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सूख गए तालाब, मवेशियों को पेयजल का संकट
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धारुपुर गांव का सूखा मुख्य तालाब
- फोटो : KAUSHAMBI
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गर्मी और चिलचिलाती धूप के साथ ही अप्रैल माह में मौसम के तापमान का स्तर 42 डिग्री पर पहुंच गया है। जिससे गांवों की आबादी से दूर बने कम गहराई वाले तालाब पोखरे सूखने लगे हैं। नेवादा ब्लॉक के कई गांवों के तालाब पूरी तरह से सूख गए हैं और उनमें से धूल उड़ने लगी है। ऐसे में गांवों के पालतू व छुट्टा मवेशियों के साथ ही पशु पक्षियों को पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन की ओर से भी अब तक सूखे तालाबों को भरवाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
नेवादा ब्लाक में कुल 74 ग्राम पंचायतें हैं। हर ग्राम पंचायतों में औसतन चार से पांच तालाब हैं। कुछ तालाब आबादी में बने हैं तो कुछ आबादी से दूर। गांवों के अधिकतर आबादी वाले तालाब घरों व नाली का पानी बहने से दूषित है। अधिकतर ग्रामीण आबादी से दूर बने तालाबों से ही अपने मवेशियों को पानी पिलाते व नहलाते है। छुट्टा मवेशियों के साथ ही पक्षु- पक्षी भी इन्हीं तालाबों के पानी पर निर्भर हैं।
कुछ ग्राम पंचायतों में बने तालाबों का मनरेगा के तहत जीर्णोद्धार भी कराया गया, तो कुछ नए तालाब भी बनवाए गए हैं, लेकिन गर्मी के शुरुआती दौर में ही अधिकतर तालाबों का पानी सूख गया है। तालाबों के सूखने से मवेशियों और पक्षियों के पीने के पानी का संकट अभी से गहराने लगा है। प्रशासन की ओर से भी अब तक इन सूखे तालाबों में पानी भरवाने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। अगर सूख चुके तालाबों में जल्द ही पानी नहीं भरवाया गया तो इस गर्मी में मवेशियों के साथ ही पशु-पक्षियों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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अभी तक आचार संहिता लागू थी, अधिकारियों के यहां से भी सूखे तालाबों में पानी भरवाने का कोई आदेश नहीं आया। जल्द ही नलकूपों आदि से सूखे तालाबों में पर्याप्त मात्रा में पानी भरवाया जायेगा ताकि मवेशियों के साथ ही पशु पक्षियों को पीने के पानी का संकट न हो सके। बृजेश नारायण तिवारी बीडीओ, नेवादा।
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नेवादा ब्लाक में कुल 74 ग्राम पंचायतें हैं। हर ग्राम पंचायतों में औसतन चार से पांच तालाब हैं। कुछ तालाब आबादी में बने हैं तो कुछ आबादी से दूर। गांवों के अधिकतर आबादी वाले तालाब घरों व नाली का पानी बहने से दूषित है। अधिकतर ग्रामीण आबादी से दूर बने तालाबों से ही अपने मवेशियों को पानी पिलाते व नहलाते है। छुट्टा मवेशियों के साथ ही पक्षु- पक्षी भी इन्हीं तालाबों के पानी पर निर्भर हैं।
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कुछ ग्राम पंचायतों में बने तालाबों का मनरेगा के तहत जीर्णोद्धार भी कराया गया, तो कुछ नए तालाब भी बनवाए गए हैं, लेकिन गर्मी के शुरुआती दौर में ही अधिकतर तालाबों का पानी सूख गया है। तालाबों के सूखने से मवेशियों और पक्षियों के पीने के पानी का संकट अभी से गहराने लगा है। प्रशासन की ओर से भी अब तक इन सूखे तालाबों में पानी भरवाने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। अगर सूख चुके तालाबों में जल्द ही पानी नहीं भरवाया गया तो इस गर्मी में मवेशियों के साथ ही पशु-पक्षियों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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अभी तक आचार संहिता लागू थी, अधिकारियों के यहां से भी सूखे तालाबों में पानी भरवाने का कोई आदेश नहीं आया। जल्द ही नलकूपों आदि से सूखे तालाबों में पर्याप्त मात्रा में पानी भरवाया जायेगा ताकि मवेशियों के साथ ही पशु पक्षियों को पीने के पानी का संकट न हो सके। बृजेश नारायण तिवारी बीडीओ, नेवादा।