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74 हजार मजदूरों की फीकी रहेगी दीपावली
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 16 Oct 2017 01:40 AM IST
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मनरेगा मजदूरों की दीपावली इस बार फीकी रहेगी। जॉबकार्ड धारक मजदूर काम की तलाश में भटकते रहे पर ग्रामसभाओं में उन्हें रोजगार नहीं मिल सका। जिन मजदूरों को काम मिला भी था उनका भुगतान खाते में नहीं पहुंच सका है। रुपयों के अभाव में जॉब कार्डधारकों को दो जून की रोटी जुटाने के लिए कठिनाई का सामना करना पड़ रह है। ऐसे में उनके घरों की दीपावली इस साल फीकी रहेगी।
जिले में जॉब कार्डधारक मजदूरों की संख्या एक लाख 74 हजार 405 दर्ज है। इनमें से 78 हजार 236 मजदूर सक्रिय बताए जा रहे हैं। इन मजदूरों को जुलाई माह से ग्राम सभाओं में मनरेगा के तहत रोजगार नहीं मिल सका। विभागीय आंकड़ों पर जाएं तो बारिश शुरू होने के बाद से लेकर अब तक महज 4672 मजदूरों को ग्रामसभाओं में कुछ दिन का रोजगार मिल सका है। बाकी मजदूर चार महीने से काम के इंतजार में घर बैठे हैं। ऐसे में इनका दीपावली का त्योहार फीका रहेगा। इनके पास न तो घर रोशन करने का जुगाड़ है और न ही बच्चों को मिठाई खिलाने की कोई अन्य व्यवस्था है।
काम के बाद भी नहीं मिला दाम
योजना के तहत मजदूरी करने वाले चार हजार मजदूर ऐसे हैं जिनसे काम तो करा लिया गया पर महीनों गुजरने के बावजूद इनके खाते में मजदूरी की रकम नहीं ट्रांसफार्मर की गई। काम का दाम नहीं मिलने के कारण त्योहार में इन मजदूरों के भी जेब खाली हैं।
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बड़ी संख्या में पलायन कर गए मजदूर
काम के अभाव में हजारों की संख्या में दोआबा के मजदूर जिले से पलायन कर चुके हैं। यह मजदूर काम की तलाश में दिल्ली, मुंबई, लुधियाना, पंजाब समेत देश के बड़े महानगरों में रहकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं। इसके विपरीत तमाम मजदूर ऐसे भी हैं जो किन्हीं कारणों से परदेश में रहकर कमाने में अक्षम हैं। उनका भी त्योहार फीका रहने के उम्मीद है।
बालू के चलते गांवों में ठप था निर्माण कार्य
तीन महीने तक बालू निकासी ठप होने के कारण मनरेगा के साथ ही निजी भवनों का भी निर्माण ठप था। ऐसे में मजदूरों के सामने इधर-उधर भटकने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। मजबूर होकर लोगों को शहरों की ओर जाना पड़ रहा है।
मनरेगा के तहत मजदूरों को काम दिलाने की पूरी कोशिश रहती है। बारिश के दौरान तालाबों में पानी भर जाने से काम कराने में कठिनाई आती है। अब बारिश खत्म हो गई है। डीसी मनरेगा को तेजी लाने के निर्देश दिए जाएंगे।
डीके दोहरे, प्रभारी सीडीओ
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जिले में जॉब कार्डधारक मजदूरों की संख्या एक लाख 74 हजार 405 दर्ज है। इनमें से 78 हजार 236 मजदूर सक्रिय बताए जा रहे हैं। इन मजदूरों को जुलाई माह से ग्राम सभाओं में मनरेगा के तहत रोजगार नहीं मिल सका। विभागीय आंकड़ों पर जाएं तो बारिश शुरू होने के बाद से लेकर अब तक महज 4672 मजदूरों को ग्रामसभाओं में कुछ दिन का रोजगार मिल सका है। बाकी मजदूर चार महीने से काम के इंतजार में घर बैठे हैं। ऐसे में इनका दीपावली का त्योहार फीका रहेगा। इनके पास न तो घर रोशन करने का जुगाड़ है और न ही बच्चों को मिठाई खिलाने की कोई अन्य व्यवस्था है।
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काम के बाद भी नहीं मिला दाम
योजना के तहत मजदूरी करने वाले चार हजार मजदूर ऐसे हैं जिनसे काम तो करा लिया गया पर महीनों गुजरने के बावजूद इनके खाते में मजदूरी की रकम नहीं ट्रांसफार्मर की गई। काम का दाम नहीं मिलने के कारण त्योहार में इन मजदूरों के भी जेब खाली हैं।
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बड़ी संख्या में पलायन कर गए मजदूर
काम के अभाव में हजारों की संख्या में दोआबा के मजदूर जिले से पलायन कर चुके हैं। यह मजदूर काम की तलाश में दिल्ली, मुंबई, लुधियाना, पंजाब समेत देश के बड़े महानगरों में रहकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं। इसके विपरीत तमाम मजदूर ऐसे भी हैं जो किन्हीं कारणों से परदेश में रहकर कमाने में अक्षम हैं। उनका भी त्योहार फीका रहने के उम्मीद है।
बालू के चलते गांवों में ठप था निर्माण कार्य
तीन महीने तक बालू निकासी ठप होने के कारण मनरेगा के साथ ही निजी भवनों का भी निर्माण ठप था। ऐसे में मजदूरों के सामने इधर-उधर भटकने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। मजबूर होकर लोगों को शहरों की ओर जाना पड़ रहा है।
मनरेगा के तहत मजदूरों को काम दिलाने की पूरी कोशिश रहती है। बारिश के दौरान तालाबों में पानी भर जाने से काम कराने में कठिनाई आती है। अब बारिश खत्म हो गई है। डीसी मनरेगा को तेजी लाने के निर्देश दिए जाएंगे।
डीके दोहरे, प्रभारी सीडीओ