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वकील की गोली मारकर हत्या
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 22 Jul 2016 12:31 AM IST
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गुरुवार शाम कादीपुर गांव गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। बाइक सवार हमलावरों ने वकील पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। पिस्टल से दर्जनों राउंड फायर होने से इलाके में सनसनी फैल गई। सड़क किनारे खेतों में काम कर रहे लोग दहशत में आ गए। वकील को गोली मारकर हमलावर फरार हो गए। वकील को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से एसआरएन इलाहाबाद रेफर कर दिया गया। वहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने वकील को मृत घोषित कर दिया।
चरवा थाना क्षेत्र के केसी का पुरवा के रहने वाले उमेश कुमार मिश्र पेशे से वकील थे। वह रोज की तरह करीब पौने पांच बजे जिला कचहरी से घर लौट रहे थे। रास्ते में कादीपुर गांव के पास सुनसान सड़क देख पीछे आई बाइक पर सवार हमलावरों ने फायरिंग शुरू कर दी। पीछे से गोली लगते ही उमेश गिर पड़े। इसके बाद चार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। एक हमलावर ने उमेश कुमार पर गोलियां दागनी शुरू कर दी। इस बीच उसके तीनों साथी हवा में गोलियां दागते रहे।
उमेश को चार गोलियां लगीं। पीठ, गर्दन और छाती में गोली लगने से उमेश लहूलुहान हो गए। उमेश को मरा जानकर हमलावर भरवारी रोड पर निकल भागे। बदमाशों के भागने के बाद सड़क किनारे खेत में काम कर रहे मजदूर इकट्ठा हो गए। इस बीच चरवा थानेदार रामआसरे सरोज उधर से गुजर रहे थे। भीड़ देख उन्होंने जीप रोक दी। उमेश को वह जीप में लादकर जिला अस्पताल पहुंचे। कुछ ही देर में वहां एसपी वीके मिश्रा, सीओ, मंझनपुर कोतवाल पहुंच गए। चिकित्सकों ने उमेश को इलाहाबाद एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया।
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अप्रैल में हुई थी पिता की मौत
उमेश के पिता प्रियुगी नारायण मिश्रा सिपाही थे। उनकी तैनाती बांदा में थी। 19 अप्रैल को उमेश के पिता की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। इसके बाद परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी उमेश पर आ गई।
एआरटीओ कार्यालय में काम काज को लेकर थी तनातनी
उमेश मिश्रा वकालत करने के साथ एआरटीओ कार्यालय में भी कामकाज देखते थे। उनकी वहां के कामकाज को लेकर कुछ लोगों से तनानती चल रही थी। मामले की जानकारी घरवालों को भी है। मामले में गांव के ही एक शख्स को संदेह की निगाह से देखा जा रहा है।
गांव छावनी में तब्दील
उमेश की मौत की खबर जैसे ही पुलिस को लगी, गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया। सीओ चायल कई थानों की फोर्स लेकर गांव में पहुंच गए। चूंकि मामले में गांव के ही एक शख्स पर शक किया जा रहा है। ऐसे में गांव में बवाल से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिसके मद्देनजर वहां फोर्स लगा दी गई है।
पत्नी मायके में, मां बेहाल
पति की मौत के बाद उमेश की मां बहुत गुमशुम रह रही थी। मगर शाम को जब उन्हें बेटे की मौत की खबर लगी तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। उमेश की शादी 2009 में बांदा की रहने वाली प्रीति के साथ हुई थी। उमेश को एक बेटी गौरी और बेटा डब्बू है।
पत्नी इन दिनों मायके में है। घरवालों ने जब उसे घटना की जानकारी दी तो उसका भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
भाई को मारने आए थे हमलावर
घटना में अहम बात ये है कि हमलावर उमेश नहीं बल्कि उनके दूसरे नंबर के भाई दीपक को मारने आए थे। जिला अस्पताल में बदहवाश हालत में उमेश ने यह बात पुलिस को बताई। दीपक भी एआरटीओ कार्यालय में कामकाज में उमेश का हाथ बंटाता था।
घटना के बारे में सारी जानकारी जुटाई जा रही है। अभी तक घरवालों ने कोई तहरीर नहीं दी है। आरोपियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।
वीके मिश्रा, एसपी
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चरवा थाना क्षेत्र के केसी का पुरवा के रहने वाले उमेश कुमार मिश्र पेशे से वकील थे। वह रोज की तरह करीब पौने पांच बजे जिला कचहरी से घर लौट रहे थे। रास्ते में कादीपुर गांव के पास सुनसान सड़क देख पीछे आई बाइक पर सवार हमलावरों ने फायरिंग शुरू कर दी। पीछे से गोली लगते ही उमेश गिर पड़े। इसके बाद चार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। एक हमलावर ने उमेश कुमार पर गोलियां दागनी शुरू कर दी। इस बीच उसके तीनों साथी हवा में गोलियां दागते रहे।
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उमेश को चार गोलियां लगीं। पीठ, गर्दन और छाती में गोली लगने से उमेश लहूलुहान हो गए। उमेश को मरा जानकर हमलावर भरवारी रोड पर निकल भागे। बदमाशों के भागने के बाद सड़क किनारे खेत में काम कर रहे मजदूर इकट्ठा हो गए। इस बीच चरवा थानेदार रामआसरे सरोज उधर से गुजर रहे थे। भीड़ देख उन्होंने जीप रोक दी। उमेश को वह जीप में लादकर जिला अस्पताल पहुंचे। कुछ ही देर में वहां एसपी वीके मिश्रा, सीओ, मंझनपुर कोतवाल पहुंच गए। चिकित्सकों ने उमेश को इलाहाबाद एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया।
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अप्रैल में हुई थी पिता की मौत
उमेश के पिता प्रियुगी नारायण मिश्रा सिपाही थे। उनकी तैनाती बांदा में थी। 19 अप्रैल को उमेश के पिता की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। इसके बाद परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी उमेश पर आ गई।
एआरटीओ कार्यालय में काम काज को लेकर थी तनातनी
उमेश मिश्रा वकालत करने के साथ एआरटीओ कार्यालय में भी कामकाज देखते थे। उनकी वहां के कामकाज को लेकर कुछ लोगों से तनानती चल रही थी। मामले की जानकारी घरवालों को भी है। मामले में गांव के ही एक शख्स को संदेह की निगाह से देखा जा रहा है।
गांव छावनी में तब्दील
उमेश की मौत की खबर जैसे ही पुलिस को लगी, गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया। सीओ चायल कई थानों की फोर्स लेकर गांव में पहुंच गए। चूंकि मामले में गांव के ही एक शख्स पर शक किया जा रहा है। ऐसे में गांव में बवाल से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिसके मद्देनजर वहां फोर्स लगा दी गई है।
पत्नी मायके में, मां बेहाल
पति की मौत के बाद उमेश की मां बहुत गुमशुम रह रही थी। मगर शाम को जब उन्हें बेटे की मौत की खबर लगी तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। उमेश की शादी 2009 में बांदा की रहने वाली प्रीति के साथ हुई थी। उमेश को एक बेटी गौरी और बेटा डब्बू है।
पत्नी इन दिनों मायके में है। घरवालों ने जब उसे घटना की जानकारी दी तो उसका भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
भाई को मारने आए थे हमलावर
घटना में अहम बात ये है कि हमलावर उमेश नहीं बल्कि उनके दूसरे नंबर के भाई दीपक को मारने आए थे। जिला अस्पताल में बदहवाश हालत में उमेश ने यह बात पुलिस को बताई। दीपक भी एआरटीओ कार्यालय में कामकाज में उमेश का हाथ बंटाता था।
घटना के बारे में सारी जानकारी जुटाई जा रही है। अभी तक घरवालों ने कोई तहरीर नहीं दी है। आरोपियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।
वीके मिश्रा, एसपी