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Navratri 2025 : शक्तिपीठ कड़ाधाम में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, गूंजे मां के जयकारे

Mon, 22 Sep 2025 03:30 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 22 Sep 2025 03:30 PM IST
सार

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कौशाम्बी के कड़ा स्थित आदिशक्ति पीठ मां शीतला धाम मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। यहां एक दिन पहले से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था।

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huge crowd of devotees gathered at Shaktipeeth Kadadham, chanting praises of the Mother Goddess.
आदिशक्ति शीतला माता मंदिर कड़ाधाम कौशाम्बी। - फोटो : संवाद।

विस्तार

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कौशाम्बी के कड़ा स्थित आदिशक्ति पीठ मां शीतला धाम मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। यहां एक दिन पहले से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था। भोर से ही दर्शन पूजन शुरू हो गया। देवी के जयकारे से पूरा क्षेत्र देवीमय हो गया। कड़ा शीतला धाम 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां आदिशक्ति मां सती का कड़ा गिरा था। यहां पर देशभर से श्रद्धालु मां के दर्शन पूजन और मुंडन कराने के लिए आते हैं। 

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कड़ा धाम में माता सती का गिरा था दाहिना हाथ

धार्मिक मान्यता है कि कौशाम्बी के कड़ा धाम में माता सती का दाहिना हाथ गिरा था। यही कारण है कि कड़ा धाम 51 शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं के आस्था केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। यहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु मां के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

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पुराणों के अनुसार, राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था। उन्होंने सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन अपनी पुत्री सती और दामाद भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। यज्ञ में पहुंची सती ने जब अपने पिता की ओर से भगवान शिव का घोर अपमान होते देखा तो वे दुखी होकर यज्ञ कुंड में कूद गईं।इसके बाद भगवान शिव शोक और क्रोध में सती के शव को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे।

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कहा जाता है कि इस स्थिति से उन्हें बाहर निकालने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाया और सती के शरीर के अंग-प्रत्यंग पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे। इन्हीं स्थलों पर शक्तिपीठ बने। बता दें कि कड़ा में कुंड बना है। जो भी श्रद्धालु मां के इस कुंड को जल, दूध और फल से भरवाता है, मां उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और जीवन के संकटों का नाश करती हैं।

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