह अन्य कालेजों ने इसी तरह ट्रस्ट के नाम पर सरकारी भूमि अपने नाम करा ली थी। वर्ष 2011 में इनके खिलाफ कार्रवाई का चाबुक चला था लेकिन भूमि खाली होने से पहले ही पूरा मामला टांय-टांय फिस्स हो गया।
कालेजोें के नाम पर जमीन कब्जाने का खेल बहुत पुराना है। ग्राम सभा की भूमि अपने नाम कराने के लिए नियम-कानून से अलग जाकर सारे हथकंडे अपनाए। सबसे ज्यादा भूमि कुलभाष्कर आश्रम डिग्री कालेज (इलाहाबाद) के नाम थी। इस डिग्री कालेज के नाम चायल तहसील क्षेत्र के उजिहिनी में 450 बीघा भूमि थी। इसी तरह आदर्श इंटर कालेज सरायअकिल के नाम बसुहार में 65 बीघा भूमि दर्ज थी। ओसा इंटर कालेज के नाम 60 बीघा भूमि दर्ज है। इसी तरह जवाहर लाल नेहरू कालेज सरसवां के नाम मंझनपुर तहसील के बरैसा, कटरी, टेवा, सरसवां में लगभग सवा सौ बीघा भूमि दर्ज थी। बाकरगंज इंटर कालेज के भी बड़े पैमाने पर भूमि दर्ज है। यह सभी भूमि ग्राम सभा की हैं। वर्ष 2011 में तत्कालीन डीएम लोकेश एम के समय इसका पर्दाफाश हुआ तो उन्होंने फर्जी इंद्राज निरस्त कर दिया था। कुलभाष्कर आश्रम डिग्री कालेज के कब्जे वाली जमीन पर पट्टा भी करवा दिया था मगर यह भूमि अभी तक मुक्त नहीं हो सकी है। यही हाल अन्य कालेजों का है। हजारों बीघे भूमि पर कब्जा है। इनके अलावा कई अन्य इंटर कालेज हैं जो सरकारी भूमि पर चल रहे हैं। खाली कराने के तमाम प्रयास किए गए लेकिन अधिकारियों के तबादला होते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया। तत्कालीन डीएम लोकेश एम के जाने के बाद अतुल गुप्ता ने भी शिकंजा कस रखा था। मगर जमीन कब्जे से मुक्त नहीं हो सकी।
जमीन की जरूरत पड़ी तो प्रशासन ने टेढ़ी की निगाह
मंझनपुर (ब्यूरो)। विकास कार्य, सरकारी कार्यालय व प्रतिष्ठान आदि के लिए जमीन की आवश्यकता है। प्रशासन को जमीन मिल नहीं रही है। तहसील प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर रखे हैं। भूमि का टोटा होने पर प्रशासन की निगाह अब ग्राम सभा व सरकारी भूमि पर हुए कब्जों पर टेढ़ी हो गई। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर कितनी भूमि पर कब्जा है और किस-किस के कब्जे में है। किन परिस्थितियों में भूमि पर कब्जा हुआ है, इसका पूरा लेखा-जोखा खंगाला जा रहा है।
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कालेजोें के नाम पर जमीन कब्जाने का खेल बहुत पुराना है। ग्राम सभा की भूमि अपने नाम कराने के लिए नियम-कानून से अलग जाकर सारे हथकंडे अपनाए। सबसे ज्यादा भूमि कुलभाष्कर आश्रम डिग्री कालेज (इलाहाबाद) के नाम थी। इस डिग्री कालेज के नाम चायल तहसील क्षेत्र के उजिहिनी में 450 बीघा भूमि थी। इसी तरह आदर्श इंटर कालेज सरायअकिल के नाम बसुहार में 65 बीघा भूमि दर्ज थी। ओसा इंटर कालेज के नाम 60 बीघा भूमि दर्ज है। इसी तरह जवाहर लाल नेहरू कालेज सरसवां के नाम मंझनपुर तहसील के बरैसा, कटरी, टेवा, सरसवां में लगभग सवा सौ बीघा भूमि दर्ज थी। बाकरगंज इंटर कालेज के भी बड़े पैमाने पर भूमि दर्ज है। यह सभी भूमि ग्राम सभा की हैं। वर्ष 2011 में तत्कालीन डीएम लोकेश एम के समय इसका पर्दाफाश हुआ तो उन्होंने फर्जी इंद्राज निरस्त कर दिया था। कुलभाष्कर आश्रम डिग्री कालेज के कब्जे वाली जमीन पर पट्टा भी करवा दिया था मगर यह भूमि अभी तक मुक्त नहीं हो सकी है। यही हाल अन्य कालेजों का है। हजारों बीघे भूमि पर कब्जा है। इनके अलावा कई अन्य इंटर कालेज हैं जो सरकारी भूमि पर चल रहे हैं। खाली कराने के तमाम प्रयास किए गए लेकिन अधिकारियों के तबादला होते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया। तत्कालीन डीएम लोकेश एम के जाने के बाद अतुल गुप्ता ने भी शिकंजा कस रखा था। मगर जमीन कब्जे से मुक्त नहीं हो सकी।
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जमीन की जरूरत पड़ी तो प्रशासन ने टेढ़ी की निगाह
मंझनपुर (ब्यूरो)। विकास कार्य, सरकारी कार्यालय व प्रतिष्ठान आदि के लिए जमीन की आवश्यकता है। प्रशासन को जमीन मिल नहीं रही है। तहसील प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर रखे हैं। भूमि का टोटा होने पर प्रशासन की निगाह अब ग्राम सभा व सरकारी भूमि पर हुए कब्जों पर टेढ़ी हो गई। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर कितनी भूमि पर कब्जा है और किस-किस के कब्जे में है। किन परिस्थितियों में भूमि पर कब्जा हुआ है, इसका पूरा लेखा-जोखा खंगाला जा रहा है।
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