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तीन मासूम समेत जिंदा जला मजदूर
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 10 Jan 2015 12:00 AM IST
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पिपरकुंडी (करारी) गांव मेें बृहस्पतिवार रात एक ईंट-भट्ठा मजदूर राजेंद्र प्रसाद (38) और उसके तीन बच्चे हीरामनि (10), लाला भैया (6) और छोटू (4) जिंदा जल गए। घटना उस वक्त हुई जब मजदूर अपने पूरे परिवार समेत सो रहा था और इसी दौरान उसकी झोपड़ी में आग लग गई। घटना के दौरान उसकी पत्नी भी झोपड़ी में ही थी जिसने दुधमुंहे बच्चे समेत भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई। रूह कंपा देने वाली इस घटना की खबर फैलते ही सनसनी फैल गई। सूचना पर एसपी के साथ तहसीलदार और अन्य राजस्व कर्मचारी मौके पर पहुंचे मृतक की पत्नी समेत आसपास के लोग यह नहीं बता सके, कि आग कैसे लगी? माना जा रहा है कि रात चूल्हे की आग ठीक से नहीं बुझाने के कारण ही यह हादसा हुआ। उधर, मुआवजे की मांग करते हुए गांववाले सड़क पर उतर आए। तहसीलदार ने एडीएम से बात करके 1.50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा देकर लोगों को शांत कराया।
करारी कोतवाली क्षेत्र के पिपरकुंडी गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद गुवारा तैयबपुर (सनईपर) स्थित ईंट भट्ठे में मजदूरी करता था। वहीं वह झोपड़ी बनाकर पत्नी राजमनि उर्फ सुदामा देवी, बेटी हीरामनि, बेटा लाला भैया, छोटू और गोलू (1) के साथ रहता था। बगल की ही झोपड़ी में उसके पिता मधईलाल, बड़ा भाई बच्चालाल भी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रहते थे। बृहस्पतिवार को गणेश चतुर्थी (सकढ) त्योहार पर पिता-भाई परिवार समेत गांव चले गए थे। रात में खाना खाने के बाद राजेंद्र पत्नी और बच्चों के साथ सो गया। करीब एक बजे अचानक झोपड़ी में आग लग गई। गहरी नींद में सो रहे राजेंद्र और उसकी पत्नी को इसकी भनक तब लगी, जब आग पूरी झोपड़ी में फैल चुकी थी। यह देख चीखते-चिल्लाते सुदामा अपने दुधमुंहे बच्चे गोलू को लेकर किसी तरह बाहर भागी और मदद की गुहार लगाने लगी। चीख-पुकार पर आसपास के अन्य मजदूर भी अपनी झोपड़ी से निकल आए।
भीतर राजेंद्र और उसके तीन बच्चों के फंसे होने की जानकारी पर मजदूरों में हड़कंप मच गया। किसी तरह गंभीर रूप से झुलस चुके राजेंद्र और उसकी बेटी हीरामनि को बाहर निकाला गया। जबकि बेटे लाला भैया (6) और छोटू (4) की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। राजेंद्र और हीरामनि को लेकर मजदूर जिला अस्पताल मंझनपुर भागे। जहां दोनों की हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उन्हें इलाहाबाद रेफर कर दिया। हालांकि रास्ते में ही दोनों की सांसें थम गई। पुलिस अधीक्षक रतनकांत पांडेय ने बताया कि संभवत: चूल्हे की आग ठीक से नहीं बुझाने की वजह से यह हादसा हुआ है। छानबीन कराई जा रही है।
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करारी कोतवाली क्षेत्र के पिपरकुंडी गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद गुवारा तैयबपुर (सनईपर) स्थित ईंट भट्ठे में मजदूरी करता था। वहीं वह झोपड़ी बनाकर पत्नी राजमनि उर्फ सुदामा देवी, बेटी हीरामनि, बेटा लाला भैया, छोटू और गोलू (1) के साथ रहता था। बगल की ही झोपड़ी में उसके पिता मधईलाल, बड़ा भाई बच्चालाल भी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रहते थे। बृहस्पतिवार को गणेश चतुर्थी (सकढ) त्योहार पर पिता-भाई परिवार समेत गांव चले गए थे। रात में खाना खाने के बाद राजेंद्र पत्नी और बच्चों के साथ सो गया। करीब एक बजे अचानक झोपड़ी में आग लग गई। गहरी नींद में सो रहे राजेंद्र और उसकी पत्नी को इसकी भनक तब लगी, जब आग पूरी झोपड़ी में फैल चुकी थी। यह देख चीखते-चिल्लाते सुदामा अपने दुधमुंहे बच्चे गोलू को लेकर किसी तरह बाहर भागी और मदद की गुहार लगाने लगी। चीख-पुकार पर आसपास के अन्य मजदूर भी अपनी झोपड़ी से निकल आए।
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भीतर राजेंद्र और उसके तीन बच्चों के फंसे होने की जानकारी पर मजदूरों में हड़कंप मच गया। किसी तरह गंभीर रूप से झुलस चुके राजेंद्र और उसकी बेटी हीरामनि को बाहर निकाला गया। जबकि बेटे लाला भैया (6) और छोटू (4) की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। राजेंद्र और हीरामनि को लेकर मजदूर जिला अस्पताल मंझनपुर भागे। जहां दोनों की हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उन्हें इलाहाबाद रेफर कर दिया। हालांकि रास्ते में ही दोनों की सांसें थम गई। पुलिस अधीक्षक रतनकांत पांडेय ने बताया कि संभवत: चूल्हे की आग ठीक से नहीं बुझाने की वजह से यह हादसा हुआ है। छानबीन कराई जा रही है।
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