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कौशांबी : बेटी खोने के बाद बुजुर्ग मां-बाप बने सहारा, प्रशासन ने भी नहीं की कोई मदद

Fri, 19 May 2023 04:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 19 May 2023 04:55 PM IST
सार

दमद का पूरा गांव का सुरेश बृहस्पतिवार को मजदूरी करने गया था। दोपहर बाद उसकी पत्नी तीन वर्षीय बेटी लाडो को सुलाने के बाद मवेशियों के लिए चारा काटने खेत चली गई। घर में सुरेश का बड़ा बेटा लाला था। शाम करीब चार बजे संदिग्ध हाल में लगी आग ने गरीब परिवार को बेघर कर दिया। झोपड़ी के अंदर सो रही लाडो की भी आग से जलकर दर्दनाक मौत हो गई।

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After losing daughter, elderly parents became support, even the administration did not help
आग लगने से बेघर हुआ परिवार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सदर तहसील के दमद का पूरा गांव में बृहस्पतिवार शाम लगी आग में तीन साल की लाडो की दर्दनाक मौत के बाद पीड़ित परिवार की मदद के लिए फिलहाल कोई आगे नहीं आया। आग की क्रूर लपटों में बेटी खोने के साथ ही गृहस्थी गवां बैठे मजदूर सुरेश की मदद के लिए सिर्फ उसका बुजुर्ग पिता आगे आया है। सुरेश आग से झुलसे बेटे लाला व पत्नी के साथ पिता के घर में शरण लिए है। गांव के कुछ लोगों ने अनाज देकर उसकी मदद की लेकिन समाजसेवियों ने अपनी तरफ से दरियादिली नहीं दिखाई। प्रशासन की तरफ से भी कोई राहत फिलहाल नहीं मिली है।

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दमद का पूरा गांव का सुरेश बृहस्पतिवार को मजदूरी करने गया था। दोपहर बाद उसकी पत्नी तीन वर्षीय बेटी लाडो को सुलाने के बाद मवेशियों के लिए चारा काटने खेत चली गई। घर में सुरेश का बड़ा बेटा लाला था। शाम करीब चार बजे संदिग्ध हाल में लगी आग ने गरीब परिवार को बेघर कर दिया। झोपड़ी के अंदर सो रही लाडो की भी आग से जलकर दर्दनाक मौत हो गई।

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बहन को बचाने में लाडो का भाई लाला भी झुलस गया। दमकल कर्मियों ने जब तक आग पर काबू पाया तब तक घर में रखा गृहस्थी का सारा समान जलकर राख हो चुका था। गृहस्थी के नाम पर पीड़ित परिवार के पास उन्होंने ने शरीर में जो कपड़ा पहन रखा है वही बचा है। घटना से सुरेश व उसकी पत्नी के आंसू नहीं थम रहे हैं। अब सुरेश का सहारा उसका बुजुर्ग पिता दूखी व मां श्रीमती बने हैं। घटना की जानकारी के बाद तमाम समाजसेवी पहुंचे लेकिन आश्वासन की घुट्टी पिलाकर वापस लौट गए।

नगर पंचायत पश्चिमशरीरा-पूरबशरीरा के नव निर्वाचित चेयरमैन तारा सरोज के पति संजय घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने सुरेश से आधार कार्ड सहित कुछ अन्य कागजात मांगे और मदद का आश्वासन दिया। सुरेश ने बताया कि सबकुछ जल गया है तो वह दिलासा की घुट्टी पिलाकर वापस लौट गए। जिस वार्ड में सुरेश रहता है वहां से निर्वाचित सभासद राकेश कुमार ने दरियादिली दिखाते हुए पीड़ित परिवार को एक बोरी गेंहू की व्यवस्था कराई।

बस्ती के ही हीरेन सिंह ने एक बोरी गेहूं दिया है। वार्ड नंबर 12 से निर्वाचित सभासद विजयकांत पांडेय ने एक हजार रुपये की आर्थिक मदद की है। वहीं दूसरी तरफ जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने पीड़ित परिवार को दैवीय आपदा राहत कोष से चार लाख तत्काल व आग से हुए अन्य नुकसान के बाबत मुआवजे का आदेश दिया है। अब यहां पेंच यह फंस गया कि पीड़ित परिवार के पास न तो अब आधार कार्ड है और न ही पासबुक। इस वजह से सरकारी मदद भी नहीं मिल सकी है।

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बिना दरवाजे की कोठरी में बसेरा

सुरेश व उसकी पत्नी और बेटे का नया आशियाना उसके बुजुर्ग पिता का झोपड़ीनुमा घर बना। गरीब पिता ने सुरेश को जिस घर में शरण दी उसमें भी छप्पर है। झोपड़ी में दरवाजा तक नहीं लगा। गांव के लोग सुरेश की हालत में तरस तो खा रहे हैं लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा। पीड़ित परिवार जमीन पर लेट कर अपनी गरीबी पर आंसू बहा रहा है।

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