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सदमे में दो और किसानों की मौत

Fri, 17 Apr 2015 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी Updated Fri, 17 Apr 2015 12:19 AM IST
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मंझनपुर/करारी (कौशाम्बी)। बेमौसम हुई मूसलाधार बरसात से तालाब बने खेतों में भीगकर बर्बाद हुई फसलें का सदमा किसान बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। इसी सदमे में बृहस्पतिवार को मंझनपुर तहसील के रामपुर रक्सवारा गांव के किसान छोटेलाल (48) और बख्शीपार (लौधना) गांव के भैयालाल (60) की सांसें थम गईं। फसलों की बर्बादी के गम में 10 दिन के अंदर अब तक 11 किसानों की मौत हो चुकी है।
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मार्च महीने में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि में गिरकर गेहूं की फसलें बर्बाद हुई हैं। फसलों की हुई तबाही के सदमे में किसानों की मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बृहस्पतिवार की सुबह भी सदमे में मंझनपुर तहसील के रामपुर रक्सवारा (करारी) गांव के किसान छोटेलाल की मौत हो गई। छोटेलाल के छोटे बेटे नरेंद्र ने बताया कि उसके पास चार बीघा खेत है।
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पूरे खेत में गेहूं की बुआई की गई थी। मार्च महीने में हुई बरसात में सारी फसल गिरकर बर्बाद हो गई थी। इधर, दो दिन पहले हुई जोरदार बारिश से खेत में काटकर रखी फसल भी भीगकर तबाह हो गई। बृहस्पतिवार की सुबह उसके पिता फसल देखने खेत में गए थे। सुबह करीब आठ बजे लौटकर आने पर उनके सीने में दर्द होने लगा। वह चरपाई पर लेट गए। लेटते ही उनकी सांसें थम गईं। परिजनों का मानना है कि बर्बाद हुई फसल के सदमे में ही उनकी जान गई है। पत्नी सभावती देवी पति की मौत की भनक लगते ही गिरकर बेसुध हो गईं। बता दें कि छोटेलाल के दो बेटी और दो बेटे हैं। इनमें से बड़ी बेटी अल्पना की उन्होंने दो साल पहले शादी की थी।
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शादी में रिश्तेदारों से कर्ज भी लिया था। सोचा था खेती से थोड़ा-थोड़ा करके कर्ज अदा कर देंगे। पर, मौसम की मार से पूरी फसल ही बर्बाद हो गई। जिसका वे सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके। इसी तरह से लौधना (बख्शीपार) गांव निवासी भैयालाल (60) करीब डेढ़ बीघा खेत बंटाई पर लेकर खेती की थी। बारिश में उनकी भी फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है। मार्च महीने में बारिश के दौरान गिरी फसल देखकर ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। तभी से वह बिस्तर पर थे। बृहस्पतिवार की सुबह उनकी मौत हो गई। भैयालाल की भयाहू केतकी देवी ने बताया कि सदमे से ही उनकी तबीयत बिगड़ी थी और उसी से उनकी जान भी चली गई।
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