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झूम के बरसे बदरा, मौसम हुआ सुहाना
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 03 Jul 2017 01:25 AM IST
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रविवार सुबह हुई बारिश का दृश्य
- फोटो : amar ujala
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रविवार की सुबह से रह-रहकर हुई झमाझम बारिश ने मौसम को सुहाना कर दिया है। उमस भरी गर्मी से जहां लोगों ने राहत महसूस की वहीं किसानों ने धान की रोपाई का काम तेज कर दिया है। बारिश के इंतजार में बैठे केला किसान भी सकर्स की नर्सरी डालने लगे हैं। यूं कहें कि बारिश होते ही किसानों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है।
इस साल बारिश सप्ताह भर देर से शुरू हुई। 20 जून बीतने के बाद हो रही तल्ख धूप ने जनमानस व जीव जंतुओं को व्याकुल कर दिया था। सभी को झमाझम बारिश का इंतजार था। लेकिन हवाओं का दबाव न बन पाने के कारण मानसून सप्ताह भर पिछड़ गया था। शुक्रवार को जिले में मानसून ने दस्तक दी और रविवार की सुबह तक जिले को पूरी तरह से आगोश में ले लिया।
रविवार की नौ से 11 बजे तक जिले में रह-रहकर हुई झमाझम बारिश ने उमस भरी गर्मी से उबल रहे लोगों को जहां राहत दी वहीं किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दिया। बारिश के इंतजार में बैठा मायूस किसान पखवारे भर से आसमान की ओर टकटकी लगाए था। रविवार सुबह बारिश शुरू हुई तो वह तैयार खेतों में नलकूप से पानी भरकर धान की रोपाई में जुट गया।
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हालांकि अभी इतनी बारिश नहीं हुई कि खेत और तालाब लबालब नजर आने लगे, लेकिन धान की रोपाई और केले की नर्सरी के लिए मौसम मुफीद बन गया है। बारिश से जंगलों में गर्मी और प्यास से हांफ रहे जीव जंतुओं ने भी राहत की सांस ली है। बारिश से मगन होकर जंगली जीव जहां कुलांचे भरते नजर आए वहीं दूसरी ओर मोर भी नाच उठे। बहरहाल कुछ भी हो रविवार की सुबह बदले मौसम के मिजाज हर चेहरे पर मुस्कान लौटाने का काम किया है।
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इस साल बारिश सप्ताह भर देर से शुरू हुई। 20 जून बीतने के बाद हो रही तल्ख धूप ने जनमानस व जीव जंतुओं को व्याकुल कर दिया था। सभी को झमाझम बारिश का इंतजार था। लेकिन हवाओं का दबाव न बन पाने के कारण मानसून सप्ताह भर पिछड़ गया था। शुक्रवार को जिले में मानसून ने दस्तक दी और रविवार की सुबह तक जिले को पूरी तरह से आगोश में ले लिया।
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रविवार की नौ से 11 बजे तक जिले में रह-रहकर हुई झमाझम बारिश ने उमस भरी गर्मी से उबल रहे लोगों को जहां राहत दी वहीं किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दिया। बारिश के इंतजार में बैठा मायूस किसान पखवारे भर से आसमान की ओर टकटकी लगाए था। रविवार सुबह बारिश शुरू हुई तो वह तैयार खेतों में नलकूप से पानी भरकर धान की रोपाई में जुट गया।
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हालांकि अभी इतनी बारिश नहीं हुई कि खेत और तालाब लबालब नजर आने लगे, लेकिन धान की रोपाई और केले की नर्सरी के लिए मौसम मुफीद बन गया है। बारिश से जंगलों में गर्मी और प्यास से हांफ रहे जीव जंतुओं ने भी राहत की सांस ली है। बारिश से मगन होकर जंगली जीव जहां कुलांचे भरते नजर आए वहीं दूसरी ओर मोर भी नाच उठे। बहरहाल कुछ भी हो रविवार की सुबह बदले मौसम के मिजाज हर चेहरे पर मुस्कान लौटाने का काम किया है।