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कैसे होगी दोनों भतीजियों की शादी
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Fri, 10 Apr 2015 12:33 AM IST
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चायल (ब्यूरो)। आसमान से किसानों बरसी आपदा ने चायल के मखऊपुर के किसान त्रिलोक सिंह की जान ले ली। बर्बाद हुई गेहूं की फसल के गम वह सह नहीं सका। उसकी मौत से लक्ष्मी देवी और उसके इस परिवार पर बड़ा बज्रपात हुआ है।
पहले ही पति, देवरानी और भतीजे को गवां चुकी लक्ष्मी और उसकी दोनो बेटियां शर्मिला (18) और प्रमिला (16) अपने इसी देवर के सहारे रह रही थी। महज बीघे भर खेत का मालिक त्रिलोक सिंह भी भाभी और दोनों भतीजी के निवाले के इंतजाम को दिन-रात खेतों में काम किया करता था। खुद के पास कम खेत होने के कारण उसने गांव के ही एक काश्तकार की तीन बीघा जमीन आठ हजार रुपये प्रति बीघा की सालाना रकम पर बटाई पर ले रखी थी।
लक्ष्मी बताती है कि बटाई पर खेत लेकर कमाई के पीछे मंशा थी कि इसके पैसों से बेटियों की शादी का धीरे-धीरे इंतजाम हो जाएगा। पर, मार्च महीने में पानी के रूप में आसमान से बर्बादी बरसी। जिससे उसकी पूरे चार बीघे की गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। खेती के साथ उसका एकलौता सहारा देवर भी दुनिया छोड़कर जा चुका है। ऐसे में अब वह और उसकी बेटियों के निवाले का इंतजाम कौन करेगा। बेटियों के हाथ कैसे पीले होंगे। देवर की मौत पर बार-बार बेटियों का मुंह देखकर वह सिसक रही थी।
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पहले ही पति, देवरानी और भतीजे को गवां चुकी लक्ष्मी और उसकी दोनो बेटियां शर्मिला (18) और प्रमिला (16) अपने इसी देवर के सहारे रह रही थी। महज बीघे भर खेत का मालिक त्रिलोक सिंह भी भाभी और दोनों भतीजी के निवाले के इंतजाम को दिन-रात खेतों में काम किया करता था। खुद के पास कम खेत होने के कारण उसने गांव के ही एक काश्तकार की तीन बीघा जमीन आठ हजार रुपये प्रति बीघा की सालाना रकम पर बटाई पर ले रखी थी।
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लक्ष्मी बताती है कि बटाई पर खेत लेकर कमाई के पीछे मंशा थी कि इसके पैसों से बेटियों की शादी का धीरे-धीरे इंतजाम हो जाएगा। पर, मार्च महीने में पानी के रूप में आसमान से बर्बादी बरसी। जिससे उसकी पूरे चार बीघे की गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। खेती के साथ उसका एकलौता सहारा देवर भी दुनिया छोड़कर जा चुका है। ऐसे में अब वह और उसकी बेटियों के निवाले का इंतजाम कौन करेगा। बेटियों के हाथ कैसे पीले होंगे। देवर की मौत पर बार-बार बेटियों का मुंह देखकर वह सिसक रही थी।
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