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नींद से जागा प्रशासन, धर्मेंद्र का होगा इलाज
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 31 Mar 2017 12:14 AM IST
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कौशाम्बी
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चायल तहसील के दुर्गापुर गांव में दोनों गुर्दा खराब होने के बाद जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे धर्मेंद्र पांडेय को नया जीवन मिल सकता है। बेटे को बचाने के लिए मां ने सीएम योगी व सांसद विनोद सोनकर से गुहार लगाई थी, लेकिन कोई पहल नहीं हुई। अमर उजाला ने गुरुवार के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो जिला प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम ने बीमार के परिजनों को कलक्ट्रेट बुलवाया है। शुक्रवार को वह डीएम से मिलकर इलाज का स्टीमेट देंगे। प्रशासन ने धर्मेंद्र का इलाज कराने की तैयारी तेज कर दी है।
दुर्गापुर निवासी धर्मेंद्र पांडेय की लगभग एक साल से तबियत खराब है। वह पीएचसी नेवादा में अपना इलाज करा रहा था। आठ माह पहले हालत बिगड़ी तो उसे एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। जांच के बाद पता चला कि धर्मेंद्र की दोनों किडनी खराब हो चुकी है। धर्मेंद्र को एसआरएन से राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ रेफर कर दिया गया। मां माधुरी देवी व भाई महेंद्र पांडेय उसे ले गए। वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने सलाह दी कि धर्मेंद्र की किडनी का प्रत्यारोपण होगा, तभी उसकी जान बचेगी। एक किडनी के साथ आठ लाख रुपये नगद चाहिए। रकम सुनते ही मां व भाई के होश उड़ गए। वह धर्मेंद्र को लेकर वापस चले आए।
25 मार्च को माधुरी पांडेय ने सीएम योगी व सांसद विनोद सोनकर समेत अधिकारियों को रजिस्ट्री भेजकर बेटे का इलाज कराने की गुहार लगाई थी। रजिस्ट्री मिलने के बाद भी इस मामले में कोई पहल किसी भी स्तर से नहीं हुई। न जनप्रतिनिधियों ने सुध ली, न ही अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। गुुरुवार को इस पीड़ित परिवार का दर्द अमर उजाला ने अपने अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया तो प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। डीएम अखंड प्रताप सिंह ने पीड़ित परिवार की जानकारी जुटाई। इसके बाद बीमार के परिजनों को कलक्ट्रेट बुलवाने का संदेश भिजवाया। शुक्रवार को डीएम से धर्मेंद्र की मां व भाई मिलेंगे और अब तक हुए इलाज का ब्यौरा देंगे साथ ही इलाज के खर्च का स्टीमेट। डीएम ने बीमार का इलाज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में अधिकारियों से उन्होंने बातचीत भी की है।
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समाजसेवियों ने बनाई दूरी
जनपद में सवा सौ स्वयंसेवी संस्थाएं काम कर रही हैं। इनमें एक दर्जन ऐसी संस्थाएं हैं, जो लगातार राज्य व केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट का लाभ उठा रही हैं। यह संस्थाएं बहुत करने का दावा करती हैं, लेकिन धर्मेंद्र का हाल जानने की इनके पास फुर्सत नहीं है। समाजसेवी भी गायब हैं। चुनाव तक सक्रिय रहे समाजसेवी भी इस मामले में एकदम से खामोश हो गए हैं। इससे पीड़ित परिवार निराश है।
सांसद ने भी किया इलाज कराने का वादा
सांसद विनोद सोनकर का कहना है कि पीड़ित परिवार की रजिस्ट्री अभी नहीं मिली है। सदन चल रहा है, वह दिल्ली में हैं। शनिवार को वह जिला मुख्यालय में स्थित मुख्यालय में रहेंगे। इस संबंध में वह डीएम से भी बातचीत करेंगे। साथ ही पीड़ित परिवार से मिलेंगे। बीमार धर्मेंद्र का इलाज कराने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। ऐसे रोगियों के इलाज के लिए भाजपा सरकार गंभीर है।
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दुर्गापुर निवासी धर्मेंद्र पांडेय की लगभग एक साल से तबियत खराब है। वह पीएचसी नेवादा में अपना इलाज करा रहा था। आठ माह पहले हालत बिगड़ी तो उसे एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। जांच के बाद पता चला कि धर्मेंद्र की दोनों किडनी खराब हो चुकी है। धर्मेंद्र को एसआरएन से राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ रेफर कर दिया गया। मां माधुरी देवी व भाई महेंद्र पांडेय उसे ले गए। वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने सलाह दी कि धर्मेंद्र की किडनी का प्रत्यारोपण होगा, तभी उसकी जान बचेगी। एक किडनी के साथ आठ लाख रुपये नगद चाहिए। रकम सुनते ही मां व भाई के होश उड़ गए। वह धर्मेंद्र को लेकर वापस चले आए।
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25 मार्च को माधुरी पांडेय ने सीएम योगी व सांसद विनोद सोनकर समेत अधिकारियों को रजिस्ट्री भेजकर बेटे का इलाज कराने की गुहार लगाई थी। रजिस्ट्री मिलने के बाद भी इस मामले में कोई पहल किसी भी स्तर से नहीं हुई। न जनप्रतिनिधियों ने सुध ली, न ही अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। गुुरुवार को इस पीड़ित परिवार का दर्द अमर उजाला ने अपने अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया तो प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। डीएम अखंड प्रताप सिंह ने पीड़ित परिवार की जानकारी जुटाई। इसके बाद बीमार के परिजनों को कलक्ट्रेट बुलवाने का संदेश भिजवाया। शुक्रवार को डीएम से धर्मेंद्र की मां व भाई मिलेंगे और अब तक हुए इलाज का ब्यौरा देंगे साथ ही इलाज के खर्च का स्टीमेट। डीएम ने बीमार का इलाज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में अधिकारियों से उन्होंने बातचीत भी की है।
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समाजसेवियों ने बनाई दूरी
जनपद में सवा सौ स्वयंसेवी संस्थाएं काम कर रही हैं। इनमें एक दर्जन ऐसी संस्थाएं हैं, जो लगातार राज्य व केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट का लाभ उठा रही हैं। यह संस्थाएं बहुत करने का दावा करती हैं, लेकिन धर्मेंद्र का हाल जानने की इनके पास फुर्सत नहीं है। समाजसेवी भी गायब हैं। चुनाव तक सक्रिय रहे समाजसेवी भी इस मामले में एकदम से खामोश हो गए हैं। इससे पीड़ित परिवार निराश है।
सांसद ने भी किया इलाज कराने का वादा
सांसद विनोद सोनकर का कहना है कि पीड़ित परिवार की रजिस्ट्री अभी नहीं मिली है। सदन चल रहा है, वह दिल्ली में हैं। शनिवार को वह जिला मुख्यालय में स्थित मुख्यालय में रहेंगे। इस संबंध में वह डीएम से भी बातचीत करेंगे। साथ ही पीड़ित परिवार से मिलेंगे। बीमार धर्मेंद्र का इलाज कराने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। ऐसे रोगियों के इलाज के लिए भाजपा सरकार गंभीर है।