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Kaushambi News: विकास भवन की तीन मंजिला इमारत में लगी आग, अधिकारी-कर्मचारी फंसे
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मुख्यालय स्थित विकास भवन में आग लगने के बाद जुटे लोग। संवाद
मंझनपुर(कौशाम्बी)। विकास भवन के एक स्टोर रूम में शनिवार दोपहर अचानक आग लग गई। आग तो सिर्फ एक जगह लगी थी, लेकिन धुआं तीन मंजिला इमारत के कोने-कोने में भर गया। घुटन की वजह से इमारत में मौजूद अधिकारियों-कर्मचारियों समेत तकरीबन 400 लोगों की सांसें फूलने लगीं। किसी ने बाहर भागकर तो किसी ने छत पर जाकर जान बचाई। करीब घंटेभर की मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आग पर काबू पाया। आगजनी में कोई जनहानि नहीं हुई। विभागों में रखे दस्तावेज भी बच गए।
विकास भवन की तीन मंजिला इमारत में लगभग 80 कमरे हैं। मुख्य विकास अधिकारी और जिला विकास अधिकारी के अलावा 30 अन्य सरकारी विभागों के दफ्तर भी इसी भवन में हैं। डीआरडीए कार्यालय के पास एक कमरे को स्टोर बनाया गया है। यहां टूटी कुर्सियां, वाहनों के खराब टायर व अन्य कबाड़ रखा जाता है। दोपहर करीब 2:15 बजे अचानक इसी कमरे में आग लग गई।
जब तक कोई कुछ समझ पाता, तब तक इस धुआं विकास भवन के कोने-कोन में फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस वक्त सरकारी दफ्तरों में तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों समेत करीब 400 लोग मौजूद थे। धुएं की वजह से लोगों का सांस लेना दुश्वार हो गया। लोगों ने डायल-101 पर फोन किया, लेकिन फायर ब्रिगेड से संपर्क नहीं हो पाया। लोगों ने खुद ही छतों पर फंसे लोगों को बचाने के जतन शुरू किए।
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खबर मिलने पर करीब 20 मिनट बाद दमकल की दो गाड़ियां पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने लगभग एक घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया। घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
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भूतल से पहली मंजिल तक पहुंची आग
जिस जगह पर आग लगी थी, वहां जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) का कार्यालय हैं। इसमें सांसद, विधायक समेत अन्य माननीयों की निधियों से मिलने वाले बजट और उसके खर्च के ब्योरे से जुड़े दस्तावेज रहते हैं।
स्टोर की आग पहली मंजिल तक पहुंच गई थी। यहां ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, निर्वाचन कार्यालय, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग समेत अन्य दफ्तर हैं। आग आरईडी के एक्सईएन के कक्ष तक पहुंच गई थी। कमरे का दरवाजा भी जल गया।
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विकास भवन के एक स्टोर में आग लगी थी। इसी से धुआं पूरे भवन में फैल गया। समय रहते अग्निशमन दल ने आग पर काबू पा लिया। किसी तरह की जनहानि या अन्य कोई नुकसान नहीं हुआ। - सुखराज बंधु, जिला विकास अधिकारी
धुएं में गुम हुईं सीढ़ियां, छत और पोर्टिको ने बचाई जान
मंझनपुर। विकास भवन में लगी आग उतनी भयावह नहीं थी, जितना उसका धुआं डरा रहा था। तीन मंजिला इमारत की सीढ़ियां धुएं में गुम हो गई थीं। भूतल के दफ्तरों के लोग जैसे-तैसे बच निकले, लेकिन प्रथम तल में फंसे लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं सूझ रहा था। दम घुटने पर किसी ने छत और किसी ने पोर्टिको में जाकर जान बचाई।
विकास भवन में आग लगते ही सीडीओ कार्यालय के पास लगा इमरजेंसी सायरन बजने लगा। भवन से उठता धुआं और सायरन की आवाज सुनकर मुख्य गेट के पास बैठे अधिवक्ता दौड़ पड़े।
कुछ बच्चे, महिलाएं, दिव्यांग व कर्मचारी पशुपालन विभाग के बाहर बने पोर्टिको में खड़े सुरक्षा की गुहार लगाने लगे। तीसरी मंजिल में फंसे कुछ लोग नीचे आने का रास्ता खोज रहे थे। काफी खोजबीन के बाद भी नीचे खड़े लोगों को सीढ़ी नहीं मिली।
इस बीच एक अधिवक्ता टेलीफोन के खंभे पर चढ़ गए और ऊपर फंसे बच्चे व अन्य लोगों को उतारने लगे। इसी तरह तमाम लोग सीडीओ दफ्तर की ओर छत पर फंसे थे। इन्हें भी सीढ़ियां के सहारे नीचे लाया गया।
आरईडी के एक कर्मचारी ने बताया कि दोपहर करीब दो बजे दफ्तर में बैठकर काम कर रहे थे। अचानक देखते ही देखते पूरे कार्यालय में धुआं फैल गया। किसी तरह बाहर निकला तो हर तरफ धुआं ही धुआं था।
वहीं, नेवादा के अरविंद कुमार ने बताया कि पशुपालन के लिए लोन से जुड़ी जानकारी लेने पशुपालन विभाग आया था। तभी अचानक दफ्तर में धुआं भर गया। सांस फूलने लगी। बाहर गली ही नहीं दिख रही थी। आखिर में पोर्टिको में पहुंचा, तक जान में जान आई।
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आम दिनों से कम थी भीड़
विकास भवन स्थित 32 सरकारी विभागों के दफ्तरों में लगभग 350 कर्मचारी काम करते हैं। इसके अलावा किसी न किसी काम के सिलसिले में 300 से 400 लोगों का यहां आना-जाना होता है। इमारत के भूतल में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा भी है, जहां दिनभर खाताधारकों का आवागमन रहता है। सीडीओ समेत अन्य कई अधिकारी सिराथू में आयोजित सामूहिक विवाह में गए थे। जनसुनवाई का समय समाप्त होने के बाद अन्य विभागों के ज्यादातर अधिकारी भी फील्ड में थे। इस वजह से इमारत में भीड़ कुछ कम थी, अन्यथा बाहर निकलने की जगह भी कम पड़ जाती।
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धुआं निकालने के लिए दरवाजे-खिड़कियां तोड़ी
विकास भवन के पहली मंजिल पर सबसे ज्यादा धुआं आरईडी कार्यालय की तरफ था। यहां खिड़कियां और दरवाजे लगे थे, लेकिन इनमें कुछ जाम से तो कुछ में प्लाई लगी थी। बचाव कार्य में लगे लोगों को जब धुआं निकालने का कोई रास्ता नहीं दिखा तो खिड़की व दरवाजे तोड़ दिए।
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विकास भवन की तीन मंजिला इमारत में लगभग 80 कमरे हैं। मुख्य विकास अधिकारी और जिला विकास अधिकारी के अलावा 30 अन्य सरकारी विभागों के दफ्तर भी इसी भवन में हैं। डीआरडीए कार्यालय के पास एक कमरे को स्टोर बनाया गया है। यहां टूटी कुर्सियां, वाहनों के खराब टायर व अन्य कबाड़ रखा जाता है। दोपहर करीब 2:15 बजे अचानक इसी कमरे में आग लग गई।
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जब तक कोई कुछ समझ पाता, तब तक इस धुआं विकास भवन के कोने-कोन में फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस वक्त सरकारी दफ्तरों में तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों समेत करीब 400 लोग मौजूद थे। धुएं की वजह से लोगों का सांस लेना दुश्वार हो गया। लोगों ने डायल-101 पर फोन किया, लेकिन फायर ब्रिगेड से संपर्क नहीं हो पाया। लोगों ने खुद ही छतों पर फंसे लोगों को बचाने के जतन शुरू किए।
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खबर मिलने पर करीब 20 मिनट बाद दमकल की दो गाड़ियां पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने लगभग एक घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया। घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
भूतल से पहली मंजिल तक पहुंची आग
जिस जगह पर आग लगी थी, वहां जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) का कार्यालय हैं। इसमें सांसद, विधायक समेत अन्य माननीयों की निधियों से मिलने वाले बजट और उसके खर्च के ब्योरे से जुड़े दस्तावेज रहते हैं।
स्टोर की आग पहली मंजिल तक पहुंच गई थी। यहां ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, निर्वाचन कार्यालय, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग समेत अन्य दफ्तर हैं। आग आरईडी के एक्सईएन के कक्ष तक पहुंच गई थी। कमरे का दरवाजा भी जल गया।
विकास भवन के एक स्टोर में आग लगी थी। इसी से धुआं पूरे भवन में फैल गया। समय रहते अग्निशमन दल ने आग पर काबू पा लिया। किसी तरह की जनहानि या अन्य कोई नुकसान नहीं हुआ। - सुखराज बंधु, जिला विकास अधिकारी
धुएं में गुम हुईं सीढ़ियां, छत और पोर्टिको ने बचाई जान
मंझनपुर। विकास भवन में लगी आग उतनी भयावह नहीं थी, जितना उसका धुआं डरा रहा था। तीन मंजिला इमारत की सीढ़ियां धुएं में गुम हो गई थीं। भूतल के दफ्तरों के लोग जैसे-तैसे बच निकले, लेकिन प्रथम तल में फंसे लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं सूझ रहा था। दम घुटने पर किसी ने छत और किसी ने पोर्टिको में जाकर जान बचाई।
विकास भवन में आग लगते ही सीडीओ कार्यालय के पास लगा इमरजेंसी सायरन बजने लगा। भवन से उठता धुआं और सायरन की आवाज सुनकर मुख्य गेट के पास बैठे अधिवक्ता दौड़ पड़े।
कुछ बच्चे, महिलाएं, दिव्यांग व कर्मचारी पशुपालन विभाग के बाहर बने पोर्टिको में खड़े सुरक्षा की गुहार लगाने लगे। तीसरी मंजिल में फंसे कुछ लोग नीचे आने का रास्ता खोज रहे थे। काफी खोजबीन के बाद भी नीचे खड़े लोगों को सीढ़ी नहीं मिली।
इस बीच एक अधिवक्ता टेलीफोन के खंभे पर चढ़ गए और ऊपर फंसे बच्चे व अन्य लोगों को उतारने लगे। इसी तरह तमाम लोग सीडीओ दफ्तर की ओर छत पर फंसे थे। इन्हें भी सीढ़ियां के सहारे नीचे लाया गया।
आरईडी के एक कर्मचारी ने बताया कि दोपहर करीब दो बजे दफ्तर में बैठकर काम कर रहे थे। अचानक देखते ही देखते पूरे कार्यालय में धुआं फैल गया। किसी तरह बाहर निकला तो हर तरफ धुआं ही धुआं था।
वहीं, नेवादा के अरविंद कुमार ने बताया कि पशुपालन के लिए लोन से जुड़ी जानकारी लेने पशुपालन विभाग आया था। तभी अचानक दफ्तर में धुआं भर गया। सांस फूलने लगी। बाहर गली ही नहीं दिख रही थी। आखिर में पोर्टिको में पहुंचा, तक जान में जान आई।
आम दिनों से कम थी भीड़
विकास भवन स्थित 32 सरकारी विभागों के दफ्तरों में लगभग 350 कर्मचारी काम करते हैं। इसके अलावा किसी न किसी काम के सिलसिले में 300 से 400 लोगों का यहां आना-जाना होता है। इमारत के भूतल में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा भी है, जहां दिनभर खाताधारकों का आवागमन रहता है। सीडीओ समेत अन्य कई अधिकारी सिराथू में आयोजित सामूहिक विवाह में गए थे। जनसुनवाई का समय समाप्त होने के बाद अन्य विभागों के ज्यादातर अधिकारी भी फील्ड में थे। इस वजह से इमारत में भीड़ कुछ कम थी, अन्यथा बाहर निकलने की जगह भी कम पड़ जाती।
धुआं निकालने के लिए दरवाजे-खिड़कियां तोड़ी
विकास भवन के पहली मंजिल पर सबसे ज्यादा धुआं आरईडी कार्यालय की तरफ था। यहां खिड़कियां और दरवाजे लगे थे, लेकिन इनमें कुछ जाम से तो कुछ में प्लाई लगी थी। बचाव कार्य में लगे लोगों को जब धुआं निकालने का कोई रास्ता नहीं दिखा तो खिड़की व दरवाजे तोड़ दिए।

मुख्यालय स्थित विकास भवन में आग लगने के बाद जुटे लोग। संवाद

मुख्यालय स्थित विकास भवन में आग लगने के बाद जुटे लोग। संवाद