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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   Illegal mining : the Ymunapar look at Kaushambi

अवैध खनन : कौशाम्बी के बाद यमुनापार पर नजर

Sat, 21 Mar 2015 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कौशाम्बी
ब्यूरो/अमर उजाला, कौशाम्बी Updated Sat, 21 Mar 2015 12:51 AM IST
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मंझनपुर। कौशाम्बी के यमुना घाटों पर इस बार बालू खनन का कारोबार मंदा पड़ा है। कई सालों तक अंधाधुंध खनन के चलते बालू माफिया ने घाटों की सूरत बिगाड़ दी है। स्थिति यह है कि कई घाट खनन के लायक ही नहीं रह गए हैँ। अवैध खनन और ओवरलोड ढुलाई को लेकर प्रशासन सख्त है। यहां बालू की संभावना कम देख ज्यादातर ठेकेदार कौशाम्बी छोड़कर यमुना पार बालू के धंधे में जुट गए हैं। जिले के 36 में से सिर्फ 10 भूखंडों का पट्टा हुआ है। इनमें से भी पांच भूखंडों पर खनन बंद है।
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कौशाम्बी में यमुना घाटों पर बालू खनन बड़े पैमाने पर होता रहा है। जिले के महेवा, पभोषा, महिला, लोहकट, छेकवा, रसूलपुर ब्यूर, उमरवल, भखंदा, सेवढ़ा, औधन, दुर्गापुर, सैदपुर, नंदा का पुरा, सिंघवल समेत 36 घाट हैं। जहां पिछले साल तक बालू का खनन होता था। खनन विभाग के मुताबिक इस साल भी 36 घाटों पर खनन के लिए पट्टे का आवेदन आए थे। पर, बालू के अवैध तरीके से खनन और ओवरलोड ढुलाई पर रोक के कारण सिर्फ 10 भूखंडों के ही पट्टे हो सके हैं। इनमें महेवाघाट, उमरवल, रसूलपुर ब्यूर में एक-एक और भखंदा, पभोषाघाट में दो-दो और महिला के तीन भूखंडों का ही पट्टा हुआ है। इनमें से भी पांच भूखंडों में ही बालू खनन हो रहा है।
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पांच भूखंडों में रास्ते की समस्या के कारण अब तक खनन का काम शुरू नहीं हो सका है। बालू कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो अवैध खनन और ओवरलोड ढुलाई को लेकर डीएम की सख्ती को देखते हुए ज्यादातार ठेकेदार और कारोबारियों ने कौशाम्बी के घाटों पर खनन कराने के बजाय यमुना पार पड़ोसी जिले में इस साल बालू का कारोबार शुरू किया है। लोग बताते हैं कि सेवढ़ा घाट पर बालू खनन का कारोबार कराने वाले ठेकेदार इस बार यमुना पार स्थित इलाहाबाद के असरावल खुर्द में खनन करा रहे हैं। वहीं रसूलपुर ब्यूर, औधन, दुर्गापुर और सैदपुर के कारोबारियों ने अपना डेरा लालापुर (इलाहाबाद) में जमाया है।
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 कौशाम्बी के यमुना घाटों का पट्टा नहीं हो पाने से इस बार राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। जिला खनन अधिकारी डॉ. विजय मौर्य ने बताया कि सिर्फ 10 भूखंडों का ही पट्टा हुआ है। पिछले साल हुए पट्टे की मियाद पूरी होने के बाद ज्यादातर का नवीनीकरण भी नहीं हो सका है। मियाद पूरी होने के बाद खनन बंद हो गया है। वहीं 10 में से भी सिर्फ पांच भूखंडों में खनन से करीब 40 फीसदी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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