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कागज पर उठ रहा मेडिकल कचरा, लाखों का गोलमाल!
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कागज पर उठ रहा मेडिकल कचरा, लाखों का गोलमाल!
सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल का कचरा लेने के लिए प्रयागराज की फर्म ने लिया हैं टेंडर, हर साल लाखों रुपये का हो रहा भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले में सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे को कागज पर उठाया जा रहा है। प्रयागराज की फर्म घर बैठे लाखों रुपये सरकारी खजाने को चपत लगाती है। विभागीय अफसर सबकुछ जानने के बाद भी बेखबर हैैैं। ऐसे में बेतरतीब ढंग से फेंके जा रहे मेडिकल कचरा के कारण संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।
जिला अस्पताल और 13 प्राथमिक व सामुदायिक केंद्र हैं। इसके अलावा 29 न्यू पीएचसी व 174 सब सेंटर हैं। इसके अतिरिक्त 100 के करीब निजी अस्पतालों का पंजीकरण किया गया है। इन अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे को उठाने की जिम्मेदारी प्रयागराज की एक फर्म को सौंपी गई है। नियम के मुताबिक फर्म की गाड़ी को रोजाना हर अस्पताल आकर कचरे को एकत्र कर उसका निस्तारण करना है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए स्वस्थ्य महकमें से करीब 17 लाख सालाना का बजट निर्धारित किया गया है। इसके बाद भी संस्था का वाहन कचरा उठाने नहीं आता है। नतीजतन अस्पतालों से निकलने वाला कचरा परिसर में ही फैला रहता है। ऐसे में गंदगी की वजह से मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। साथ ही कचरा प्रबंधन सही नहीं होने से मरीजों में इंफेक्शन का भी भय रहता है।
सिर्फ एनओसी के लिए लेते हैं पैसा
मंझनपुर। निजी अस्पतालों के पंजीकरण के लिए बायोवेस्ट निस्तारण की एनओसी लगाने के बाद ही सीएमओ कार्यालय में पंजीयन होता है। अस्पताल के नवीनीकरण में भी इसकी एनओसी लगानी होती है। इसके लिए संस्था पांच हजार रुपये की वसूली कर प्रमाणपत्र दे देती है।
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स्वास्थ्य महकमे का रहता है हिस्सा
मंझनपुर। स्वास्थ्य महकमे से जिस संस्था को टेंडर दिया गया है उसके वाहन महीने में एक बार भी आ जाए तो गनीमत है। अस्पताल का कचरा परिसर में ही पड़ा रहता है। विभागीय सूत्रों माने तो संस्था पर मेहरबानी के पीछे स्वास्थ्य महकमें का भी मोटा हिस्सा होता है। इसी के चलते हर साल संस्था के बिल पर आसानी से मुहर लग जाती है।
इनका कहना है
प्रयागराज की संस्था को कूड़ा निस्तारण का टेंडर दिया गया है। नियमित कूड़ा उठने की जानकारी नहीं है। फिलहाल शासन स्तर से कूड़ा निस्तारण के लिए नया टेंडर होने वाला है। जब तक वह नहीं हो जाता, मजबूरी में इसी संस्था से काम लिया जा रहा है।
डॉ. पीएन. चतुर्वेदी, सीएमओ
फोटो नं-17]18
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सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल का कचरा लेने के लिए प्रयागराज की फर्म ने लिया हैं टेंडर, हर साल लाखों रुपये का हो रहा भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले में सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे को कागज पर उठाया जा रहा है। प्रयागराज की फर्म घर बैठे लाखों रुपये सरकारी खजाने को चपत लगाती है। विभागीय अफसर सबकुछ जानने के बाद भी बेखबर हैैैं। ऐसे में बेतरतीब ढंग से फेंके जा रहे मेडिकल कचरा के कारण संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।
जिला अस्पताल और 13 प्राथमिक व सामुदायिक केंद्र हैं। इसके अलावा 29 न्यू पीएचसी व 174 सब सेंटर हैं। इसके अतिरिक्त 100 के करीब निजी अस्पतालों का पंजीकरण किया गया है। इन अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे को उठाने की जिम्मेदारी प्रयागराज की एक फर्म को सौंपी गई है। नियम के मुताबिक फर्म की गाड़ी को रोजाना हर अस्पताल आकर कचरे को एकत्र कर उसका निस्तारण करना है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए स्वस्थ्य महकमें से करीब 17 लाख सालाना का बजट निर्धारित किया गया है। इसके बाद भी संस्था का वाहन कचरा उठाने नहीं आता है। नतीजतन अस्पतालों से निकलने वाला कचरा परिसर में ही फैला रहता है। ऐसे में गंदगी की वजह से मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। साथ ही कचरा प्रबंधन सही नहीं होने से मरीजों में इंफेक्शन का भी भय रहता है।
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सिर्फ एनओसी के लिए लेते हैं पैसा
मंझनपुर। निजी अस्पतालों के पंजीकरण के लिए बायोवेस्ट निस्तारण की एनओसी लगाने के बाद ही सीएमओ कार्यालय में पंजीयन होता है। अस्पताल के नवीनीकरण में भी इसकी एनओसी लगानी होती है। इसके लिए संस्था पांच हजार रुपये की वसूली कर प्रमाणपत्र दे देती है।
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स्वास्थ्य महकमे का रहता है हिस्सा
मंझनपुर। स्वास्थ्य महकमे से जिस संस्था को टेंडर दिया गया है उसके वाहन महीने में एक बार भी आ जाए तो गनीमत है। अस्पताल का कचरा परिसर में ही पड़ा रहता है। विभागीय सूत्रों माने तो संस्था पर मेहरबानी के पीछे स्वास्थ्य महकमें का भी मोटा हिस्सा होता है। इसी के चलते हर साल संस्था के बिल पर आसानी से मुहर लग जाती है।
इनका कहना है
प्रयागराज की संस्था को कूड़ा निस्तारण का टेंडर दिया गया है। नियमित कूड़ा उठने की जानकारी नहीं है। फिलहाल शासन स्तर से कूड़ा निस्तारण के लिए नया टेंडर होने वाला है। जब तक वह नहीं हो जाता, मजबूरी में इसी संस्था से काम लिया जा रहा है।
डॉ. पीएन. चतुर्वेदी, सीएमओ
फोटो नं-17]18