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बौद्ध नगरी का शौचालय ध्वस्त, खुले में शौच को मजबूर पर्यटक
Sun, 09 Jun 2019 12:52 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, कौशांबी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशांबी
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 09 Jun 2019 12:52 AM IST
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पर्यटन स्थल कौशाम्बी का बदहाल शौंचालय
- फोटो : kaushambi
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तथागत बुद्ध की तपस्थली में आने वाले विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए बनवाया गया सुलभ शौचालय और स्नानागार ध्वस्त हो चुका है। इसकी वजह से यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
कौशाम्बी में विदेशी पर्यटकों का आवागमन बना रहता है। भगवान बुद्ध के अनुयायी यहां श्रीलंका, कंबोडिया आदि देशों से आते हैं। तपस्थली में पर्यटकों के सामने सबसे बड़ी समस्या ठहरने व शौचालय की है। इसलिए यहां चौमासा बिताने के लिए आने वाले पर्यटक प्रयागराज में पनाह लेते हैं।
समस्या को देखते हुए वर्ष 2006 में तत्कालीन कमिश्नर डॉ. ललित वर्मा ने यहां शौचालय और स्नानागार का निर्माण कराया। एक दशक गुजरने के बावजूद सुलभ शौचालय को आज तक ग्राम समाज के हैंडओवर नहीं किया गया।
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जिसके कारण ताला बंद सुलभ शौचालय ध्वस्त हो गया है। ऐसे में अभी भी यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान शिवपूजन यादव ने बताया कि कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया पर, कोई सुनवाई नहीं हुई। इलाकाई ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यटन विभाग ऐतिहासिक स्थल कौशाम्बी की अनदेखी कर रहा है।
कौशाम्बी में विदेशी पर्यटकों का आवागमन बना रहता है। भगवान बुद्ध के अनुयायी यहां श्रीलंका, कंबोडिया आदि देशों से आते हैं। तपस्थली में पर्यटकों के सामने सबसे बड़ी समस्या ठहरने व शौचालय की है। इसलिए यहां चौमासा बिताने के लिए आने वाले पर्यटक प्रयागराज में पनाह लेते हैं।
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समस्या को देखते हुए वर्ष 2006 में तत्कालीन कमिश्नर डॉ. ललित वर्मा ने यहां शौचालय और स्नानागार का निर्माण कराया। एक दशक गुजरने के बावजूद सुलभ शौचालय को आज तक ग्राम समाज के हैंडओवर नहीं किया गया।
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जिसके कारण ताला बंद सुलभ शौचालय ध्वस्त हो गया है। ऐसे में अभी भी यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान शिवपूजन यादव ने बताया कि कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया पर, कोई सुनवाई नहीं हुई। इलाकाई ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यटन विभाग ऐतिहासिक स्थल कौशाम्बी की अनदेखी कर रहा है।