{"_id":"57ffd7bf4f1c1bf62d28ef84","slug":"hindu-muslim","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक ‘रास्ते’ के लिए टूटा सौहार्द का ‘रिश्ता’","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
एक ‘रास्ते’ के लिए टूटा सौहार्द का ‘रिश्ता’
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 14 Oct 2016 12:28 AM IST
विज्ञापन
crime
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कटरा व रक्सवारा के लोगों का गुरुवार का दिन चर्चाओं में बीता। किसने क्या किया? और कौन क्या नहीं कर पाया? इसी बतकही में युवा व बुजुर्गों ने सुबह से शाम बिता दी। मामूली बात पर उठे गुस्से के उफान ने सालों पुराने रिश्तों को चूर कर दिया है। अब दोबारा सब एक होंगे अथवा नहीं। आशा और निराशा के भंवर जाल में फंसे लोग इस गंभीर मसले पर फिलहाल अभी मंथन कर रहे हैं।
कटरा व रक्सवारा के लोग गुरुवार को अलग-अलग जगहों पर इकट्ठा बैठे थे और अपनी ही बात में मशगूल थे। वह खुलकर तभी बोलते थे, जब वह मुतमईन हो जाते थे कि उनकी बात किसी दूसरे तक नहीं पहुंचेगी और न ही आसपास पुलिस है।
गांव के मो. आजम, गुलाब वारिस और मुश्ताक अहमद मानते हैं कि रास्ते के विवाद का हल तो था? नासमझी से बखेड़ा हुआ। कहा कि यदि थोड़ा और वक्त मिला होता तो शायद यह नौबत ही न आती। बताया कि इसके पहले ऐसा तो कभी नहीं हुआ था। गांव के ही रामबहादुर मौर्य, राजकुमार और सोनू केशरवानी भी मानते हैं कि जतन तो किया जा सकता था, लेकिन सब आवेश में गड़बड़ हो गई। एक रास्ते के लिए सबके अपने अलग-अलग रास्ते हो गए हैं। कुछ प्रशासन की गलती थी तो कुछ अपनों की।
विज्ञापन
विज्ञापन
कटरा व रक्सवारा के लोग गुरुवार को अलग-अलग जगहों पर इकट्ठा बैठे थे और अपनी ही बात में मशगूल थे। वह खुलकर तभी बोलते थे, जब वह मुतमईन हो जाते थे कि उनकी बात किसी दूसरे तक नहीं पहुंचेगी और न ही आसपास पुलिस है।
विज्ञापन
गांव के मो. आजम, गुलाब वारिस और मुश्ताक अहमद मानते हैं कि रास्ते के विवाद का हल तो था? नासमझी से बखेड़ा हुआ। कहा कि यदि थोड़ा और वक्त मिला होता तो शायद यह नौबत ही न आती। बताया कि इसके पहले ऐसा तो कभी नहीं हुआ था। गांव के ही रामबहादुर मौर्य, राजकुमार और सोनू केशरवानी भी मानते हैं कि जतन तो किया जा सकता था, लेकिन सब आवेश में गड़बड़ हो गई। एक रास्ते के लिए सबके अपने अलग-अलग रास्ते हो गए हैं। कुछ प्रशासन की गलती थी तो कुछ अपनों की।
विज्ञापन