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Kaushambi News: पांच शिक्षक, 12 बच्चे...सिस्टम नींद में है
Wed, 04 Sep 2024 06:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 04 Sep 2024 06:27 AM IST
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नेवादा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय जयंतीपुर में 12 बच्चों का नामांकन है। इन्हें पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक व दो शिक्षा मित्र हैं। पढ़ाई का हाल यह है कि बच्चों को दस तक का पहाड़ा नहीं आता। कुछ बच्चे तो हिंदी की किताब तक नहीं पढ़ पाते। लेकिन शिक्षा विभाग ने आज तक नहीं पूछा कि यह हाल क्यों है।
एक तरफ जहां विद्यार्थियों की कम संख्या होने पर विद्यालयों से जवाब तलब किया जा रहा है। वहीं जयंतीपुर के प्राथमिक विद्यालय की मौज है। विद्यालय में पंजीकृत 12 बच्चों में से दो कभी-कभार ही स्कूल आते हैं। मंगलवार को 10 बच्चे स्कूल आए थे। इनको पढ़ाने के लिए प्रधानाध्याक अवधेश कुमार व सहायक अध्यापिका राफिया ही मौजूद मिलीं। प्रधानाध्यापक दूसरे कमरे में बैठे मिले। उन्हें शारीरिक दिक्कत है। प्रयागराज से आते हैं। वहीं बैठे रहते हैं।
राफिया एक कमरे में 10 बच्चों को बैठाकर उनसे सवाल-जवाब करती मिलीं। बताया कि वह कक्षा एक की कक्षाध्यापक हैं। इनकी कक्षा में मात्र एक छात्र आर्यन पांडेय ही पंजीकृत है। वह पढ़ने आता है। उसे निपुण बना दिया गया है। पता चला कि दूसरी सहायक अध्यापिका नीतू मिश्रा मातृत्व अवकाश पर हैं। दो शिक्षामित्र रविशंकर मिश्र व शिवकली मिश्रा बीआरसी में प्रशिक्षण ले रहे। ऐसा बताया गया।
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स्कूल की दशा पर प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार का कहना है कि स्टाफ सहयोग नहीं करता है। इसके कारण छात्र संख्या नहीं बढ़ रही है।
अन्य व्यवस्थाएं भी बदहाल
ऐसा लगा कि विद्यालय में हफ्तों से सफाई नहीं हुई। हैंडपंप खराब, रनिंग वाटर की कोई व्यवस्था नहीं है। एमडीएम के लिए रसोइया बाहर से पानी लाता है। बच्चे भी पास स्थित एक हैंडपंप से काम चलाते हैं। शौचालय बदहाल है। न तो बिजली है और न ही सुरक्षा के लिए चहारदीवारी बनी है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि इसकी जानकारी अधिकारियों को है। स्टाफ उनकी सुनता नहीं। ऐसे में वह शांत है।
स्कूल में कक्षावार पंजीकृत बच्चे
कक्षा-1, आर्यन पांडेय।
कक्षा- 2, पूर्वी मिश्र, रिया विश्वकर्मा, सौम्या मिश्रा व अभिषेक पांडेय।
कक्षा- 3, स्वास्तिक पांडेय व आयुषी।
कक्षा-4, शिवानी व अंतिमा
कक्षा- 5, अनुराधा पांडेय,अंश व सुजीत कुमार।
कोविड के दौरान हुआ था फर्जी नामांकन
कोविड के दौरान शिक्षकों को यहां से जाना न पड़े इसके यहां छात्र संख्या बढ़ा दी गई। इसका परिणाम रहा कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे को जहां 12 सौ रुपये प्रति वर्ष सरकार की ओर से मदद मिलती रही। एमडीएम का भी खेल हुआ। 2023 में गांव के कुछ लोगों को इसकी जानकारी हुई तो अप्रैल से फर्जी नामांकन बंद हो गया। अचानक स्कूल से 26 बच्चे कम हो गए। इस सवाल पर प्रधानाध्यापक ने इतना ही कहा जो हो गया, उसका अब क्या करें।
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-- स्कूल में बढ़े शिक्षकों का समायोजन जल्द होगा। इसकी प्रक्रिया चल रही है। वहां अधिक शिक्षक कैसे पहुंचे और अन्य प्रकरण की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा, बीएसए
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एक तरफ जहां विद्यार्थियों की कम संख्या होने पर विद्यालयों से जवाब तलब किया जा रहा है। वहीं जयंतीपुर के प्राथमिक विद्यालय की मौज है। विद्यालय में पंजीकृत 12 बच्चों में से दो कभी-कभार ही स्कूल आते हैं। मंगलवार को 10 बच्चे स्कूल आए थे। इनको पढ़ाने के लिए प्रधानाध्याक अवधेश कुमार व सहायक अध्यापिका राफिया ही मौजूद मिलीं। प्रधानाध्यापक दूसरे कमरे में बैठे मिले। उन्हें शारीरिक दिक्कत है। प्रयागराज से आते हैं। वहीं बैठे रहते हैं।
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राफिया एक कमरे में 10 बच्चों को बैठाकर उनसे सवाल-जवाब करती मिलीं। बताया कि वह कक्षा एक की कक्षाध्यापक हैं। इनकी कक्षा में मात्र एक छात्र आर्यन पांडेय ही पंजीकृत है। वह पढ़ने आता है। उसे निपुण बना दिया गया है। पता चला कि दूसरी सहायक अध्यापिका नीतू मिश्रा मातृत्व अवकाश पर हैं। दो शिक्षामित्र रविशंकर मिश्र व शिवकली मिश्रा बीआरसी में प्रशिक्षण ले रहे। ऐसा बताया गया।
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स्कूल की दशा पर प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार का कहना है कि स्टाफ सहयोग नहीं करता है। इसके कारण छात्र संख्या नहीं बढ़ रही है।
अन्य व्यवस्थाएं भी बदहाल
ऐसा लगा कि विद्यालय में हफ्तों से सफाई नहीं हुई। हैंडपंप खराब, रनिंग वाटर की कोई व्यवस्था नहीं है। एमडीएम के लिए रसोइया बाहर से पानी लाता है। बच्चे भी पास स्थित एक हैंडपंप से काम चलाते हैं। शौचालय बदहाल है। न तो बिजली है और न ही सुरक्षा के लिए चहारदीवारी बनी है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि इसकी जानकारी अधिकारियों को है। स्टाफ उनकी सुनता नहीं। ऐसे में वह शांत है।
स्कूल में कक्षावार पंजीकृत बच्चे
कक्षा-1, आर्यन पांडेय।
कक्षा- 2, पूर्वी मिश्र, रिया विश्वकर्मा, सौम्या मिश्रा व अभिषेक पांडेय।
कक्षा- 3, स्वास्तिक पांडेय व आयुषी।
कक्षा-4, शिवानी व अंतिमा
कक्षा- 5, अनुराधा पांडेय,अंश व सुजीत कुमार।
कोविड के दौरान हुआ था फर्जी नामांकन
कोविड के दौरान शिक्षकों को यहां से जाना न पड़े इसके यहां छात्र संख्या बढ़ा दी गई। इसका परिणाम रहा कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे को जहां 12 सौ रुपये प्रति वर्ष सरकार की ओर से मदद मिलती रही। एमडीएम का भी खेल हुआ। 2023 में गांव के कुछ लोगों को इसकी जानकारी हुई तो अप्रैल से फर्जी नामांकन बंद हो गया। अचानक स्कूल से 26 बच्चे कम हो गए। इस सवाल पर प्रधानाध्यापक ने इतना ही कहा जो हो गया, उसका अब क्या करें।
- डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा, बीएसए