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शरीर तोड़ रहा मलेरिया और टायफाइड
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 02 Aug 2017 02:09 AM IST
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Kaushambi
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डायरिया पर अब मलेरिया और टायफाइड भारी पड़ने लगा है। वायरल फीवर का कहर घर-घर है। बुखार के साथ बदन दर्द ने जीना मुश्किल कर लिया है। मंगलवार को जिला अस्पताल में एक हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे। अधिकांश लोग बुखार से परेशान थे। सबकी जांच करवाई गई। पैथालॉजी में जांच के लिए मरीजों के बीच मारामारी रही। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को हुई।
जिला अस्पताल में मंगलवार को एक हजार से ज्यादा मरीज इलाज कराने आए। पहले पर्चा बनवाने के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए। फिजीशियन के पास सबसे ज्यादा मरीज गए। अधिकांश मरीज वायरल फीवर के रहे। टायफाइड के भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। बुखार के जितने भी मरीज आए, सबकी जांच करवाई गई। खून जांच के लिए मरीज भेजे जाने लगे तो पैथालॉजी के बाहर भीड़ लग गई। वहां काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए धक्कामुक्की तक हुई। पैथालॉजी में मरीजों की लाइन लंबी हुई तो अधिकांश लोगों ने अपनी जांच निजी पैथालॉजी में कराना उचित समझा। जिला अस्पताल की सभी ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। वायरल बुखार की वजह से सबसे ज्यादा परेशान बच्चे दिखे। वे सुस्त बैठे रहे। सिर व बदन दर्द उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
यही हाल मलेरिया टायफाइड के मरीजों का रहा। हालांकि भीड़ ज्यादा होने के कारण दूर दराज से आए मरीजों को तमाम दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। निजी पैथालॉजी के आंकड़े बताते हैं कि एक हफ्ते के भीतर करीब चार सौ लोगों की मलेरिया जांच हुई। इनमें 18 लोगों में मलेरिया पॉजीटिव आया। वहीं करीब 700 मरीजों ने टायफाइड की आशंका में जांच करवाई। इनमें करीब सवा दो सौ लोगों में टायफाइड पाजीटिव रहा। जिला अस्पताल में एक हफ्ते के भीतर टायफाइड के 21 व मलेरिया के दो मरीज पॉजीटिव मिले हैं।
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पर्चा गुम होने पर किया हंगामा
जिला अस्पताल में फिजिशयन कक्ष के बाहर मंगलवार को मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। चतुर्थ श्रेणी कर्मी सभी मरीजों का पर्चा इकट्ठा करके एक-एक मरीज को डॉक्टर के पास बुला रहा था। इसी दौरान करारी से आए रामसेवक का पर्चा गुम हो गया। उसका नंबर काफी देर तक नहीं आया तो उसने कर्मचारी से पूछताछ की। उसने ढेर में उसका पर्चा ढूंढना शुरू किया लेकिन नहीं मिला तो मरीज ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। किसी तरह दूसरा पर्चा बनवाकर उसको अंदर भेजा गया।
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जिला अस्पताल में मंगलवार को एक हजार से ज्यादा मरीज इलाज कराने आए। पहले पर्चा बनवाने के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए। फिजीशियन के पास सबसे ज्यादा मरीज गए। अधिकांश मरीज वायरल फीवर के रहे। टायफाइड के भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। बुखार के जितने भी मरीज आए, सबकी जांच करवाई गई। खून जांच के लिए मरीज भेजे जाने लगे तो पैथालॉजी के बाहर भीड़ लग गई। वहां काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए धक्कामुक्की तक हुई। पैथालॉजी में मरीजों की लाइन लंबी हुई तो अधिकांश लोगों ने अपनी जांच निजी पैथालॉजी में कराना उचित समझा। जिला अस्पताल की सभी ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। वायरल बुखार की वजह से सबसे ज्यादा परेशान बच्चे दिखे। वे सुस्त बैठे रहे। सिर व बदन दर्द उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
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यही हाल मलेरिया टायफाइड के मरीजों का रहा। हालांकि भीड़ ज्यादा होने के कारण दूर दराज से आए मरीजों को तमाम दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। निजी पैथालॉजी के आंकड़े बताते हैं कि एक हफ्ते के भीतर करीब चार सौ लोगों की मलेरिया जांच हुई। इनमें 18 लोगों में मलेरिया पॉजीटिव आया। वहीं करीब 700 मरीजों ने टायफाइड की आशंका में जांच करवाई। इनमें करीब सवा दो सौ लोगों में टायफाइड पाजीटिव रहा। जिला अस्पताल में एक हफ्ते के भीतर टायफाइड के 21 व मलेरिया के दो मरीज पॉजीटिव मिले हैं।
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पर्चा गुम होने पर किया हंगामा
जिला अस्पताल में फिजिशयन कक्ष के बाहर मंगलवार को मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। चतुर्थ श्रेणी कर्मी सभी मरीजों का पर्चा इकट्ठा करके एक-एक मरीज को डॉक्टर के पास बुला रहा था। इसी दौरान करारी से आए रामसेवक का पर्चा गुम हो गया। उसका नंबर काफी देर तक नहीं आया तो उसने कर्मचारी से पूछताछ की। उसने ढेर में उसका पर्चा ढूंढना शुरू किया लेकिन नहीं मिला तो मरीज ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। किसी तरह दूसरा पर्चा बनवाकर उसको अंदर भेजा गया।