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उपभोक्ताओं की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे बैंक
Updated Tue, 20 Dec 2016 01:01 AM IST
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जिले के बैंक उपभोक्ताओं की उम्मीदों पर सोमवार को भी खरे नहीं उतर सके। 24 हजार मिलने की उम्मीद लेकर बैंकों में लाइन लगाने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह एक, दो और पांच हजार रुपये तक ही मिल सके। आवंटन की रकम सीमा न बढ़ने से उपभोक्ताओं के चेहरों पर मायूसी छाई रही। उधर बैंकों के जिम्मेदार एक-दो दिन में वितरण की राशि में बढ़ोत्तरी की बात कर रहे हैं।
आठ नवंबर से नोटबंदी को लेकर उपभोक्ताओं में जमा और निकासी को लेकर मारामारी रही। बैंकों में पुराने पांच सौ और एक हजार के नोट जमा करने के लिए पहले उपभोक्ताओं की भीड़ बैंक में उमड़ी। इसके बाद जमा की गई रकम को खाते से निकालने के लिए लाइनें लगना शुरू हो गई। नवंबर माह के अंत तक बैंकों में पुराने नोटों की नगदी जमा करने वालों की भीड़ तो खत्म हो गई पर पैसा निकालने वालों को राहत नहीं मिल सकी। उपभोक्ता सुबह के आठ बजते ही बैंकों में पहुंचकर लाइन लगाना शुरू कर देते हैं। नोटबंदी का सवा महीना बीतने के बाद शनिवार को बैंक के जिम्मेदारों ने स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई। उपभोक्ताओं को बताया गया कि सोमवार से एसबीआई, बीओबी और ग्रामीण बैंक की शाखाओं से उपभोक्ताओं को दस से 24 हजार रुपये तक मिलने लगेंगे।
इसे जान उपभोक्ताओं की लंबी लाइन सोमवार को बैंकों में लग गई। लेकिन स्थिति वही ढाक के तीन पात वाली रही। एसबीआई हो या फिर ग्रामीण बैंक उपभोक्ताओं को एक या दो हजार रुपये ही मिल सके। कुछ बैंकों में उपभोक्ताओं को लाइन लगाने के बाद बैरंग लौटना पड़ा। ऐसे में आश्वासन के बाद भी उपभोक्ताओं के हाथ मायूसी ही लगी। हालांकि करेंसी चेस्ट से जिले को सौ करोड़ रुपये का आवंटन सप्ताह भर के लिए हुआ है। इससे चेस्ट से करेंसी बैंकों तक पहुंचने के लिए आवंटन की स्थिति में सुधार आना सम्भव है।
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बीओबी ने बांटे दस-दस हजार
विकास भवन स्थित बीओबी की शाखा में करेंसी चेस्ट से नगदी पहुंच गई थी। इसके चलते यहां के खाताधारकों में सोमवार को मुस्कुराहट दिखी। लाइन में खड़े उपभोक्ताओं को बैंक से दस-दस हजार की नगदी नोटबंदी के बाद पहली बार मिली। एक साथ दस हजार का भुगतान पाने के बाद उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली। अब बीओबी के उपभोक्ताओं में उम्मीद की किरण जाग उठी है कि आने वाले दिनों में उन्हें करेंसी के संकट से राहत मिलेगी। इसी तरह म्योहर स्थित बड़ौदा पूर्वी ग्रामीण बैंक की शाखा से उपभोक्ताओं को दो से पांच हजार रुपये तक का वितरण किया गया। यहां के मैनेजर गौतम का कहना था कि उनके यहां करेंसी रविवार की दोपहर ही आ गई थी। इससे सोमवार को वितरण में कोई परेशानी नहीं हुई।
महेवाघाट और बैरागीपुर बैंक उपभोक्ताओं में रही निराशा
स्थानीय इलाके के उपभोक्ताओं को नगदी संकट से सोमवार को जिले में आई करेंसी राहत नहीं दिला सकी। महेवाघाट स्थित इलाहाबाद बैंक की शाखा से उपभोक्ताओं को एक से दो हजार रुपये का ही आवंटन किया गया। जबकि बैरागीपुर स्थित बीओबी की शाखा से उपभोक्ताओं को चार से पांच हजार रुपये दिए गए। बैंक में पैसा लेने गए रानीपुर निवासी रमेश शुक्ल का आरोप है कि उनकी बेटी की शादी जनवरी में है। बैंक में नगदी होने के बाद भी पैसा नहीं दिया जा रहा। नगदी न मिलने से शादी की तैयारी अधर में लटकी हुई है। मामले में बैंक मैनेजर से कई बार कहा गया पर आम उपभोक्ताओं की तरह ही भुगतान किया जा रहा है। कुछ भी सोमवार को पुराने ढर्रे पर बैंकों से किए गए भुगतान को लेकर उपभोक्ताओं के सब्र का बांध टूटने लगा है। यह नाराजगी कभी भी बैंक परिसर में फूट सकती है।
करेंसी चेस्ट इलाहाबाद से सौ करोड़ रुपये का आवंटन सप्ताह भर के लिए हुआ है। कुछ बैंकों में करेंसी नहीं पहुंच पाई है। मंगलवार से अन्य बैंकों में नगदी आवंटन बढ़ेगा। इस सप्ताह स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी।
दिनेश कुमार मिश्र, एलडीएम
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आठ नवंबर से नोटबंदी को लेकर उपभोक्ताओं में जमा और निकासी को लेकर मारामारी रही। बैंकों में पुराने पांच सौ और एक हजार के नोट जमा करने के लिए पहले उपभोक्ताओं की भीड़ बैंक में उमड़ी। इसके बाद जमा की गई रकम को खाते से निकालने के लिए लाइनें लगना शुरू हो गई। नवंबर माह के अंत तक बैंकों में पुराने नोटों की नगदी जमा करने वालों की भीड़ तो खत्म हो गई पर पैसा निकालने वालों को राहत नहीं मिल सकी। उपभोक्ता सुबह के आठ बजते ही बैंकों में पहुंचकर लाइन लगाना शुरू कर देते हैं। नोटबंदी का सवा महीना बीतने के बाद शनिवार को बैंक के जिम्मेदारों ने स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई। उपभोक्ताओं को बताया गया कि सोमवार से एसबीआई, बीओबी और ग्रामीण बैंक की शाखाओं से उपभोक्ताओं को दस से 24 हजार रुपये तक मिलने लगेंगे।
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इसे जान उपभोक्ताओं की लंबी लाइन सोमवार को बैंकों में लग गई। लेकिन स्थिति वही ढाक के तीन पात वाली रही। एसबीआई हो या फिर ग्रामीण बैंक उपभोक्ताओं को एक या दो हजार रुपये ही मिल सके। कुछ बैंकों में उपभोक्ताओं को लाइन लगाने के बाद बैरंग लौटना पड़ा। ऐसे में आश्वासन के बाद भी उपभोक्ताओं के हाथ मायूसी ही लगी। हालांकि करेंसी चेस्ट से जिले को सौ करोड़ रुपये का आवंटन सप्ताह भर के लिए हुआ है। इससे चेस्ट से करेंसी बैंकों तक पहुंचने के लिए आवंटन की स्थिति में सुधार आना सम्भव है।
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बीओबी ने बांटे दस-दस हजार
विकास भवन स्थित बीओबी की शाखा में करेंसी चेस्ट से नगदी पहुंच गई थी। इसके चलते यहां के खाताधारकों में सोमवार को मुस्कुराहट दिखी। लाइन में खड़े उपभोक्ताओं को बैंक से दस-दस हजार की नगदी नोटबंदी के बाद पहली बार मिली। एक साथ दस हजार का भुगतान पाने के बाद उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली। अब बीओबी के उपभोक्ताओं में उम्मीद की किरण जाग उठी है कि आने वाले दिनों में उन्हें करेंसी के संकट से राहत मिलेगी। इसी तरह म्योहर स्थित बड़ौदा पूर्वी ग्रामीण बैंक की शाखा से उपभोक्ताओं को दो से पांच हजार रुपये तक का वितरण किया गया। यहां के मैनेजर गौतम का कहना था कि उनके यहां करेंसी रविवार की दोपहर ही आ गई थी। इससे सोमवार को वितरण में कोई परेशानी नहीं हुई।
महेवाघाट और बैरागीपुर बैंक उपभोक्ताओं में रही निराशा
स्थानीय इलाके के उपभोक्ताओं को नगदी संकट से सोमवार को जिले में आई करेंसी राहत नहीं दिला सकी। महेवाघाट स्थित इलाहाबाद बैंक की शाखा से उपभोक्ताओं को एक से दो हजार रुपये का ही आवंटन किया गया। जबकि बैरागीपुर स्थित बीओबी की शाखा से उपभोक्ताओं को चार से पांच हजार रुपये दिए गए। बैंक में पैसा लेने गए रानीपुर निवासी रमेश शुक्ल का आरोप है कि उनकी बेटी की शादी जनवरी में है। बैंक में नगदी होने के बाद भी पैसा नहीं दिया जा रहा। नगदी न मिलने से शादी की तैयारी अधर में लटकी हुई है। मामले में बैंक मैनेजर से कई बार कहा गया पर आम उपभोक्ताओं की तरह ही भुगतान किया जा रहा है। कुछ भी सोमवार को पुराने ढर्रे पर बैंकों से किए गए भुगतान को लेकर उपभोक्ताओं के सब्र का बांध टूटने लगा है। यह नाराजगी कभी भी बैंक परिसर में फूट सकती है।
करेंसी चेस्ट इलाहाबाद से सौ करोड़ रुपये का आवंटन सप्ताह भर के लिए हुआ है। कुछ बैंकों में करेंसी नहीं पहुंच पाई है। मंगलवार से अन्य बैंकों में नगदी आवंटन बढ़ेगा। इस सप्ताह स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी।
दिनेश कुमार मिश्र, एलडीएम