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सीलन से मकान जमींदोज, बचा कुनबा
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sun, 04 Jan 2015 11:33 PM IST
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नेवादा। जिले में तीन दिनों तक हुई बूंदाबांदी से सीलन के कारण जिले में कच्चे मकान भी गिरने लगे हैं। शनिवार की रात ही सरायअकिल के दुर्गापुर गांव में एक कच्चा मकान गिर गया। मलबे में दबने से पति-पत्नी और चार बच्चे घायल हो गए। साथ ही मलबे में दबकर बिस्तर, बर्तन, खाद्यान्न समेत हजारों रुपये की गृहस्थी का सामान भी नष्ट हो गया।
बता दें कि कौशाम्बी में बृहस्पतिवार से तीन दिनों तक बूंदाबांदी हुई है। तीन दिनों तक हुई बारिश गरीबों के लिए आफत बन गई है। इसके कारण कच्ची मिट्टी के बने मकानों में सीलन आ गई है। जिसके कारण मकान भी गिरने लगे हैं। शनिवार की रात ही सरायअकिल कोतवाली क्षेत्र के दुर्गापुर गांव निवासी जगत पाल का कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया।
मलबे में दबने से जगतपाल (40) के साथ ही उसकी पत्नी और बच्चे प्रीति (15), सुग्गन (12), ननकुल (10) और छोटू (7) दब गए। मकान गिरने की आवाज और घरवालों की चीख-पुकार पर गांव में हड़कंप मच गया। चीख-पुकार पर दौड़े ग्रामीणों ने मलबा हटाकर सभी को बाहर निकाला। घायलों को गांववालों ने स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। उधर, मकान गिरने से भुक्तभोगी को हजारों रुपये का नुकसान भी हुआ है। मलबे में दबकर बर्तन, बिस्तर, कपड़े, खाद्यान्न आदि भी नष्ट हो गए हैं।
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बता दें कि कौशाम्बी में बृहस्पतिवार से तीन दिनों तक बूंदाबांदी हुई है। तीन दिनों तक हुई बारिश गरीबों के लिए आफत बन गई है। इसके कारण कच्ची मिट्टी के बने मकानों में सीलन आ गई है। जिसके कारण मकान भी गिरने लगे हैं। शनिवार की रात ही सरायअकिल कोतवाली क्षेत्र के दुर्गापुर गांव निवासी जगत पाल का कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया।
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मलबे में दबने से जगतपाल (40) के साथ ही उसकी पत्नी और बच्चे प्रीति (15), सुग्गन (12), ननकुल (10) और छोटू (7) दब गए। मकान गिरने की आवाज और घरवालों की चीख-पुकार पर गांव में हड़कंप मच गया। चीख-पुकार पर दौड़े ग्रामीणों ने मलबा हटाकर सभी को बाहर निकाला। घायलों को गांववालों ने स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। उधर, मकान गिरने से भुक्तभोगी को हजारों रुपये का नुकसान भी हुआ है। मलबे में दबकर बर्तन, बिस्तर, कपड़े, खाद्यान्न आदि भी नष्ट हो गए हैं।
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