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चतुरीपुर में गुड़िया तालाब पर अतिक्रमण
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 14 Aug 2016 11:28 PM IST
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सैनी क्षेत्र के चतुरीपुर गांव के बीच में 13 बीघे में फैला गुड़िया तालाब आज अपना अस्तित्व बचाने की गुहार लगा रहा है। आरोप है कि राजस्व कर्मियों के लिए कमाई का जरिया बने इस तालाब के 75 फीसदी हिस्से को पाट कर घर बसा दिए गए हैं।
विकास खंड कड़ा के ग्राम पंचायत सयांरा का एक मजरा है चतुरीपुर। यह मजरा गुड़िया तालाब के चारों ओर बसा हुआ है। किसी जमाने में गांव के 13 बीघे में फैला तालाब सुंदरता की मिशाल हुआ करता था। मगर अब यह तालाब राजस्व कर्मियों के लिए कमाई का अच्छा खासा जरिया बन गया है। शिकायत है कि लोग लेखपाल की मिलीभगत से तालाब में अवैध रूप से कब्जा कर अपना आशियाना बनाते रहे। इससे आलम यहां तक पहुंच गया है कि अब तालाब का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब भूमि पर कब्जा कर घर बनवाने का सिलसिला अब भी बंद नहीं हुआ है। लोग मौका लगते ही लेखपाल से सांठगांठ कर कब्जा कर लेते हैं। गांव के पूर्व प्रधान का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इसके खिलाफ लिखा-पढ़ी की थी। पर, राजस्व विभाग ने फर्ज अदायगी के सिवा कुछ नहीं किया। ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत राजस्व परिषद कि अध्यक्ष को लिखकर भेजी है, जिससे स्थानीय स्तर पर लीपापोती नहीं हो सके।
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विकास खंड कड़ा के ग्राम पंचायत सयांरा का एक मजरा है चतुरीपुर। यह मजरा गुड़िया तालाब के चारों ओर बसा हुआ है। किसी जमाने में गांव के 13 बीघे में फैला तालाब सुंदरता की मिशाल हुआ करता था। मगर अब यह तालाब राजस्व कर्मियों के लिए कमाई का अच्छा खासा जरिया बन गया है। शिकायत है कि लोग लेखपाल की मिलीभगत से तालाब में अवैध रूप से कब्जा कर अपना आशियाना बनाते रहे। इससे आलम यहां तक पहुंच गया है कि अब तालाब का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि तालाब भूमि पर कब्जा कर घर बनवाने का सिलसिला अब भी बंद नहीं हुआ है। लोग मौका लगते ही लेखपाल से सांठगांठ कर कब्जा कर लेते हैं। गांव के पूर्व प्रधान का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इसके खिलाफ लिखा-पढ़ी की थी। पर, राजस्व विभाग ने फर्ज अदायगी के सिवा कुछ नहीं किया। ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत राजस्व परिषद कि अध्यक्ष को लिखकर भेजी है, जिससे स्थानीय स्तर पर लीपापोती नहीं हो सके।
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