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सरवा काजी में डेंगू के डंक से शिक्षक की मौत, सौ से अधिक बीमार
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death of a teacher by fever can be by the dengue
- फोटो : KAUSHAMBI
सरवा काजी में बुखार से शिक्षक की मौत, डेंगू की आशंका, सौ से अधिक बीमार
पखवाड़े भर से गांव में फैली बीमारी, कई घरों में पूरा कुनबा पीड़ित
अलग-अलग स्पतालों में करा रहे इलाज, बीमारी से ग्रामीणों में दहशत
इमामगंज। मूरतगंज ब्लॉक के सरवा काजी गांव में बुखार से शुक्रवार की रात एक प्राइवेट शिक्षक की मौत हो गई। इसमें डेंगू की आशंका जताई जा रही है। तकरीबन सौ से अधिक लोग बीमारी की जद में हैं। कई घर ऐसे हैं जिनका पूरा कुनबा बीमार है। सभी का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज कराया जा रहा है। घर-घर फैली बीमारी को लेकर ग्रामीणों में दहशत है।
सरवा काजी गांव भीखमपुर का मजरा है। करीब एक हजार की आबादी वाले गांव में पखवाड़े भर पहले बीमारी ने दस्तक दिया। गांव के बच्चा लाल की 12 वर्षीय बेटी रूबी को अचानक बुखार आया। तीन-चार दिन तक स्थानीय झोलाछापों से इलाज के बाद भी उसे कोई आराम नहीं मिला। 17 अक्तूबर को घर पर ही उसकी मौत हो गई थी। परिजनों के मुताबिक स्थानीय डॉक्टरों ने रुबी को डेंगू पीड़ित बताया था। इसके बाद तो बीमारी ने ऐसा पैर पसारा कि एक-एक कर बस्ती का हर घर का कोई न कोई सदस्य बुखार की चपेट में आ गया। इन्हीं में शिवबचन का बेटा नीरज (22) भी शामिल था। मूरतगंज के एक निजी स्कूल में शिक्षक रहे नीरज को हफ्ते भर पहले बुखार आया। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज के बाद भी आराम नहीं मिला तो 31 अक्तूबर को परिजनों ने उसे प्रयागराज के एसआरएन में भर्ती करा दिया था। शुक्रवार को आधी रात के बाद इलाज के दौरान नीरज की एसआरएन में ही मौत हो गई। इस वक्त गांव में शायद ही ऐसा कोई घर बचा हो जहां कोई न कोई सदस्य बीमारी से पीड़ित न हो। गांव के अरविंद, संजय, लालचंद्र, महेष चंद्र, सुरेश चंद्र, आनंदी समेत आधा दर्जन परिवार ऐसे हैं जिनका पूरा कुनबा बुखार से पीड़ित है। इनके अलावा लीलावती, मुकेश, सुरेश, गुडिय़ा, प्रभात, रामचंद्र, सरिता, शीला, निशा,कन्हई, सुग्गी देवी, लक्ष्मी देवी, रेनू, प्रभात, दीपशिाखा समेत करीब सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। सभी को अलग-अलग अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर दो दिन में लिए खून के 162 नमूने
इमामगंज। सरवा काजी गांव में डेंगू के डंक से हुई मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे की नींद टूटी। विभाग ने गांव में शिविर लगाया और मच्छरोधी दवाओं का छिड़काव कराया। साथ ही ग्रामीणों को बीमारी से बचाव के तरीके बताए।
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सरवा काजी में डेंगू का कहर पखवाड़े भर पहले शुरू हो गया था। गांव में एक-एक कर हर घर के सदस्य बीमारी की जद में आते रहे। इलाज के लिए लोग इधर-उधर झोलाछाप की शरण में भटकते रहे। पर, स्वास्थ्य महकमा बेखबर रहा। जबकि गांव से महज पांच-छह किमी की दूरी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मूरतगंज है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की आशा बहू और एएनएम को जानकारी दी गई थी। पर, कोई नहीं पहुंचा। सीएमओ डॉ पीएन चतुर्वेदी का कहना है कि शुक्रवार को जानकारी मिलने के बाद पीएचसी मूरतगंज के डॉक्टरों की टीम भेजी गई थी। डॉ आदित्य रावत के नेतूृत्व में पहुंची टीम ने गांव में शिविर लगाकर लोगों के खून के नमूने लिए और दवाएं दी। पहले दिन 78 और दूसरे दिन शनिवार को 84 समेत कुल 162 लोगों के खून की स्लाइड ली गई। शुक्रवार को लिए गए नमूनों की जांच में सभी 78 मरीजों को वायरल फीवर से पीड़ित पाया गया। पीएचसी मूरतगंज के एमओआईसी डॉ सुनील सिंह ने बताया कि गांव में मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव कराने के साथ ही ग्रामीणों को बीमारी से बचाव के तरीके भी बताए जा रहे हैं।
एसआरएन की रिपोर्ट आने से पहले सरवा काजी गांव के नीरज की मौत के मामले में अधिकृत तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि वह डेंगू पीड़ित था। गांव में बीमारी फैलने की सूचना पर सूचना पर लगातार दो दिन से टीम भेजकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर इलाज कराया जा रहा है।
डॉ. पीएन चतुर्वेदी-सीएमओ
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पखवाड़े भर से गांव में फैली बीमारी, कई घरों में पूरा कुनबा पीड़ित
अलग-अलग स्पतालों में करा रहे इलाज, बीमारी से ग्रामीणों में दहशत
इमामगंज। मूरतगंज ब्लॉक के सरवा काजी गांव में बुखार से शुक्रवार की रात एक प्राइवेट शिक्षक की मौत हो गई। इसमें डेंगू की आशंका जताई जा रही है। तकरीबन सौ से अधिक लोग बीमारी की जद में हैं। कई घर ऐसे हैं जिनका पूरा कुनबा बीमार है। सभी का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज कराया जा रहा है। घर-घर फैली बीमारी को लेकर ग्रामीणों में दहशत है।
सरवा काजी गांव भीखमपुर का मजरा है। करीब एक हजार की आबादी वाले गांव में पखवाड़े भर पहले बीमारी ने दस्तक दिया। गांव के बच्चा लाल की 12 वर्षीय बेटी रूबी को अचानक बुखार आया। तीन-चार दिन तक स्थानीय झोलाछापों से इलाज के बाद भी उसे कोई आराम नहीं मिला। 17 अक्तूबर को घर पर ही उसकी मौत हो गई थी। परिजनों के मुताबिक स्थानीय डॉक्टरों ने रुबी को डेंगू पीड़ित बताया था। इसके बाद तो बीमारी ने ऐसा पैर पसारा कि एक-एक कर बस्ती का हर घर का कोई न कोई सदस्य बुखार की चपेट में आ गया। इन्हीं में शिवबचन का बेटा नीरज (22) भी शामिल था। मूरतगंज के एक निजी स्कूल में शिक्षक रहे नीरज को हफ्ते भर पहले बुखार आया। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज के बाद भी आराम नहीं मिला तो 31 अक्तूबर को परिजनों ने उसे प्रयागराज के एसआरएन में भर्ती करा दिया था। शुक्रवार को आधी रात के बाद इलाज के दौरान नीरज की एसआरएन में ही मौत हो गई। इस वक्त गांव में शायद ही ऐसा कोई घर बचा हो जहां कोई न कोई सदस्य बीमारी से पीड़ित न हो। गांव के अरविंद, संजय, लालचंद्र, महेष चंद्र, सुरेश चंद्र, आनंदी समेत आधा दर्जन परिवार ऐसे हैं जिनका पूरा कुनबा बुखार से पीड़ित है। इनके अलावा लीलावती, मुकेश, सुरेश, गुडिय़ा, प्रभात, रामचंद्र, सरिता, शीला, निशा,कन्हई, सुग्गी देवी, लक्ष्मी देवी, रेनू, प्रभात, दीपशिाखा समेत करीब सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। सभी को अलग-अलग अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर दो दिन में लिए खून के 162 नमूने
इमामगंज। सरवा काजी गांव में डेंगू के डंक से हुई मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे की नींद टूटी। विभाग ने गांव में शिविर लगाया और मच्छरोधी दवाओं का छिड़काव कराया। साथ ही ग्रामीणों को बीमारी से बचाव के तरीके बताए।
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सरवा काजी में डेंगू का कहर पखवाड़े भर पहले शुरू हो गया था। गांव में एक-एक कर हर घर के सदस्य बीमारी की जद में आते रहे। इलाज के लिए लोग इधर-उधर झोलाछाप की शरण में भटकते रहे। पर, स्वास्थ्य महकमा बेखबर रहा। जबकि गांव से महज पांच-छह किमी की दूरी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मूरतगंज है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की आशा बहू और एएनएम को जानकारी दी गई थी। पर, कोई नहीं पहुंचा। सीएमओ डॉ पीएन चतुर्वेदी का कहना है कि शुक्रवार को जानकारी मिलने के बाद पीएचसी मूरतगंज के डॉक्टरों की टीम भेजी गई थी। डॉ आदित्य रावत के नेतूृत्व में पहुंची टीम ने गांव में शिविर लगाकर लोगों के खून के नमूने लिए और दवाएं दी। पहले दिन 78 और दूसरे दिन शनिवार को 84 समेत कुल 162 लोगों के खून की स्लाइड ली गई। शुक्रवार को लिए गए नमूनों की जांच में सभी 78 मरीजों को वायरल फीवर से पीड़ित पाया गया। पीएचसी मूरतगंज के एमओआईसी डॉ सुनील सिंह ने बताया कि गांव में मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव कराने के साथ ही ग्रामीणों को बीमारी से बचाव के तरीके भी बताए जा रहे हैं।
एसआरएन की रिपोर्ट आने से पहले सरवा काजी गांव के नीरज की मौत के मामले में अधिकृत तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि वह डेंगू पीड़ित था। गांव में बीमारी फैलने की सूचना पर सूचना पर लगातार दो दिन से टीम भेजकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर इलाज कराया जा रहा है।
डॉ. पीएन चतुर्वेदी-सीएमओ

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