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कौशाम्बी में अब विकास कार्यों के लिए काटे नहीं जाएंगे हरे पेड़
Mon, 02 Aug 2021 01:33 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 01:33 AM IST
सार
जिले में अब हरे पेड़ विकास कार्यों के लिए काटे नहीं जाएंगे। सरकारी या निजी क्षेत्र के विकास कार्यों में बांधा बनने वाले वृक्षों को अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
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विस्तार
जिले में अब हरे पेड़ विकास कार्यों के लिए काटे नहीं जाएंगे। सरकारी या निजी क्षेत्र के विकास कार्यों में बांधा बनने वाले वृक्षों को अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ट्रांसप्लांट किया जाएगा। उन्हें काटे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव आशीष तिवारी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मुख्य वन्य संरक्षक नोडल अधिकारी अनुपम गुप्ता को इस बाबत शासनादेश जारी किया है। शासनादेश में कहा गया है कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा 2 के अंतर्गत गैरवानिकी प्रयोग के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार को वृहद संख्या में वृक्षों की कटाई के लिए प्रस्ताव भेज स्वीकृति मांगी जाती है, लेकिन इस प्रस्ताव में सभी वृक्षों के प्रत्यारोपण (इंटायर ट्री ट्रांसप्लांटेशन-ईटीटी) की शर्त शामिल नहीं की जाती है।
सरकार ने अब निर्णय लिया है कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा 02 के अधीन गैरवानिकी प्रयोग संबंधी प्रस्ताव में सभी वृक्षों के प्रत्यारोपण की शर्त (ईटीटी) को प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा। वन भूमि पर गैरवानिकी विकास कार्यों के लिए जो भी प्रस्ताव होंगे, उनमें वृक्षों को काटने की अनुमति नहीं मिलेगी। बल्कि सरकारी या निजी एजेंसी को लिखित रूप में देना होगा वह उस जमीन के सभी वृक्षों को ट्रांसप्लांट करेंगे। प्रभागीय वन अधिकारी आरसी यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हेरिटेज वृक्षों के संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ट्री ट्रांसप्लांटेशन का निर्णय लिया है। जिले में इसका सख्ती से अनुपालन कराया जाएगा।
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प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव आशीष तिवारी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मुख्य वन्य संरक्षक नोडल अधिकारी अनुपम गुप्ता को इस बाबत शासनादेश जारी किया है। शासनादेश में कहा गया है कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा 2 के अंतर्गत गैरवानिकी प्रयोग के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार को वृहद संख्या में वृक्षों की कटाई के लिए प्रस्ताव भेज स्वीकृति मांगी जाती है, लेकिन इस प्रस्ताव में सभी वृक्षों के प्रत्यारोपण (इंटायर ट्री ट्रांसप्लांटेशन-ईटीटी) की शर्त शामिल नहीं की जाती है।
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सरकार ने अब निर्णय लिया है कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा 02 के अधीन गैरवानिकी प्रयोग संबंधी प्रस्ताव में सभी वृक्षों के प्रत्यारोपण की शर्त (ईटीटी) को प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा। वन भूमि पर गैरवानिकी विकास कार्यों के लिए जो भी प्रस्ताव होंगे, उनमें वृक्षों को काटने की अनुमति नहीं मिलेगी। बल्कि सरकारी या निजी एजेंसी को लिखित रूप में देना होगा वह उस जमीन के सभी वृक्षों को ट्रांसप्लांट करेंगे। प्रभागीय वन अधिकारी आरसी यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हेरिटेज वृक्षों के संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ट्री ट्रांसप्लांटेशन का निर्णय लिया है। जिले में इसका सख्ती से अनुपालन कराया जाएगा।
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