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मासूम बेटे का कंधे पर शव रख भटकता रहा पिता
Thu, 31 Jan 2019 12:57 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Thu, 31 Jan 2019 12:57 AM IST
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कौशाम्बी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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मंझनपुर (कौशाम्बी)। सड़क हादसे में मरे मासूम बेटे के शव को ले जाने के लिए एक पिता दर-दर की ठोकरें खाता रहा। जिला अस्पताल में एंबुलेंस न मिलने पर वह कंधे पर ही बेटे का शव लेकर चल दिया। मामला पुलिस तक पहुंचा तो वह शव लेकर आई। अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी ने मामले में गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया।
सदर कोतवाली के बभन पुरवा मजरा समदा गांव निवासी संतोष कुमार की ससुराल भगौतापुर गांव में है। पिछले दिनों संतोष के ससुर की मौत हो गई थी। एक फरवरी को भगौतापुर में तेरहवीं भोज का आयोजन था। इसके लिए संतोष के घरवाले बुधवार को ऑटो से कोड़र गांव पहुंचे। यहां से परिजन घर जाने लगे लेकिन संतोष का सात वर्षीय बेटा आलोक रोड पर ही खड़ा रह गया। इसी बीच एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उसे कुचल दिया। संतोष की मानें तो उसके बेटे की सांस चल रही थी। सूचना के बावजूद वक्त पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर वह लोग एक बाइक सवार की मदद से आलोक को जिला अस्पताल ले गए। यहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आरोप है कि अनुरोध के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने शव वाहन की व्यवस्था नहीं कराई। कंधे पर बेटे की लाश लिए संतोष जिला अस्पताल से मंझनपुर के मुख्य चौराहे आया और वहीं पर फूट-फूट कर रोने लगा। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी सदर कोतवाली पुलिस को दी तो मौके पर पहुंचे सिपाही उसे कोतवाली ले गए। यहां शव का पंचनामा भरने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल डॉ. अरविंद कनौजिया का कहना है कि जिला अस्पताल में अगर कोई एक्सीडेंटल मौत होती है तो पुलिस को मेमो भेजा जाता है। पोस्टमार्टम के लिए ही वाहन की व्यवस्था कराई जाती है। हो, सकता है कि घरवाले पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी नहीं हुए हों।
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सदर कोतवाली के बभन पुरवा मजरा समदा गांव निवासी संतोष कुमार की ससुराल भगौतापुर गांव में है। पिछले दिनों संतोष के ससुर की मौत हो गई थी। एक फरवरी को भगौतापुर में तेरहवीं भोज का आयोजन था। इसके लिए संतोष के घरवाले बुधवार को ऑटो से कोड़र गांव पहुंचे। यहां से परिजन घर जाने लगे लेकिन संतोष का सात वर्षीय बेटा आलोक रोड पर ही खड़ा रह गया। इसी बीच एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उसे कुचल दिया। संतोष की मानें तो उसके बेटे की सांस चल रही थी। सूचना के बावजूद वक्त पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर वह लोग एक बाइक सवार की मदद से आलोक को जिला अस्पताल ले गए। यहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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आरोप है कि अनुरोध के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने शव वाहन की व्यवस्था नहीं कराई। कंधे पर बेटे की लाश लिए संतोष जिला अस्पताल से मंझनपुर के मुख्य चौराहे आया और वहीं पर फूट-फूट कर रोने लगा। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी सदर कोतवाली पुलिस को दी तो मौके पर पहुंचे सिपाही उसे कोतवाली ले गए। यहां शव का पंचनामा भरने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल डॉ. अरविंद कनौजिया का कहना है कि जिला अस्पताल में अगर कोई एक्सीडेंटल मौत होती है तो पुलिस को मेमो भेजा जाता है। पोस्टमार्टम के लिए ही वाहन की व्यवस्था कराई जाती है। हो, सकता है कि घरवाले पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी नहीं हुए हों।
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