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रोडवेज बसों का किराया तो बढ़ा, पर सुविधाएं नहीं
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सिराथू। परिवहन निगम ने बसों का किराया तो बढ़ा दिया, लेकिन यात्री सुविधाओं को लेकर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए। सुविधाहीन पुरानी खटारा बसों में ही सफर करना यात्रियों की मजबूरी बन चुका है। निगम की अधिकांश बसें सीटें खस्ताहाल और शीशे टूटे हैं। नतीजतन आए दिन रोडवेज की बसें रास्ते में खराबी के चलते खड़ी हो जाती हैं। इससे यात्रियों को सफर तय करने के लिए दूसरी बसों का सहारा लेना पड़ता है। कई पुरानी बसों में सीटें भी खस्ताहाल हैं, तो कई में शीशे सही नहीं होने से सर्दी के मौसम में मुसाफिरों को रात में यात्रा करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोडवेज के बेड़े में शामिल बसों में से कई की हालत सुविधाजनक नहीं है। रोडवेज विभाग के किराया बढ़ा देने के बाद भी सुविधाएं नहीं दिए जाने से यात्रियों में रोष है। यात्रियों का कहना है जब रोडवेज किराया बढ़ाता है तो यात्रियों के लिए बसों में सुविधाएं भी बढ़ानी ही चाहिए। प्रयागराज से कौशाम्बी मार्ग पर परिवहन निगम की 150 बसों का संचालन करता है।
सिराथू के गुरू प्रसाद केशरवानी कहते हैं कि परिवहन निगम की बसों में सुविधा का घोर आभाव होता है। बस के अंदर गंदगी का अंबार लगा होता है। खिड़कियां खराब होने से बस चलने के दौरान सिर दर्द पैदा करती हैं। शीतला धाम के यात्री विश्वनाथ पंडा कहते हैं कि परिवहन निगम की शायद ही ऐसी कोई बस हो जिसके शीशे से डंड में हवा न आती हो। खिड़की की अधिकाश शीशे में लगाई जाने वाली रबर ही गायब रहती है, जिससे शीशा खडख़ड़ाने के साथ अंदर हवा भी आती है। कुछ सहूलियत लंबी रूट की ही बसों में देखने को मिलती है।
प्रयाबराज डिपो से कितना बढ़ा किराया--
मार्ग पुराना किराया नया किराया
सैनी से प्रयागराज 64 रुपया 70 रुपया
सैनी से फतेहपुर 90 रुपया 98 रुपया
सैनी से कानपुर 215 रुपया 235 रुपया
इनका कहना है
मार्ग पर भेजने से पहले रोडवेज की बसों का नियमित रूप से परीक्षण होता है। कोहरे को देखते हुए फॉग लाइट लगवाई गई हैं। हम अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं। रहा सवाल ढाबों पर रोकने का तो इसकी जांच कर आरोपी चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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रामसागर पांडेय, एआरएम
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सिराथू के गुरू प्रसाद केशरवानी कहते हैं कि परिवहन निगम की बसों में सुविधा का घोर आभाव होता है। बस के अंदर गंदगी का अंबार लगा होता है। खिड़कियां खराब होने से बस चलने के दौरान सिर दर्द पैदा करती हैं। शीतला धाम के यात्री विश्वनाथ पंडा कहते हैं कि परिवहन निगम की शायद ही ऐसी कोई बस हो जिसके शीशे से डंड में हवा न आती हो। खिड़की की अधिकाश शीशे में लगाई जाने वाली रबर ही गायब रहती है, जिससे शीशा खडख़ड़ाने के साथ अंदर हवा भी आती है। कुछ सहूलियत लंबी रूट की ही बसों में देखने को मिलती है।
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प्रयाबराज डिपो से कितना बढ़ा किराया--
मार्ग पुराना किराया नया किराया
सैनी से प्रयागराज 64 रुपया 70 रुपया
सैनी से फतेहपुर 90 रुपया 98 रुपया
सैनी से कानपुर 215 रुपया 235 रुपया
इनका कहना है
मार्ग पर भेजने से पहले रोडवेज की बसों का नियमित रूप से परीक्षण होता है। कोहरे को देखते हुए फॉग लाइट लगवाई गई हैं। हम अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं। रहा सवाल ढाबों पर रोकने का तो इसकी जांच कर आरोपी चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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रामसागर पांडेय, एआरएम