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भारतीय मूल के हेंड्रिक कालका सवा सौ साल बाद आए पैतृक गांव

Fri, 13 Mar 2020 12:24 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2020 12:24 AM IST
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calka come back after 125 years
calka come back after 125 years - फोटो : KAUSHAMBI
सिराथू/अजुहा। असिस्टेंट गूगल और फेसबुक दोस्त की मदद से यूरोपीय महाद्वीप माल्टा में जन्मे भारतीय मूल के हेंड्रिक कालका (75) बृहस्पतिवार को पूर्वजों के गांव कनवार पहुंचे। वे अपने परिवार के भतीजे राम प्रताप से मिलते ही भाव-विभोर हो उठे। 125 साल बाद पूर्वजों से मिलन के साक्षी बने ग्रामीणों की भी आंखे खुशी में नम हो गई। पूर्वजों से मिलने आए हेंड्रिक को होली पर्व पर भारतीय परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया।
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यूरोपीय महाद्वीप में जन्मे भारतीय मूल के हेंड्रिक कालका ने अमर उजाला को बताया कि सन 1895 में उनके बाबा सीताराम कालका को 15 साल की उम्र में अंग्रेज मजदूरी कराने के लिए सूरीनाम उठा ले गए थे। उन्होंने अपने बाबा से पैतृक गांव कौशाम्बी जनपद के सिराथू तहसील के कनवार के बारे में बचपन में सुना था। तभी से वह अपने गांव आकर पूर्वजों से मिलने को लेकर उत्सुक थे। बार-बार अपने वतन की याद सताया करती थी। पर, जिंदगी में तमाम संघर्षों के कारण वह इस ओर ध्यान नहीं दे पाए।
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नौकरी से अवकाश प्राप्त करने के बाद 75 बर्षीय हेंड्रिक को फिर से कनवार गांव की याद आई तो परिवार को व्यवस्थित करने के बाद उन्होंने गूगल असिस्टेंट की मदद से पहले प्रयागराज खोजा। प्रयागराज सर्च करने के बाद उनकी उत्सुकता बढ़ती चली गई। फिर से गूगल की ही मदद से अपने पैतृक गांव कनवार को भी खोज निकालने में कामयाब रहे। गांव सर्च करने के बाद उन्होंने प्रयागराज के अपने फेसबुक दोस्त पवन तिवारी से मदद मांगी। बाबा ने बताया था कि गांव के बगल से रेलवे स्टेशन कनवार है, वहां एक विशाल पीपल का पेड़ भी है।
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माल्टा के दोस्त की मदद के लिए पवन तिवारी ने अपने मोबाइल पर वीडियो काल कर पूर्वजों का गांव दिखाया तो हेंड्रिक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हेंड्रिक अपने पूर्वजों से मिलने के लिए 6446 किमी दूरी का सफर तय कर दोस्त पवन तिवारी के साथ बृहस्पतिवार को पैतृक गांव कनवार आए। हेंड्रिक के आने की सूचना पर पूरा गांव बड़ी बेसब्रिी से उनका इंतजार कर रहा था। सुबह 9.15 बजे हेड्रिक की मुलाकात अपने भतीजे राम प्रताप लोध(60) से हुई। एक-दूसरे से गले मिलते ही दोनों की आंखों में आंसू आ गए। यह भावनात्मक दृश्य देख वहां मौजूद ग्रामीणों की भी आंखे नम हो गईं। परिजनों के साथ ग्रामीणों ने रंगो के त्योहार पर तिलक लगा हेंड्रिक का स्वागत किया।
बच्चों को वजीफा व बेरोजगारों को देंगे काम
सिराथू। यूरोपीय महाद्वीप माल्टा में अपने परिवार के साथ रह रहे भारतीय मूल के हेंड्रिक कालका अपने पैतृक गांव कनवार के लिए कुछ करने की इच्छा ब्यक्त की है। उनका कहना है कि वे बच्चों की शिक्षा के लिए भी आर्थिक सहायता के तौर वजीफा प्रदान करेंगे। कहा कि यहां बेरोजगारी की समस्या बहुत है। वे प्रयास करेंगे कि लोगो को अधिक से अधिक माल्टा में रोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि वह भारत से मछली का व्यापार करने की भी योजना बना रहे हैं।

राजस्व विभाग उपलब्ध कराएगा हेंड्रिक के पूर्वजों का डाटा
सिराथू। भारतीय मूल के माल्टा निवासी हेंड्रिक ने परिजनों से मिलने के बाद एसडीएम सिराथू राजेश कुमार श्रीवास्तव से भी मुलाकात की। उन्होंने अपने पूर्वजों का इतिहास जानने के लिए एसडीएम से मदद मांगी है। एसडीएम ने हेंड्रिक को अश्वस्त किया है कि वे 1359 फसली से उनके पूर्वजों का डाटा खोजकर उपलब्ध करा देंगे। हेंड्रिक ने अगस्त समें फिर से पैतृक गांव कनवार आने का वादा किया है।
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