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Kaushambi News: कड़ा धाम में वक्फ की 96 बीघा जमीन ग्राम समाज के नाम हुई दर्ज
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कड़ा। कड़ा धाम में वक्फ की लगभग 96 बीघा जमीन ग्राम समाज के नाम दर्ज हो गई। एडीएम (न्यायिक) ने यह आदेश दो दिसंबर को जारी किया था। उच्च न्यायालय ने उन्हें प्रकरण के निस्तारण का आदेश दिया था। शुक्रवार को डीएम ने अधिशासी अधिकारी दारानगर कड़ाधाम को जमीन की निगरानी का दायित्व सौंप दिया।
कड़ा धाम में 96 बीघा (63 गाटा) भूमि वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज थी। कड़ा निवासी सैयद नियाज अशरफ अली ने वक्फ संपत्ति को यह कहते हुए दावा किया था कि उसे अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासन काल में ख्वाजा कड़क शाह के नाम से माफीनामा दिया था। उन्होंने वर्ष 1945 में दीवानी अदालत में मुकदमा दर्ज किया था। अदालत से मांग की थी कि उसे वक्फ संपत्ति घोषित किया जाए, लेकिन दीवानी अदालत ने उसे वक्फ संपत्ति नहीं माना। वर्ष 1952 में जब जमीनदारी व्यवस्था समाप्त हुई, तब यह जमीन ग्राम समाज के नाम दर्ज थी। सैय्यद नियाज ने 1974 में फिर दीवानी अदालत में मुकदमा दर्ज किया। इस बार भी अदालत ने भूमि को वक्फ संपत्ति नहीं माना।
उधर गांव में जब चकबंदी शुरू हुई तो चकबंदी अधिकारी के यहां इसी बात का फिर मुकदमा दाखिल किया गया। चकबंदी अधिकारी ने 14 मई 1979 को भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया। इस बीच कई बार चकबंदी अधिकारी व हाईकोर्ट में भी मुकदमा चला। मुकदमा ग्राम सभा लड़ती रही। अंत में हाईकोर्ट ने एडीएम (न्यायिक) डा. विश्राम को पूरे मामले की सुनवाई करते हुए निर्णय का आदेश दिया। एडीएम (न्यायिक) ने सुनवाई में वक्फ संपत्ति संबंधी अभिलेख गलत पाए। साथ ही अपने पक्ष में कोई साक्ष्य दाखिल नहीं कर पाए। वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता शिवमूर्ति द्विवेदी ने सारे अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर अपने मामले को साबित किया। लिहाजा दो दिसंबर को एडीएम (न्यायिक) ने फैसला सुनाते हुए भूमि को ग्राम सभा में दर्ज करने का आदेश दिया।
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एडीएम (न्यायिक) ने भूमि को सरकारी खाते में दर्ज कराते हुए हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है। यह भूमि नगर पंचायत क्षेत्र में है। हाईकोर्ट की तरफ से पूरी तरह से खारिज हो जाने पर वहां विकास संबंधी योजनाएं प्रस्तावित की जाएंगी।-सुजीत कुमार, डीएम
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कड़ा धाम में 96 बीघा (63 गाटा) भूमि वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज थी। कड़ा निवासी सैयद नियाज अशरफ अली ने वक्फ संपत्ति को यह कहते हुए दावा किया था कि उसे अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासन काल में ख्वाजा कड़क शाह के नाम से माफीनामा दिया था। उन्होंने वर्ष 1945 में दीवानी अदालत में मुकदमा दर्ज किया था। अदालत से मांग की थी कि उसे वक्फ संपत्ति घोषित किया जाए, लेकिन दीवानी अदालत ने उसे वक्फ संपत्ति नहीं माना। वर्ष 1952 में जब जमीनदारी व्यवस्था समाप्त हुई, तब यह जमीन ग्राम समाज के नाम दर्ज थी। सैय्यद नियाज ने 1974 में फिर दीवानी अदालत में मुकदमा दर्ज किया। इस बार भी अदालत ने भूमि को वक्फ संपत्ति नहीं माना।
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उधर गांव में जब चकबंदी शुरू हुई तो चकबंदी अधिकारी के यहां इसी बात का फिर मुकदमा दाखिल किया गया। चकबंदी अधिकारी ने 14 मई 1979 को भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया। इस बीच कई बार चकबंदी अधिकारी व हाईकोर्ट में भी मुकदमा चला। मुकदमा ग्राम सभा लड़ती रही। अंत में हाईकोर्ट ने एडीएम (न्यायिक) डा. विश्राम को पूरे मामले की सुनवाई करते हुए निर्णय का आदेश दिया। एडीएम (न्यायिक) ने सुनवाई में वक्फ संपत्ति संबंधी अभिलेख गलत पाए। साथ ही अपने पक्ष में कोई साक्ष्य दाखिल नहीं कर पाए। वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता शिवमूर्ति द्विवेदी ने सारे अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर अपने मामले को साबित किया। लिहाजा दो दिसंबर को एडीएम (न्यायिक) ने फैसला सुनाते हुए भूमि को ग्राम सभा में दर्ज करने का आदेश दिया।
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एडीएम (न्यायिक) ने भूमि को सरकारी खाते में दर्ज कराते हुए हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है। यह भूमि नगर पंचायत क्षेत्र में है। हाईकोर्ट की तरफ से पूरी तरह से खारिज हो जाने पर वहां विकास संबंधी योजनाएं प्रस्तावित की जाएंगी।-सुजीत कुमार, डीएम