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Kaushambi News: गर्मी ने चौपट कर दी उर्द-मूंग की फसल
Tue, 18 Jun 2024 05:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 18 Jun 2024 05:12 AM IST
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कसिया गांव में मूंग का खेत दिखाता किसान। संवाद
तापमान की अधिकता का सीधा असर मूंग और उर्द की फसल पर पड़ रहा है। किसानों की तमाम कोशिश के बाद भी आधी से ज्यादा फसल प्रभवित हो गई। जो फसल देखने में अच्छी लग रही है, उसके भी दाने अंदर से खराब हैं।
जिले में इस साल किसानों ने 1,400 हेक्टेयर में मूंग व 883 हेक्टेयर में उर्द की फैसल तैयार की थी। मार्च- अप्रैल में किसानों ने फसल की बुआई कर दी। उस वक्त मौसम ने किसानों का साथ दिया। अनुकूल तापमान होने के कारण फसल की ग्रोथ अच्छी हुई। किसानों को लगा कि इस बार बेहतर पैदावार होगी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।
मई में ही मौसम ज्यादा गर्म हो गया। जिस फसल की 15 दिन में सिंचाई करनी चाहिए, वह पांच दिन में ही सूखने लगी। बार-बार फसल सूखने और फिर पानी देने के कारण फसल तो हरी भरी हो गई, लेकिन दाने प्रभावित हो गए।
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उदहिन के किसान अनिल सिंह, शिव सिंह, सुरेंद्र सिंह, बैरमपुर के किसान अनुज कुमार व मनोज ने बताया कि फसल शुरू में जिस प्रकार दिख रही थी। उत्पादन उतना बेहतर नहीं हो रहा है। एक बीघा फसल तैयार करने में चार हजार की लागत आती है, वह भी नहीं निकली।
किसान लाल बहादुर का कहना है कि रातों दिन जागकर फसल को बेसहारा मवेशी व नीलगाय से तो बचा लिया। लेकिन मौसम की मार से फसल नहीं बच सकी। इस बार मूंग व उर्द की खेती घाटे का सौदा रही।
फसल को दूर से देखा जाए तो वह अच्छी दिखती है, लेकिन दाने 50-60 प्रतिशत तक मार खा गए हैं। ऐसे में उत्पादन आधा भी नहीं रह गया है। यह मौसम का प्रभाव है। - डॉ. मनोज सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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जिले में इस साल किसानों ने 1,400 हेक्टेयर में मूंग व 883 हेक्टेयर में उर्द की फैसल तैयार की थी। मार्च- अप्रैल में किसानों ने फसल की बुआई कर दी। उस वक्त मौसम ने किसानों का साथ दिया। अनुकूल तापमान होने के कारण फसल की ग्रोथ अच्छी हुई। किसानों को लगा कि इस बार बेहतर पैदावार होगी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।
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मई में ही मौसम ज्यादा गर्म हो गया। जिस फसल की 15 दिन में सिंचाई करनी चाहिए, वह पांच दिन में ही सूखने लगी। बार-बार फसल सूखने और फिर पानी देने के कारण फसल तो हरी भरी हो गई, लेकिन दाने प्रभावित हो गए।
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उदहिन के किसान अनिल सिंह, शिव सिंह, सुरेंद्र सिंह, बैरमपुर के किसान अनुज कुमार व मनोज ने बताया कि फसल शुरू में जिस प्रकार दिख रही थी। उत्पादन उतना बेहतर नहीं हो रहा है। एक बीघा फसल तैयार करने में चार हजार की लागत आती है, वह भी नहीं निकली।
किसान लाल बहादुर का कहना है कि रातों दिन जागकर फसल को बेसहारा मवेशी व नीलगाय से तो बचा लिया। लेकिन मौसम की मार से फसल नहीं बच सकी। इस बार मूंग व उर्द की खेती घाटे का सौदा रही।
फसल को दूर से देखा जाए तो वह अच्छी दिखती है, लेकिन दाने 50-60 प्रतिशत तक मार खा गए हैं। ऐसे में उत्पादन आधा भी नहीं रह गया है। यह मौसम का प्रभाव है। - डॉ. मनोज सिंह, कृषि वैज्ञानिक

कसिया गांव में मूंग का खेत दिखाता किसान। संवाद