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नाथूराम शिक्षक के साथ दोआबा की गलियों में साइकिल से घूमे थे कल्याण सिंह
Sun, 22 Aug 2021 07:18 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 22 Aug 2021 07:18 PM IST
सार
दिवंगत विधायक नाथूराम शिक्षक के रिश्तेदार करारी निवासी अमृतलाल बताते हैं कि स्व. कल्याण सिंह बेहद सरल स्वभाव के थे। वह जीप से अक्सर यहां आया करते थे। खाने में उन्हें सादा भोजन पसंद था।
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कल्याण सिंह
- फोटो : social media
विस्तार
दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री व राजस्थान के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह का जिले से गहरा नाता था। वर्ष 1977 में वह जनसंघ पार्टी के टिकट पर अतरौली से व मंझनपुर सीट से नाथूराम शिक्षक विधायक चुने गए गए थे। उस दौरान जनसंघ का चुनाव निशान जलता हुआ दीपक हुआ करता था। जनता पार्टी की सरकार में कल्याण सिंह मंत्री बनाए गए। एक साथ सदन में रहने के दौरान कल्याण सिंह की नाथू राम शिक्षक से खूब जमती थी।
दिवंगत विधायक नाथूराम शिक्षक के रिश्तेदार करारी निवासी अमृतलाल बताते हैं कि स्व. कल्याण सिंह बेहद सरल स्वभाव के थे। वह जीप से अक्सर यहां आया करते थे। खाने में उन्हें सादा भोजन पसंद था। आवाज उनकी बुलंद थी। भोजन करने के बाद वह अक्सर साइकिल से घूमने निकल जाते थे। कई-कई गांव घूमते और गांव-गांव में लोगों के बीच अनजान बनकर उनका दुख-दर्द जानते थे।
शिक्षक जी को तो स्थानीय होने के नाते तो लोग पहचान जाते थे, लेकिन कल्याण सिंह जी को पहचानने में अक्सर गच्चा खा जाते थे। हालांकि वह अपनी पहचान नहीं बताने की बात भी कहते थे। इसके अलावा पूरबशरीरा निवासी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उदयन सिंह के पिता के साथ भी उनकी खूब बनती थी। इसी तरह नेता राजपूत भी जिले में उनके करीबियों में गिने जाते थे।
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दिवंगत विधायक नाथूराम शिक्षक के रिश्तेदार करारी निवासी अमृतलाल बताते हैं कि स्व. कल्याण सिंह बेहद सरल स्वभाव के थे। वह जीप से अक्सर यहां आया करते थे। खाने में उन्हें सादा भोजन पसंद था। आवाज उनकी बुलंद थी। भोजन करने के बाद वह अक्सर साइकिल से घूमने निकल जाते थे। कई-कई गांव घूमते और गांव-गांव में लोगों के बीच अनजान बनकर उनका दुख-दर्द जानते थे।
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शिक्षक जी को तो स्थानीय होने के नाते तो लोग पहचान जाते थे, लेकिन कल्याण सिंह जी को पहचानने में अक्सर गच्चा खा जाते थे। हालांकि वह अपनी पहचान नहीं बताने की बात भी कहते थे। इसके अलावा पूरबशरीरा निवासी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उदयन सिंह के पिता के साथ भी उनकी खूब बनती थी। इसी तरह नेता राजपूत भी जिले में उनके करीबियों में गिने जाते थे।
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