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दबिश को पहुंची पुलिस देख ग्रामीण की मौत
Wed, 20 Feb 2019 12:31 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Wed, 20 Feb 2019 12:31 AM IST
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कौशाम्बी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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सरायअकिल (कौशाम्बी)। सुरसेनी गांव के पूर्व प्रधान मनोज द्विवेदी पर कातिलाना हमला करने वालों को पकड़ने गई पुलिस को देख एक ग्रामीण की हार्ट अटैक से मौत हो गई। हमले के बाद पुलिस ने मृतक के दो भतीजों को हिरासत में लिया था।
सरायअकिल कोतवाली के सुरसेनी गांव शनिवार को पूर्व प्रधान मनोज पर कातिलाना हमला हुआ था। हमले में गांव की प्रधान मीना देवी के पति ज्ञानेंद्र शुक्ला उर्फ कमीशन सहित 11 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। घटना के बाद से सभी आरोपी फरार हैं। घटना वाले दिन मौके पर पहुंचे पुलिस ने हनुमान प्रसाद द्विवेदी के भतीजे राम कुमार व अभिमन्यु को हिरासत में लिया था। राम कुमार रेलवे कर्मी हैं और उनकी तैनाती भोपाल में हैं। 14 फरवरी को रामकुमार की बेटी की सगाई इमली गांव में हुई है। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राम कुमार आए थे। 16 फरवरी को ही उन्हें वापस जाना था लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
मंगलवार को सरायअकिल पुलिस फिर से सुरसेनी पहुंची और ज्ञानेंद्र के घर का ताला तोड़कर कार को बाहर निकाला। घटना में नामजद आरोपी के समर्थक काशी प्रसाद के यहां पर भी पुलिस ने गाली-गलौज की। यह सब देख हनुमान प्रसाद (55) पुत्र रामकृपाल के सीने में पुलिस के सामने ही दर्द हुआ और चंद में मिनट में उनकी जान चली गई। घटना को लेकर पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन फोर्स गांव से वापस लौट आई। हनुमान प्रसाद के दो बेटे देवाकांत और रामभजन प्रयागराज में प्राइवेट नौकरी करते हैं। घटना की जानकारी पर वह लोग गांव के लिए चल पड़े हैं।
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सरायअकिल कोतवाली के सुरसेनी गांव शनिवार को पूर्व प्रधान मनोज पर कातिलाना हमला हुआ था। हमले में गांव की प्रधान मीना देवी के पति ज्ञानेंद्र शुक्ला उर्फ कमीशन सहित 11 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। घटना के बाद से सभी आरोपी फरार हैं। घटना वाले दिन मौके पर पहुंचे पुलिस ने हनुमान प्रसाद द्विवेदी के भतीजे राम कुमार व अभिमन्यु को हिरासत में लिया था। राम कुमार रेलवे कर्मी हैं और उनकी तैनाती भोपाल में हैं। 14 फरवरी को रामकुमार की बेटी की सगाई इमली गांव में हुई है। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राम कुमार आए थे। 16 फरवरी को ही उन्हें वापस जाना था लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
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मंगलवार को सरायअकिल पुलिस फिर से सुरसेनी पहुंची और ज्ञानेंद्र के घर का ताला तोड़कर कार को बाहर निकाला। घटना में नामजद आरोपी के समर्थक काशी प्रसाद के यहां पर भी पुलिस ने गाली-गलौज की। यह सब देख हनुमान प्रसाद (55) पुत्र रामकृपाल के सीने में पुलिस के सामने ही दर्द हुआ और चंद में मिनट में उनकी जान चली गई। घटना को लेकर पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन फोर्स गांव से वापस लौट आई। हनुमान प्रसाद के दो बेटे देवाकांत और रामभजन प्रयागराज में प्राइवेट नौकरी करते हैं। घटना की जानकारी पर वह लोग गांव के लिए चल पड़े हैं।
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