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जीते कौशाम्बी से, छाए देश व प्रदेश में
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 15 Jan 2017 12:42 AM IST
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कौशाम्बी की माटी राजनीति करने वालों को खूब भाई। विधायक बने तो देश व प्रदेश की वह पहचान भी बने। यहां से विधानसभा पहुंचने वाले नेताओं को एक नया मुकाम भी हासिल हुआ। हेमवती नंदन बहुुगुणा यहां से विधायक बने थे, बाद में वह मुख्यमंत्री भी बने। धर्मवीर केेंद्र सरकार में मंत्री थे। केशव प्रसाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हैं। इंद्रजीत सरोज कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, अब वह बसपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। यहीं से चुनाव जीते सांसद विनोद सोनकर अब भाजपा में अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इनके अलावा और भी तमाम लोग हैं जो प्रदेश की राजनीति में चमके।
राजनीति करने वालों को कौशाम्बी बहुत रास आया। इस माटी की चमक ही ऐसी थी कि जिसको विधायक बनने का मौका मिला तो वह प्रदेश में छा गया। हेमवती नंदन बहुगुणा दो बार यहां से विधायक चुने गए। इसके बाद वह मुख्यमंत्री भी बने। उनके साथ दोआबा का नाम हमेशा चर्चा में रहा। हालांकि तब यह उपलब्धि इलाहाबाद के हिस्से में रहती थी, क्योंकि कौशाम्बी जिला नहीं था। इसके बाद भी दोआबा की शोहरत फीकी नहीं पड़ी। 1996 में इंद्रजीत सरोज विधायक बने।
गठबंधन की सरकार बनी तो इंद्रजीत सरोज कैबिनेट मंत्री बनाए गए। इसके बाद बसपा की जब-जब सरकार बनी इंद्रजीत सरोज कैबिनेट मंत्री रहे, वह भी महत्वपूर्ण विभागों के। अब इंद्रजीत सरोज बसपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। इंद्रजीत से पहले आरके चौधरी भी यहीं से चुनाव जीते थे और बसपा सरकार में मंत्री बनाए गए थे। इसके बाद मतेश सोनकर पाला बदलकर सपा में गए तो उन्हें मंत्री बनाया गया। बीज विकास निगम के वह अध्यक्ष थे। मतेश के इस कदम की चर्चा पूरे प्रदेश में रही। वही इकलौते ऐसे विधायक थे, जिनके पाला बदलने से बसपा की सरकार धड़ाम हुई थी। 2012 में केशव प्रसाद मौर्य भाजपा से सिराथू सीट से विधायक चुने गए। केशव प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सितारा यहीं से चमका। वह फूलपुर से सांसद बने। इसके बाद भाजपा में उनका अचानक कद बढ़ा और वह प्रदेश अध्यक्ष हो गए। इसके बाद सांसद विनोद सोनकर भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुए। अब वह पूरे देश में भाजपा के लिए प्रचार प्रसार कर रहे हैं।
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राजनीति करने वालों को कौशाम्बी बहुत रास आया। इस माटी की चमक ही ऐसी थी कि जिसको विधायक बनने का मौका मिला तो वह प्रदेश में छा गया। हेमवती नंदन बहुगुणा दो बार यहां से विधायक चुने गए। इसके बाद वह मुख्यमंत्री भी बने। उनके साथ दोआबा का नाम हमेशा चर्चा में रहा। हालांकि तब यह उपलब्धि इलाहाबाद के हिस्से में रहती थी, क्योंकि कौशाम्बी जिला नहीं था। इसके बाद भी दोआबा की शोहरत फीकी नहीं पड़ी। 1996 में इंद्रजीत सरोज विधायक बने।
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गठबंधन की सरकार बनी तो इंद्रजीत सरोज कैबिनेट मंत्री बनाए गए। इसके बाद बसपा की जब-जब सरकार बनी इंद्रजीत सरोज कैबिनेट मंत्री रहे, वह भी महत्वपूर्ण विभागों के। अब इंद्रजीत सरोज बसपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। इंद्रजीत से पहले आरके चौधरी भी यहीं से चुनाव जीते थे और बसपा सरकार में मंत्री बनाए गए थे। इसके बाद मतेश सोनकर पाला बदलकर सपा में गए तो उन्हें मंत्री बनाया गया। बीज विकास निगम के वह अध्यक्ष थे। मतेश के इस कदम की चर्चा पूरे प्रदेश में रही। वही इकलौते ऐसे विधायक थे, जिनके पाला बदलने से बसपा की सरकार धड़ाम हुई थी। 2012 में केशव प्रसाद मौर्य भाजपा से सिराथू सीट से विधायक चुने गए। केशव प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सितारा यहीं से चमका। वह फूलपुर से सांसद बने। इसके बाद भाजपा में उनका अचानक कद बढ़ा और वह प्रदेश अध्यक्ष हो गए। इसके बाद सांसद विनोद सोनकर भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुए। अब वह पूरे देश में भाजपा के लिए प्रचार प्रसार कर रहे हैं।
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