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मौत की डगर बना है स्कूल जाने का रास्ता
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Fri, 01 May 2015 01:58 AM IST
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महेवाघाट (कौशाम्बी)। प्राथमिक स्कूल निगहा जाने के रास्ते में नहर पर बनी पुलिया महीने भर से टूटी है। इससे बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है। लकड़ी का पटरा रखकर बच्चे नहर पार करते हैं। अफसरों और पंचायत प्रतिनिधियों की यह अनदेखी किसी भी रोज नौनिहालों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। प्रधानाध्यापक का कहना है कि उन्होंने विभागीय और जिला पंचायत के अधिकारियों को सूचना दे दी है। मगर पुलिया का निर्माण नहीं कराया जा रहा है।
सरसवां ब्लॅाक क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल निगहा में करीब 150 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। शाहपुर माइनर के बगल स्थित स्कूल में जाने के लिए नहर में पुलिया का निर्माण हुआ था। इसी पुलिया से होकर शिक्षक-शिक्षिकाएं और बच्चे स्कूल आते-जाते थे। यह पुलिया करीब महीने भर से टूटी पड़ी है। इससे लोगों का स्कूल पहुंचना मुश्किल है। बड़े बच्चे तो किसी तरह कूदकर उस पार निकल जाते हैं मगर छोटे बच्चों को शिक्षक लकड़ी का पटरा रखकर माइनर पार कराते हैं। हालांकि कूदकर माइनर पार करना भी कम खतरनाक नहीं है।
छात्र-छात्राओं के स्कूल पहुंचने की यह कोशिश किसी भी रोज जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसको लेकर गांववालों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रधान, हेडमास्टर से शिकायत करके माइनर की ध्वस्त पुलिया का पुनर्निर्माण कराने की मांग की गई। आरोप है कि कोई भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि शायद अफसरों और जनप्रतिनिधियों को यहां किसी हादसे का इंतजार है। इसके बाद भी माइनर पर पुलिया का निर्माण कराया जाएगा। मामले में स्कूल के हेडमास्टर हरिमोहन सिंह ने बताया कि उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी के अलावा जिला पंचायत के अधिशासी अधिकारी को भी लिखापढ़ी की है। प्रधान को भी लाकर टूटी पुलिया दिखा दी गई है। इसके बाद भी इस ओर किसी भी तरह की गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
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सरसवां ब्लॅाक क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल निगहा में करीब 150 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। शाहपुर माइनर के बगल स्थित स्कूल में जाने के लिए नहर में पुलिया का निर्माण हुआ था। इसी पुलिया से होकर शिक्षक-शिक्षिकाएं और बच्चे स्कूल आते-जाते थे। यह पुलिया करीब महीने भर से टूटी पड़ी है। इससे लोगों का स्कूल पहुंचना मुश्किल है। बड़े बच्चे तो किसी तरह कूदकर उस पार निकल जाते हैं मगर छोटे बच्चों को शिक्षक लकड़ी का पटरा रखकर माइनर पार कराते हैं। हालांकि कूदकर माइनर पार करना भी कम खतरनाक नहीं है।
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छात्र-छात्राओं के स्कूल पहुंचने की यह कोशिश किसी भी रोज जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसको लेकर गांववालों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रधान, हेडमास्टर से शिकायत करके माइनर की ध्वस्त पुलिया का पुनर्निर्माण कराने की मांग की गई। आरोप है कि कोई भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि शायद अफसरों और जनप्रतिनिधियों को यहां किसी हादसे का इंतजार है। इसके बाद भी माइनर पर पुलिया का निर्माण कराया जाएगा। मामले में स्कूल के हेडमास्टर हरिमोहन सिंह ने बताया कि उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी के अलावा जिला पंचायत के अधिशासी अधिकारी को भी लिखापढ़ी की है। प्रधान को भी लाकर टूटी पुलिया दिखा दी गई है। इसके बाद भी इस ओर किसी भी तरह की गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
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