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बिल संशोधन के नाम पर लूट
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sat, 08 Apr 2017 12:32 AM IST
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बिजली विभाग के खिलाफ हो रही शिकायतों से खफा सीडीओ ने शुक्रवार को डिवीजन दफ्तर का निरीक्षण किया तो खामियां ही खामियां मिलीं। विभाग के कर्मचारी उपभोक्ताओं को जेब पर डकैती डाल रहे थे। संशोधित बिल के नाम पर प्रताड़ित करने के अलावा उनको लूटा जा रहा था। घरेलू कनेक्शन हो या कामार्शियल। सभी बिलों को संशोधित करने का खेल जोरों पर चल रहा था, वह भी हवाहवाई। रजिस्टर प्रमाणित नहीं मिले, न ही उनकी पेजिंग की गई थी। ट्रांसफार्मर बदलवाने में भी मनमानी की जा रही थी।
सीडीओ ने शुक्रवार की दोपहर बिजली विभाग का निरीक्षण किया। निरीक्षण में एक्सईएन प्रभाकर पांडेय समेत सात कर्मचारी गैरहाजिर मिले। इसके बाद उन्होंने जांच के लिए बिल संशोधित का रजिस्टर मांगा। जांच की गई तो पता चला कि रजिस्टर प्रमाणित नहीं है, न ही उसकी पेजिंग की गई थी। अक्टूबर 2016 में 15, नवंबर में 25, दिसंबर में 25 बिल संशोधित किए गए थे। जनवरी, फरवरी और मार्च में एक भी बिल संशोधित नहीं किया गया था। इसी तरह नलकूप के कनेक्शन में अगस्त 2016 में 42, सितंबर में 47, अक्टूबर जीरो, नवंबर में 33 और दिसंबर में दो और एक जनवरी 2017 को 12 बिल संशोधित किए गए थे। सीडीओ ने कर्मचारी से पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में बिल क्यों संशोधित हो रहे हैं। क्या गलत बिल भेजा जा रहा है, इस पर कर्मचारी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद शिकायत रजिस्टर देख। 27 फरवरी से से अब तक 678 शिकायतें दर्ज हुई, लेकिन एक भी निस्तारण नहीं हुआ। सिटीजन चार्टर नहीं बना था। ट्रांसफार्मर समय पर नहीं बदले जा रहे थे। मौके पर मौजूद टीकरडीह गांव के आशीष मौर्य ने सीडीओ को बताया कि उनके गांव का ट्रांसफार्मर 11 मार्च से फूंका है, लेकिन नहीं बदला गया।
गुवारा तैयबपुर के शमशेर खां, हरदुआ, पुरखास के भी लोगों ने यही शिकायत की। इस पर एसडीओ श्रवण कुमार, एसडीओ इंद्रभान सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया। जांच के दौरान ही चरवा के रईद अहमद ने बताया कि उसका विद्युत कनेक्शन नंबर 17866 है। 12 नवंबर 2016 का उसने 7875 रुपया बिल जमा किया। इसके बाद 31 दिसंबर को दोबारा 13 हजार 237 रुपया बिल आ गया। इसे दुरुस्त कराने के लिए रुपये की मांग हो रही है। यही शिकायत सरजू प्रसाद निवासी रूपनारायणपुर गोरियों ने की। कार्यालय में जगह-जगह गंदगी भी मिली। इस पर सीडीओ ने लिपिक पवन कुमार को फटकारा भी। सीडीओ की जांच में यह साफ हो गया कि विद्युत बिल संशोधन के नाम पर खेल हो रहा है। सीडीओ ने शासन को रिपोर्ट भेजने की चेतावनी कर्मचारियों को दी है।
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सीडीओ ने शुक्रवार की दोपहर बिजली विभाग का निरीक्षण किया। निरीक्षण में एक्सईएन प्रभाकर पांडेय समेत सात कर्मचारी गैरहाजिर मिले। इसके बाद उन्होंने जांच के लिए बिल संशोधित का रजिस्टर मांगा। जांच की गई तो पता चला कि रजिस्टर प्रमाणित नहीं है, न ही उसकी पेजिंग की गई थी। अक्टूबर 2016 में 15, नवंबर में 25, दिसंबर में 25 बिल संशोधित किए गए थे। जनवरी, फरवरी और मार्च में एक भी बिल संशोधित नहीं किया गया था। इसी तरह नलकूप के कनेक्शन में अगस्त 2016 में 42, सितंबर में 47, अक्टूबर जीरो, नवंबर में 33 और दिसंबर में दो और एक जनवरी 2017 को 12 बिल संशोधित किए गए थे। सीडीओ ने कर्मचारी से पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में बिल क्यों संशोधित हो रहे हैं। क्या गलत बिल भेजा जा रहा है, इस पर कर्मचारी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद शिकायत रजिस्टर देख। 27 फरवरी से से अब तक 678 शिकायतें दर्ज हुई, लेकिन एक भी निस्तारण नहीं हुआ। सिटीजन चार्टर नहीं बना था। ट्रांसफार्मर समय पर नहीं बदले जा रहे थे। मौके पर मौजूद टीकरडीह गांव के आशीष मौर्य ने सीडीओ को बताया कि उनके गांव का ट्रांसफार्मर 11 मार्च से फूंका है, लेकिन नहीं बदला गया।
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गुवारा तैयबपुर के शमशेर खां, हरदुआ, पुरखास के भी लोगों ने यही शिकायत की। इस पर एसडीओ श्रवण कुमार, एसडीओ इंद्रभान सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया। जांच के दौरान ही चरवा के रईद अहमद ने बताया कि उसका विद्युत कनेक्शन नंबर 17866 है। 12 नवंबर 2016 का उसने 7875 रुपया बिल जमा किया। इसके बाद 31 दिसंबर को दोबारा 13 हजार 237 रुपया बिल आ गया। इसे दुरुस्त कराने के लिए रुपये की मांग हो रही है। यही शिकायत सरजू प्रसाद निवासी रूपनारायणपुर गोरियों ने की। कार्यालय में जगह-जगह गंदगी भी मिली। इस पर सीडीओ ने लिपिक पवन कुमार को फटकारा भी। सीडीओ की जांच में यह साफ हो गया कि विद्युत बिल संशोधन के नाम पर खेल हो रहा है। सीडीओ ने शासन को रिपोर्ट भेजने की चेतावनी कर्मचारियों को दी है।
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