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गोशालाओं से बदलेगी जिले में खेती की तस्वीर : सीडीओ
Thu, 08 Jan 2026 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 08 Jan 2026 12:57 AM IST
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अलीपुर जीता गांव में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान मुख्य अतिथि सीडीओ विनोद राम त्रिपाठी ने बताया कि गोशालाओं के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा देकर जिले की खेती का स्वरूप बदला जाएगा। साथ ही बताया कि खेती में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है। इसे सुधारने के लिए जैविक उत्पादों का उपयोग जरूरी है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता के साथ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा।
सीडीओ ने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूह गोशालाओं में गाय के गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करेंगे और इसका उपयोग खेतों में किया जाएगा। इससे खेतों की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और महिला समूहों की आय में भी वृद्धि होगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार ने वर्मी कंपोस्ट निर्माण की प्रक्रिया का सजीव प्रशिक्षण दिया और इसके उपयोग की जानकारी दी। वहीं, डॉ. अमित कुमार केसरी ने प्राकृतिक खेती के अंतर्गत गोबर और गोमूत्र से तैयार घनजीवामृत, जीवामृत व बीजामृत की उपयोगिता बताई।
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उप कृषि निदेशक सतेंद्र तिवारी ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को जैविक उत्पाद अपनाने के लिए जागरूक करने की बात कही। प्रशिक्षण कार्यक्रम नौ जनवरी को कौशाम्बी, 14 को चायल, 16 को मूरतगंज, 19 को सरसवां, 20 को सिराथू, 21 को मंझनपुर और 22 जनवरी को नेवादा विकास खंड में किए जाएंगे।
एडीएम बने गेहूं खरीद के प्रभारी अधिकारी
जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 में मूल्य समर्थन योजना के तहत जिले में गेहूं खरीद की जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारी (वित्त-राजस्व) को सौंप दी है। उनके निर्देशन में जिले की सभी क्रय एजेंसियों के माध्यम से किसानों से सीधे गेहूं की खरीद की जाएगी। प्रशासन के अनुसार, शासन की तरफ जारी गेहूं क्रय नीति 2026-27 के अनुसार पूरी प्रक्रिया संचालित होगी।
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सीडीओ ने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूह गोशालाओं में गाय के गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करेंगे और इसका उपयोग खेतों में किया जाएगा। इससे खेतों की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और महिला समूहों की आय में भी वृद्धि होगी।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार ने वर्मी कंपोस्ट निर्माण की प्रक्रिया का सजीव प्रशिक्षण दिया और इसके उपयोग की जानकारी दी। वहीं, डॉ. अमित कुमार केसरी ने प्राकृतिक खेती के अंतर्गत गोबर और गोमूत्र से तैयार घनजीवामृत, जीवामृत व बीजामृत की उपयोगिता बताई।
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उप कृषि निदेशक सतेंद्र तिवारी ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को जैविक उत्पाद अपनाने के लिए जागरूक करने की बात कही। प्रशिक्षण कार्यक्रम नौ जनवरी को कौशाम्बी, 14 को चायल, 16 को मूरतगंज, 19 को सरसवां, 20 को सिराथू, 21 को मंझनपुर और 22 जनवरी को नेवादा विकास खंड में किए जाएंगे।
एडीएम बने गेहूं खरीद के प्रभारी अधिकारी
जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 में मूल्य समर्थन योजना के तहत जिले में गेहूं खरीद की जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारी (वित्त-राजस्व) को सौंप दी है। उनके निर्देशन में जिले की सभी क्रय एजेंसियों के माध्यम से किसानों से सीधे गेहूं की खरीद की जाएगी। प्रशासन के अनुसार, शासन की तरफ जारी गेहूं क्रय नीति 2026-27 के अनुसार पूरी प्रक्रिया संचालित होगी।