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Kaushambi News: जिले में शुरू हुई स्वच्छ व हरित विद्यालय रेटिंग
Thu, 14 Aug 2025 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 14 Aug 2025 01:19 AM IST
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जिले में जुलाई से स्वच्छ व हरित विद्यालय रेटिंग अभियान की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। इस योजना के तहत देशभर के सरकारी और मान्यता प्राप्त विद्यालयों का मूल्यांकन किया जाएगा और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार दिया जाएगा। लक्ष्य है कि स्कूल न केवल पढ़ाई में बल्कि स्वच्छता और हरित पहल में भी मिसाल पेश करें।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को निर्देश भेजकर कहा है कि प्रत्येक विद्यालय स्व-स्वमूल्यांकन के आधार पर अपना नामांकन करें। यह नामांकन तय प्रारूप पर किया जाएगा और इसकी रिपोर्ट राज्य स्तर पर भेजी जाएगी, जहां से राष्ट्रीय मूल्यांकन के लिए प्रविष्टियां भेजी जाएंगी। उन्होंने बताया कि मूल्यांकन के बाद सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्कूलों को प्रमाणपत्र और नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा, ताकि अन्य विद्यालय भी प्रेरित हों।
इन बिंदुओं पर होगी रेटिंग
- जल संचयन और संरक्षण- वर्षा जल संचयन की व्यवस्था, पानी का पुनः उपयोग।
- जल की उपलब्धता और गुणवत्ता - पीने के पानी की पर्याप्त आपूर्ति और शुद्धता।
- शौचालय की क्रियाशीलता -लड़के और लड़कियों के लिए अलग, साफ और उपयोग योग्य शौचालय।
- दिव्यांग अनुकूल संरचना - व्हीलचेयर रैंप, हैंडल, विशेष शौचालय।
- हाथ धुलने की व्यवस्था- साबुन और स्वच्छ पानी के साथ उचित स्थान पर व्यवस्था।
- कूड़ा निस्तारण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन-डस्टबिन, कंपोस्ट पिट, कूड़ा अलग करना।
-स्वच्छता और परिसंपत्तियों का रखरखाव - फर्नीचर, दीवार, मैदान, खेल सामग्री की साफ-सफाई।
- जनजागरूकता अभियान- रैलियां, पोस्टर, नारे, विद्यार्थियों की भागीदारी।
- ईको-रखरखाव और हरित पहल – वृक्षारोपण, बगीचा, पॉलिथीन मुक्त कैंपस।
- विद्यालय क्लब और गतिविधियां - ‘इको क्लब’ और अन्य गतिविधियां जो पर्यावरण के हित में हों।
बच्चों में बढ़ेगी जागरूकता
अधिकारियों का मानना है कि इस रेटिंग से विद्यालयों में साफ-सफाई और हरित विकास की आदत पक्की होगी। बच्चों में पानी बचाने, कूड़ा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। बीएसए ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हर विद्यालय स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का आदर्श बने।
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योजना की खास बातें
- जुलाई से जिले में रेटिंग प्रक्रिया शुरू।
- सभी विद्यालयों को 15 दिनों में स्व-स्वमूल्यांकन कराना अनिवार्य।
- राष्ट्रीय स्तर पर विजेताओं को प्रमाणपत्र व नकद पुरस्कार।
- बच्चों और स्टाफ की सक्रिय भागीदारी जरूरी।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को निर्देश भेजकर कहा है कि प्रत्येक विद्यालय स्व-स्वमूल्यांकन के आधार पर अपना नामांकन करें। यह नामांकन तय प्रारूप पर किया जाएगा और इसकी रिपोर्ट राज्य स्तर पर भेजी जाएगी, जहां से राष्ट्रीय मूल्यांकन के लिए प्रविष्टियां भेजी जाएंगी। उन्होंने बताया कि मूल्यांकन के बाद सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्कूलों को प्रमाणपत्र और नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा, ताकि अन्य विद्यालय भी प्रेरित हों।
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इन बिंदुओं पर होगी रेटिंग
- जल संचयन और संरक्षण- वर्षा जल संचयन की व्यवस्था, पानी का पुनः उपयोग।
- जल की उपलब्धता और गुणवत्ता - पीने के पानी की पर्याप्त आपूर्ति और शुद्धता।
- शौचालय की क्रियाशीलता -लड़के और लड़कियों के लिए अलग, साफ और उपयोग योग्य शौचालय।
- दिव्यांग अनुकूल संरचना - व्हीलचेयर रैंप, हैंडल, विशेष शौचालय।
- हाथ धुलने की व्यवस्था- साबुन और स्वच्छ पानी के साथ उचित स्थान पर व्यवस्था।
- कूड़ा निस्तारण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन-डस्टबिन, कंपोस्ट पिट, कूड़ा अलग करना।
-स्वच्छता और परिसंपत्तियों का रखरखाव - फर्नीचर, दीवार, मैदान, खेल सामग्री की साफ-सफाई।
- जनजागरूकता अभियान- रैलियां, पोस्टर, नारे, विद्यार्थियों की भागीदारी।
- ईको-रखरखाव और हरित पहल – वृक्षारोपण, बगीचा, पॉलिथीन मुक्त कैंपस।
- विद्यालय क्लब और गतिविधियां - ‘इको क्लब’ और अन्य गतिविधियां जो पर्यावरण के हित में हों।
बच्चों में बढ़ेगी जागरूकता
अधिकारियों का मानना है कि इस रेटिंग से विद्यालयों में साफ-सफाई और हरित विकास की आदत पक्की होगी। बच्चों में पानी बचाने, कूड़ा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। बीएसए ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हर विद्यालय स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का आदर्श बने।
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योजना की खास बातें
- जुलाई से जिले में रेटिंग प्रक्रिया शुरू।
- सभी विद्यालयों को 15 दिनों में स्व-स्वमूल्यांकन कराना अनिवार्य।
- राष्ट्रीय स्तर पर विजेताओं को प्रमाणपत्र व नकद पुरस्कार।
- बच्चों और स्टाफ की सक्रिय भागीदारी जरूरी।