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Kaushambi News: किसानों को चाहिए पानी, सिंचाई विभाग तली सूखने का कर रहा इंतजार

Mon, 03 Nov 2025 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Mon, 03 Nov 2025 01:16 AM IST
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Farmers need water, the irrigation department is waiting for the bottom to dry
शैलेंद्र मिश्र, पुनवार
जिले की नहरों में पानी नहीं है। सिंचाई विभाग अभी पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है। विभाग नहरों की तली सूखने के बाद ही सिल्ट सफाई का काम शुरू कराएगा। दावा किया जा रहा है कि 15 दिसंबर के बाद ही पानी छोड़ा जा सकेगा।
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जिले में करीब 10 दिनों में धान की कटाई पूरी हो जाएगी। इसके बाद किसान गेहूं की बोआई शुरू करेंगे लेकिन नहरों में पानी नहीं आने से खेतों की पलेवा नहीं हो पाएगा। किसान नेता चंदू तिवारी ने बताया कि फिलहाल बारिश के कारण थोड़ी नमी है।
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एक सप्ताह बाद किसानों को सिंचाई के लिए पानी की जरूरत पड़ेगी। नहर से पानी नहीं मिलने पर किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
दरअसल, जिले में जोगापुर पंप कैनाल, किशनपुर पंप कैनाल, निचली गंगा व रामगंगा कमांड की नहरों में पानी नहीं है। इन नहरों से ही जिले में सिंचाई की व्यवस्था होती है।
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नहीं हुई नहर की पटरियों की मरम्मत
सिंचाई विभाग केवल सिल्ट सफाई तक सीमित है। नहर की पटरियों की मरम्मत कई वर्ष से नहीं हुई। कई स्थानों पर गुलाबे (जिससे नहर का पानी सिंचाई के लिए नालियों में जाता है) जर्जर हो चुके हैं। हद तो यह है कि नालियां टूटी हैं। विभाग के पास इनकी मरम्मत के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।
भेलखा के किसान राम दयाल और दया शंकर आदि का कहना है कि नहर में जब भी पानी आता है। सैकड़ों बीघा खेत जलमग्न हो जाता है। बीते सालों से हर बार नहर की पटरी टूट रही है। हर साल बारिश के बाद विभाग केवल सफाई का दिखावा करता है। नहर की संरचना को दुरुस्त नहीं किया जाता। किसानों ने सफाई के साथ ही नहर की पटरी की मरम्मत भी कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि नहर में जल्द पानी छोड़ा जाए ताकि उनकी फसल प्रभावित न होने पाए।
आठ माह से रामगंगा नहर में नहीं आया पानी
तहसील क्षेत्र के उत्तरी भू-भाग की सिंचाई के लिए बनी रामगंगा नहर में पिछले आठ महीने से पानी नहीं छोड़ा गया है। ऐसे में किसानों को धान की फसल की सिंचाई में दिक्कत झेलनी पड़ती है। अब गेहूं की बोआई के समय भी पलेवा के लिए पानी नहीं मिलने से किसान परेशान हैं।
दरअसल, तहसील क्षेत्र के लगभग 70 फीसदी कृषि क्षेत्र की सिंचाई रामगंगा नहर और करारी माइनर से होती है। इन नहरों से अलीपुर जीता, कोरियों, गरई, पंइसा, रामपुर धमावां और गोरियों सहित दो दर्जन से अधिक रजबहे निकलते हैं।
किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिला अध्यक्ष नूरुल इस्लाम ने बताया कि रामगंगा नहर में आठ महीने से पानी नहीं छोड़ा गया है। इस कारण धान की फसल की सिंचाई में काफी दिक्कत हुई। अब गेहूं की बोआई के लिए भी खेत तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
किसान नेता अजय सोनी ने कहा कि करीब 50 किलोमीटर लंबी करारी माइनर में दो माह पहले पानी छोड़ा गया था। बड़ी नहर के अलावा रजबहों में पानी नहीं पहुंचा, जिससे हजारों किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं।
जीरो टिल सीड ड्रिल से बोआई लाभदायक : डॉ. मनोज
कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किसानों को सलाह दी कि धान की कटाई के बाद जीरो टिल सीड ड्रिल मशीन से गेहूं की बोआई करें। इस तकनीक में खेत की जुताई नहीं की जाती है। मशीन में बीज और खाद डालकर एक ही बार में सीधी बोआई की जाती है। यह विधि लागत, समय और मेहनत तीनों में बचत करने के साथ मिट्टी की नमी को बनाए रखती है। उन्होंने कहा कि बोआई से पहले खेत की जांच करें। यदि खेत में खरपतवार अधिक हो तो कटाई के सात से 10 दिन पहले ग्लाइफोसेट का छिड़काव करें।
बोले किसान
किसानों को जब पानी चाहिए तो पानी नहीं मिलता। खाद व बीज के लिए हर बार मारामारी होती है। नहर का पानी आता है लेकिन कब मिलेगा, इसकी जानकारी किसान को नहीं होती। जबकि यह किसान के लिए ही छोड़ा जाता है। - करन सिंह, सरपतही
-अभी धान कट रहा है। इसके बाद यदि खेत में नमी रही तो गेहूं की बोआई कर दी जाएगी। यदि नहीं रहेगी तो पलेवा के बाद फसल की बोआई होगी। विभाग 15 दिसंबर तक पानी देने की बात कर रहा है। इतने दिन किसान इंतजार नहीं कर सकता। - शैलेंद्र मिश्रा, पुनवार

- जिले में सभी नहरों की सफाई का काम किया जाना है। अभी कुछ नहरों में बारिश का पानी है। जैसे ही तली सूखती है। नहर की सफाई तेजी के साथ शुरू हो जाएगी। 15 दिसंबर के बाद ही नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। - सुमित सिंह, सहायक अभियंता सिंचाई विभाग

शैलेंद्र मिश्र, पुनवार

शैलेंद्र मिश्र, पुनवार

शैलेंद्र मिश्र, पुनवार

शैलेंद्र मिश्र, पुनवार

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