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अवकाश के लिए बना रहे बीमारियों का बहाना
Sat, 29 Dec 2018 01:07 AM IST
विनोद सिंह
kaushambi
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Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 29 Dec 2018 01:07 AM IST
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मंझनपुर। साल के अलविदा पर सरकारी मुलाजिम अवकाश लेने की होड़ में लगे हैं। कैजुअल लीव लेेने के चक्कर में वह अपने घर-परिवार वालों की बीमारी का बहाना बता रहे हैं। इसकी वजह से सरकारी दफ्तरों का कामकाज प्रभावित हो रहा है।
हर सरकारी कर्मचारी को साल में 14 दिन का आकस्मिक अवकाश मिलता है। दो दिन के लिए निर्बन्धित अवकाश दिया जाता है। साल में करीब 70 दिन से ज्यादा का राजकीय अवकाश होता है। ऐसे में कर्मचारियों को अवकाश लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। नतीजतन सरकारी कर्मकारी अपनी कैजुअल लीव को बचाकर रखते हैं।
साल के अंतिम माह में यह कर्मचारी कैजुअल लीव लेने के फिराक में लग जाते हैं। जिला अस्पताल में 35 चिकित्सकों का स्टाफ है। इसके सापेक्ष पांच लोग अवकाश पर हैं। इनमें चिकित्सक विवेक केसरवानी भी शामिल हैं, जिनकी ड्यूटी इमरजेंसी में लगती है। इसी तरह विकास और राजस्व विभाग का भी हाल है। यहां के ज्यादातर कर्मचारी अवकाश पर हैं। इसी तरह से पुलिस विभाग में भी देखा जा रहा है। सिपाही-दरोगा किसी न किसी बहाने छुट्टी ले रहे हैं। गुरुवार को कोतवाली मंझनपुर में एक साथ कई सिपाहियों का प्रार्थना पत्र देख कोतवाल भड़क गए। बोले सबको अवकाश दे देंगे तो फिर कानून-व्यवस्था का क्या होगा? खास बात यह है कि अवकाश के लिए दिए जाने वाले प्रथना पत्र में लोग खुद या परिवार के सदस्यों को बीमार बता रहे हैं। हालांकि अफसरों का कहना है कि कर्मचारी सेवा नियमावली के मुताबिक कैजुअवल अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती। किसी कर्मचारी को जरूरत है तो उसे अवकाश दिया जाता है।
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हर सरकारी कर्मचारी को साल में 14 दिन का आकस्मिक अवकाश मिलता है। दो दिन के लिए निर्बन्धित अवकाश दिया जाता है। साल में करीब 70 दिन से ज्यादा का राजकीय अवकाश होता है। ऐसे में कर्मचारियों को अवकाश लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। नतीजतन सरकारी कर्मकारी अपनी कैजुअल लीव को बचाकर रखते हैं।
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साल के अंतिम माह में यह कर्मचारी कैजुअल लीव लेने के फिराक में लग जाते हैं। जिला अस्पताल में 35 चिकित्सकों का स्टाफ है। इसके सापेक्ष पांच लोग अवकाश पर हैं। इनमें चिकित्सक विवेक केसरवानी भी शामिल हैं, जिनकी ड्यूटी इमरजेंसी में लगती है। इसी तरह विकास और राजस्व विभाग का भी हाल है। यहां के ज्यादातर कर्मचारी अवकाश पर हैं। इसी तरह से पुलिस विभाग में भी देखा जा रहा है। सिपाही-दरोगा किसी न किसी बहाने छुट्टी ले रहे हैं। गुरुवार को कोतवाली मंझनपुर में एक साथ कई सिपाहियों का प्रार्थना पत्र देख कोतवाल भड़क गए। बोले सबको अवकाश दे देंगे तो फिर कानून-व्यवस्था का क्या होगा? खास बात यह है कि अवकाश के लिए दिए जाने वाले प्रथना पत्र में लोग खुद या परिवार के सदस्यों को बीमार बता रहे हैं। हालांकि अफसरों का कहना है कि कर्मचारी सेवा नियमावली के मुताबिक कैजुअवल अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती। किसी कर्मचारी को जरूरत है तो उसे अवकाश दिया जाता है।
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