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उठान के अंतिम दिन गोदाम में बचा खाद्यान्न किसका
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 01 Jul 2016 12:50 AM IST
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crime
मंझनपुर एफसीआई गोदाम में कालाबाजारी का सच उठान के अंतिम दिन आखिरकार नजर आ गया। शाम पांच बजे तक हुए उठान के बाद भी गोदाम में पांच सौ बोरा से अधिक गेहूं और चावल डंप रहा जो खाद्यान्न की कालाबाजारी की ओर साफ इशारा कर रहा था। उधर एमआई ने उठान के अंतिम दिन भी गोदाम में उपस्थित रहना जरूरी नहीं समझा। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि गरीबों के निवाले की खुलेआम हो रही कालाबाजारी पर प्रशासनिक अमला पूरी तरह से आखिर शांत क्यों है।
उठान के अंतिम दिन अमर उजाला की टीम ने मंझनपुर गोदाम का मौके पर जाकर हाल जाना। इस दौरान जो नजारा देखने को मिला वह चौकाने वाला नजर आया। उठान के अंतिम क्षण में गोदाम में पांच सौ बोरा से अधिक गेहूं और चावल की लाट लगी नजर आई। इसके अलावा लगभग 50 बोरा चीनी भी गोदाम में डंप थी। गोदाम में उठान के अंतिम दिन मिले स्टॉक ने खाद्यान्न की कालाबाजारी की ओर साफ इशारा कर दिया है। सूत्रों की माने तो बचा हुआ खाद्यान्न कोटेदारों से की गई घटतौली और कुछ कोटेदारों के रोके गए उठान का माना जा रहा है। सूत्रों की माने तो उठान के अंतिम दिन बचे हुए खाद्यान्न को एमआई के इशारे पर रातोरात गायब कर कालाबाजारियों के हवाले कर दिया जाएगा।
जब अफसरों की नाक के नीचे स्थित गोदाम का यह हाल है तो जिले के अन्य गोदामों की स्थिति क्या होगी सहज की अंदाजा लगाया जा सकता है। उधर गोदाम की जिम्मेदार एमआई ने उठान के अंतिम दिन भी उपस्थित होना मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में जिन गांवों के कोटे का राशन गांव नहीं पहुंचा वहां वितरण का न होना तय है। यही कारण है कि डीएम, सीडीओ और एसडीएम कार्यालय में खाद्यान्न वितरण न किए जाने की शिकायतों का आना कम नहीं हो रहा है। कुछ भी हो जब गोदाम से ही सारा खेल शुरू हो जाता है तो ऐसे में कोटेदारों द्वारा मनमानी करना लाजिमी है।
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एफसीआई गोदामों में खाद्यान्न की कालाबाजारी को रोकने के लिए तहसील स्तरीय अफसरों की टीम लगाई गई है। गोदाम में राशन आने और उठान के अंतिम दिन खाद्यान्न का सत्यापन अफसरों द्वारा किए जाने का निर्देश है। लेकिन जिम्मेदार एफसीआई गोदाम में कितने बोरा खाद्यान्न और चीनी आई और कितना कोटेदारों को वितरित किया गया। इसका सत्यापन कागजी कोरम को पूरा करने वाला है। अफसर आने और वितरण दोनो के कागजों पर अपने कार्यालय में बैठकर हस्ताक्षर बना देते हैं।
बृहस्पतिवार 30 जून को खाद्यान्न उठान का अंतिम दिन था। उठान के अंतिम दिन सायं पांच बजे मंझनपुर गोदाम में पांच सौ बोरा गेहूं, चावल और 50 बोरा चीनी डंप मिली। ऐसे में सवाल यह उठने लगा है कि क्या कोटेदारों को दिए जाने वाले खाद्यान्न से अधिक मात्रा में गेहूं-चावल गोदामों को भेजा जाता है। यदि ऐसा नहीं तो वितरण की शाम गोदाम में बचा हुआ खाद्यान्न और चीनी आखिर कहां जाएगी?
एफसीआई गोदाम से गेहूं चावल ही नहीं चीनी भी ब्लैक कर ली जाती है। इसका जीता-जागता उदाहरण उठान के अंतिम दिन देखने को मिला। गोदाम में बाइक लेकर पहुंचे एक व्यक्ति को चीनी का बोरा लदवा दिया गया। चीनी लेकर जा रहे सख्श से पूछताछ शुरू की गई तो वह सहम गया। इस पर मौजूद लोग आए और यह कहने लगे कि किसी कोटेदार की एक बोरा चीनी रह गई थी उसे बाइक से लेने आए हैं। ऐसे में साफ हो गया है कि गोदाम से खाद्यान्न के साथ-साथ चीनी भी ब्लैक की जा रही है।
मंझनपुर स्थित एफसीआई गोदाम में तैनात एमआई अर्चना मिश्रा माह में एक-दो बार आती है। गोदाम से उठान कराने वाले कोटेदारों की माने तो उनकी जगह गोदाम की कमान कथित एक युवक ने संभाल रखी है। वह रिश्ते में एमआई का भाई बताता है। बहरहाल एफसीआई गोदाम में करोड़ों के खाद्यान्न वितरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बाद एमआई का वहां न आना कुछ और ही इशारा कर रहा है। लेकिन यहां यह सवाल लोगों में जरूर उठने लगा है कि एमआई अर्चना मिश्रा कितनी असरदार हैं कि अफसरों का उन्हें तनिक भी खौफ नहीं और वह घर बैठकर गोदाम चला रहीं हैं।
गोदाम में खाद्यान्न आने और उठान होने के बाद निरीक्षण की जिम्मेदारी आपूर्ति, डिप्टी आरएमओ और संबंधित एसडीएम की है। डिप्टी आरएमओ ने कई गोदाम का निरीक्षण भी किया है। बचा हुआ खाद्यान्न पुराना हो सकता है।
अनूप तिवारी, डीएसओ
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उठान के अंतिम दिन अमर उजाला की टीम ने मंझनपुर गोदाम का मौके पर जाकर हाल जाना। इस दौरान जो नजारा देखने को मिला वह चौकाने वाला नजर आया। उठान के अंतिम क्षण में गोदाम में पांच सौ बोरा से अधिक गेहूं और चावल की लाट लगी नजर आई। इसके अलावा लगभग 50 बोरा चीनी भी गोदाम में डंप थी। गोदाम में उठान के अंतिम दिन मिले स्टॉक ने खाद्यान्न की कालाबाजारी की ओर साफ इशारा कर दिया है। सूत्रों की माने तो बचा हुआ खाद्यान्न कोटेदारों से की गई घटतौली और कुछ कोटेदारों के रोके गए उठान का माना जा रहा है। सूत्रों की माने तो उठान के अंतिम दिन बचे हुए खाद्यान्न को एमआई के इशारे पर रातोरात गायब कर कालाबाजारियों के हवाले कर दिया जाएगा।
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जब अफसरों की नाक के नीचे स्थित गोदाम का यह हाल है तो जिले के अन्य गोदामों की स्थिति क्या होगी सहज की अंदाजा लगाया जा सकता है। उधर गोदाम की जिम्मेदार एमआई ने उठान के अंतिम दिन भी उपस्थित होना मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में जिन गांवों के कोटे का राशन गांव नहीं पहुंचा वहां वितरण का न होना तय है। यही कारण है कि डीएम, सीडीओ और एसडीएम कार्यालय में खाद्यान्न वितरण न किए जाने की शिकायतों का आना कम नहीं हो रहा है। कुछ भी हो जब गोदाम से ही सारा खेल शुरू हो जाता है तो ऐसे में कोटेदारों द्वारा मनमानी करना लाजिमी है।
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एफसीआई गोदामों में खाद्यान्न की कालाबाजारी को रोकने के लिए तहसील स्तरीय अफसरों की टीम लगाई गई है। गोदाम में राशन आने और उठान के अंतिम दिन खाद्यान्न का सत्यापन अफसरों द्वारा किए जाने का निर्देश है। लेकिन जिम्मेदार एफसीआई गोदाम में कितने बोरा खाद्यान्न और चीनी आई और कितना कोटेदारों को वितरित किया गया। इसका सत्यापन कागजी कोरम को पूरा करने वाला है। अफसर आने और वितरण दोनो के कागजों पर अपने कार्यालय में बैठकर हस्ताक्षर बना देते हैं।
बृहस्पतिवार 30 जून को खाद्यान्न उठान का अंतिम दिन था। उठान के अंतिम दिन सायं पांच बजे मंझनपुर गोदाम में पांच सौ बोरा गेहूं, चावल और 50 बोरा चीनी डंप मिली। ऐसे में सवाल यह उठने लगा है कि क्या कोटेदारों को दिए जाने वाले खाद्यान्न से अधिक मात्रा में गेहूं-चावल गोदामों को भेजा जाता है। यदि ऐसा नहीं तो वितरण की शाम गोदाम में बचा हुआ खाद्यान्न और चीनी आखिर कहां जाएगी?
एफसीआई गोदाम से गेहूं चावल ही नहीं चीनी भी ब्लैक कर ली जाती है। इसका जीता-जागता उदाहरण उठान के अंतिम दिन देखने को मिला। गोदाम में बाइक लेकर पहुंचे एक व्यक्ति को चीनी का बोरा लदवा दिया गया। चीनी लेकर जा रहे सख्श से पूछताछ शुरू की गई तो वह सहम गया। इस पर मौजूद लोग आए और यह कहने लगे कि किसी कोटेदार की एक बोरा चीनी रह गई थी उसे बाइक से लेने आए हैं। ऐसे में साफ हो गया है कि गोदाम से खाद्यान्न के साथ-साथ चीनी भी ब्लैक की जा रही है।
मंझनपुर स्थित एफसीआई गोदाम में तैनात एमआई अर्चना मिश्रा माह में एक-दो बार आती है। गोदाम से उठान कराने वाले कोटेदारों की माने तो उनकी जगह गोदाम की कमान कथित एक युवक ने संभाल रखी है। वह रिश्ते में एमआई का भाई बताता है। बहरहाल एफसीआई गोदाम में करोड़ों के खाद्यान्न वितरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बाद एमआई का वहां न आना कुछ और ही इशारा कर रहा है। लेकिन यहां यह सवाल लोगों में जरूर उठने लगा है कि एमआई अर्चना मिश्रा कितनी असरदार हैं कि अफसरों का उन्हें तनिक भी खौफ नहीं और वह घर बैठकर गोदाम चला रहीं हैं।
गोदाम में खाद्यान्न आने और उठान होने के बाद निरीक्षण की जिम्मेदारी आपूर्ति, डिप्टी आरएमओ और संबंधित एसडीएम की है। डिप्टी आरएमओ ने कई गोदाम का निरीक्षण भी किया है। बचा हुआ खाद्यान्न पुराना हो सकता है।
अनूप तिवारी, डीएसओ